दिल्ली विश्वविद्यालय में बड़े बदलाव की तैयारी, मिलेगा विदेश जाने का मौका; कई नए कोर्स भी होंगे शुरू
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रों को वैश्विक अनुभव और रोजगारोन्मुख शिक्षा प्रदान करने के लिए 'सेमेस्टर अवे' कार्यक्रम शुरू कर रहा है, जिसके तहत छात्र एक से ...और पढ़ें

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रों को वैश्विक अनुभव और रोजगारोन्मुख शिक्षा प्रदान करने के लिए 'सेमेस्टर अवे' कार्यक्रम शुरू कर रहा है
HighLights
छात्रों को एक सेमेस्टर विदेश में पढ़ने का अवसर।
उद्यमिता और नवाचार को बढ़ावा देने वाले नए स्किल कोर्स।
अरबी, फारसी, संस्कृत बौद्ध धर्म के प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम।
लोकेश शर्मा, नई दिल्ली। डीयू अब अपने छात्रों को केवल डिग्री ही नहीं, बल्कि वैश्विक अनुभव और रोजगारोन्मुख शिक्षा भी उपलब्ध कराने की तैयारी में है। विश्वविद्यालय की गुरुवार को कार्यकारी परिषद (ईसी) की 1283वीं बैठक में ऐसे कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी मिल सकती है, जो डीयू के छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में अहम कदम माने जा रहे हैं।
इनमें सबसे बड़ा फैसला सेमेस्टर अवे प्रोग्राम शुरू करने का है, जिसके तहत छात्र अपने पाठ्यक्रम का एक सेमेस्टर विदेश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में पूरा कर सकेंगे।
यह कार्यक्रम अंडरग्रेजुएट करिकुलम फ्रेमवर्क (यूजीसीएफ-2022) के तहत लागू किया जाएगा। इसके माध्यम से छात्रों को विदेशी विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक व्यवस्था, शोध संस्कृति और वैश्विक शिक्षण पद्धति का प्रत्यक्ष अनुभव मिलेगा। साथ ही अर्जित क्रेडिट को डीयू की डिग्री में शामिल किए जाने की व्यवस्था भी रहेगी।
विश्वविद्यालय का कहना है कि इससे छात्रों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ेगी और उच्च शिक्षा व रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।
बैठक में बदलती औद्योगिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कई स्किल एन्हांसमेंट कोर्स (एसईसी) भी मंजूर किए गए। इनमें एंटरप्रेन्योरियल माइंडसेट एंड आपर्च्युनिटी डिस्कवरी, डिजाइन थिंकिंग एंड वेंचर डेवलपमेंट, वेंचर बिजनेस डिजाइन एंड गो-टू-मार्केट स्ट्रेटेजी तथा एंटरप्रेन्योरियल कम्युनिकेशन एंड इन्वेस्टर पिचिंग जैसे आधुनिक पाठ्यक्रम शामिल हैं।
इन कोर्सों का उद्देश्य छात्रों में नवाचार, उद्यमिता, नेतृत्व क्षमता और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देना है, ताकि वे नौकरी तलाशने के बजाय रोजगार सृजित करने की दिशा में आगे बढ़ सकें।
भारतीय भाषाओं और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने के लिए भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। दूरस्थ एवं आनलाइन शिक्षा से जुड़े संस्थान के माध्यम से अरबी और फारसी भाषा के प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया है।
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वहीं बौद्ध अध्ययन विभाग में संस्कृत बौद्ध धर्म विषय पर सर्टिफिकेट और डिप्लोमा पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जाएंगे। इन पाठ्यक्रमों से भारतीय ज्ञान परंपरा और शास्त्रीय भाषाओं के अध्ययन को नई गति मिलने की उम्मीद है।