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    परीक्षा माफियाओं की खैर नहीं! NEET-UG फास्ट-ट्रैक कोर्ट में अब खुलेंगे 20 साल पुराने पेपर लीक के राज

    Updated: Fri, 31 Jul 2026 08:36 PM (GMT+05:30)

    देश में प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली से जुड़े मामलों की सुनवाई अब फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी, जिससे दशकों से लंबित पड़े घोटालों को गति मिल सकेगी। ...और पढ़ें

    देश में प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली से जुड़े मामलों की सुनवाई अब फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी। इमेज एआई

    देश में प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली से जुड़े मामलों की सुनवाई अब फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी। इमेज एआई

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। देश में प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली से जुड़े मामलों की सुनवाई अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले के लिए गठित विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट अब केवल इस एक मामले तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पिछले दो दशकों के कई चर्चित परीक्षा घोटालों की सुनवाई भी इसी अदालत में आने की संभावना है।

    इनमें वर्ष 2003 का कैट पेपर लीक, वर्ष 2023 का एम्स नारसेट-4 भर्ती परीक्षा मामला और वर्ष 2024 का यूजीसी-नेट परीक्षा प्रकरण शामिल हैं। केंद्र सरकार के मुताबिक अप्रैल 2026 तक, देशभर की 775 फास्ट-ट्रैक स्पेशल कोर्ट में 2,49,000 से ज्यादा मामले लंबित हैं।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा परीक्षा घोटालों के मामलों में त्वरित सुनवाई और दोषियों को शीघ्र सजा दिलाने के उद्देश्य से फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने की घोषणा के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने राउज एवेन्यू कोर्ट में विशेष अदालत का गठन किया था। विशेष न्यायाधीश अनु ग्रोवर बलिगा की अदालत सोमवार को नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले से संबंधित सीबीआइ की करीब 20 हजार पृष्ठों की चार्जशीट पर सुनवाई करेगी।

    इससे पहले अदालत चार्जशीट को रिकार्ड पर ले चुकी है और सीबीआइ को अतिरिक्त दस्तावेज दाखिल करने के लिए समय दिया गया था।

    जिन पुराने परीक्षा घोटालों की सुनवाई अब तक राउज एवेन्यू स्थित अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नीतू नागर की अदालत में चल रही थी, वे सभी अलग-अलग चरणों में अटक गए। पिछले माह उनके राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में प्रतिनियुक्ति पर चले जाने के बाद कई मामलों की सुनवाई बीच रास्ते में रुक गई। अब फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन के बाद इन मामलों को नई अदालत में स्थानांतरित किए जाने की संभावना है, जिससे लंबे समय से अटके मुकदमों में फिर से गति आ सकती है।

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    22 वर्ष बाद भी आरोप तय नहीं

    सबसे पुराना मामला 2003 के कामन एडमिशन टेस्ट (कैट) पेपर लीक का है। नवंबर 2003 में परीक्षा से एक दिन पहले प्रश्नपत्र लीक होने की सूचना मिलने के बाद परीक्षा रद करनी पड़ी थी। करीब 1.25 लाख अभ्यर्थी प्रभावित हुए थे। बाद में परीक्षा को फरवरी 2024 के लिए री-शेड्यूल किया गया था।

    सीबीआइ ने 2004 में ही चार्जशीट दाखिल कर दी थी, मई 2019 में इस मामले को राउज एवेन्यू कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया गया था और तब से लेकर मई 2026 तक औसतन हर वर्ष नौ सुनवाइयां हुईं। लेकिन 22 वर्ष बाद भी मामला आरोप तय करने के चरण से आगे नहीं बढ़ पाया। कोर्ट 26 जून में अदालत आदेश सुनाने वाली थी, लेकिन इससे पहले न्यायाधीश के स्थानांतरण के कारण मामला फिर अटक गया।

    एम्स नारसेट मामले में एक वर्ष की बहस बेअसर

    एम्स और अन्य अस्पतालों में नर्सिंग भर्ती के लिए आयोजित 2023 की नारसेट-4 परीक्षा में पेपर लीक के मामले में भी आरोप तय करने पर लगभग एक वर्ष तक बहस चली।

    सीबीआइ का आरोप है कि अभ्यर्थियों को परीक्षा खत्म होने से पहले उत्तर उपलब्ध कराने की साजिश रची गई थी और इसके लिए धन लिया गया। लेकिन न्यायाधीश के बदलने के कारण अब यह बहस फास्ट ट्रैक कोर्ट में नए सिरे से शुरू हो सकती है। करीब 90 हजार अभ्यर्थी इस परीक्षा में शामिल हुए थे।

    यूजीसी-नेट में क्लोजर रिपोर्ट पर भी सवाल 

    2024 की यूजीसी-नेट परीक्षा मामले में सीबीआइ ने जांच के बाद क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी थी। हालांकि अदालत ने इसे स्वीकार करने से इन्कार कर दिया। अदालत ने जांच अधिकारी से पूछा कि जब जांच में यह सामने आया कि कुछ लोगों ने अभ्यर्थियों से लीक पेपर के नाम पर पैसे वसूले, तो फिर क्लोजर रिपोर्ट किस आधार पर दाखिल की गई। इस मामले में अदालत अभी सीबीआइ के स्पष्टीकरण पर विचार कर रही है। अगली सुनवाई छह अगस्त को होगी।

    नीट-यूजी पर सबसे ज्यादा नजर 

    सबसे अधिक चर्चा नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले की है। सीबीआइ ने 13 आरोपितों के खिलाफ करीब 20 हजार पृष्ठों की चार्जशीट दाखिल की है। एजेंसी के अनुसार, हजारों पन्नों के दस्तावेज, कई गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्य अदालत में पेश किए गए हैं। अब सोमवार की सुनवाई में इस मामले की आगे की न्यायिक प्रक्रिया तय होगी।

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