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    Weather Update: ...तो भीषण गर्मी की मार झेलने वाले देशों में भारत होगा सबसे ऊपर, हालात होंगे बेकाबू

    Updated: Sat, 07 Mar 2026 07:00 AM (GMT+05:30)

    ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के अध्ययन के अनुसार, यदि वैश्विक तापमान 2 डिग्री सेल्सियस बढ़ता है, तो 2050 तक भारत भीषण गर्मी से सबसे अधिक प्रभावित होगा। दुनिय ...और पढ़ें

    भीषण गर्मी करेगी परेशान। प्रतीकात्मक तस्वीर

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    संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। जलवायु परिवर्तन और बढ़ते वैश्विक तापमान को लेकर ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के एक नए अध्ययन ने भारत के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। अध्ययन के मुताबिक, अगर दुनिया का तापमान 2 डिग्री सेल्सियस बढ़ता है, तो भीषण गर्मी की मार झेलने वाले देशों में भारत सबसे ऊपर होगा।

    नेचर सस्टेनेबिलिटी जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार, साल 2050 तक दुनिया की लगभग 41 प्रतिशत आबादी (करीब 3.8 अरब लोग) भीषण गर्मी के साये में जीने को मजबूर होगी। साल 2010 में यह आंकड़ा महज 23 प्रतिशत था।

    शोधकर्ताओं का कहना है कि भारत की विशाल आबादी और पहले से ही गर्म जलवायु इसे बेहद संवेदनशील बनाती है। अध्ययन में कहा गया है कि वैश्विक स्तर पर तापमान बढ़ने से भारत जैसे देशों में हीट स्ट्रेस के कारण होने वाली मौतों का आंकड़ा बढ़ सकता है।

    भारत के लिए मुख्य चुनौतियां

    कूलिंग की बढ़ती मांग

    अध्ययन के प्रमुख लेखक डा जीसस लिजाना के अनुसार, भारत में कूलिंग डिग्री डेज (गर्मी से बचने के लिए आवश्यक ऊर्जा) में भारी बढ़ोतरी होगी। इसका मतलब है कि आने वाले वर्षों में घरों और दफ्तरों को ठंडा रखने के लिए भारी मात्रा में बिजली और एयर कंडीशनर (एसी) की जरूरत पड़ेगी।

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    सेहत और खेती पर असर 

    ऑक्सफोर्ड की प्रोफेसर राधिका खोसला ने चेतावनी दी है कि तापमान में 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक की वृद्धि शिक्षा, स्वास्थ्य, खेती और विस्थापन पर अभूतपूर्व प्रभाव डालेगी। अधिक गर्मी के कारण फसलों के नुकसान और हीट-स्ट्रेस (गर्मी का तनाव) जैसी बीमारियों के बढ़ने का खतरा है।

    अगले पांच साल महत्वपूर्ण 

    वैज्ञानिकों का कहना है कि गर्मी का यह असर 1.5 डिग्री की सीमा पार करने से पहले ही दिखने लगेगा। अगले पांच वर्षों के भीतर ही लाखों घरों को कूलिंग सिस्टम की जरूरत पड़ सकती है, जिससे ऊर्जा की मांग और कार्बन उत्सर्जन दोनों बढ़ेंगे।

    किन देशों पर सबसे ज्यादा असर?

    भारत के अलावा नाइजीरिया, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, बांग्लादेश और फिलीपींस जैसे अधिक आबादी वाले देश इस लिस्ट में सबसे ऊपर हैं। वहीं, ब्राजील और दक्षिण सूडान जैसे देशों में तापमान में सबसे तेज उछाल आने की आशंका है।

    समाधान क्या है?

    अध्ययन में जोर दिया गया है कि सरकारों को जल्द से जल्द नेट जीरो उत्सर्जन की दिशा में कदम उठाने होंगे। साथ ही, शहरों के बुनियादी ढांचे और इमारतों को इस तरह से डिजाइन करना होगा कि वे बढ़ती गर्मी को झेल सकें और ऊर्जा की खपत को कम कर सकें।

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    विशेषज्ञों का कहना है कि यह अध्ययन भारत जैसे विकासशील देशों के लिए एक वेक-अप काल है, जहां गर्मी अब केवल मौसम नहीं बल्कि एक सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बनती जा रही है।