एक साल बाद भी फाइलों में अटकी हर जिले में गोशाला बनाने की योजना, बेसहारा गोवंश की समस्या बरकरार
दिल्ली में बेसहारा गायों की समस्या गंभीर बनी हुई है, जहां गौशालाएं क्षमता से अधिक भरी हैं और नई गौशालाओं के निर्माण की योजनाएं केवल फाइलों तक सीमित है ...और पढ़ें

एआई जेनेरेटेड इमेज।
HighLights
दिल्ली में बेसहारा गायों की समस्या का समाधान नहीं।
गौशालाएं क्षमता से अधिक भरीं, नई योजनाएं अटकीं।
अवैध डेयरियों पर कार्रवाई में विभागों की निष्क्रियता।
निहाल सिंह, नई दिल्ली। सरकार बदलती गई, लेकिन नहीं बदली है तो दिल्ली में बेसहारा गाय और गोवंश की समस्या। कहने को तो ये गायें बेसहारा होती हैं, लेकिन जब तक ये बेसहारा होती हैं, तब तक ही कोई एजेंसी इन गायों को पालने वालों पर कार्रवाई करने के लिए तैयार होती है।
लेकिन जैसे ही एमसीडी और पुलिस की टीम कार्रवाई करके चली जाती है, गायों को पालने वाले आ जाते हैं और उन्हें हांकते हुए दूध निकालने के लिए ले जाते हैं। इसमें दिल्ली सरकार के पशुपालन विभाग से लेकर एमसीडी और पुलिस के कर्मियों की मिलीभगत होती है।
यही वजह है कि इस मुद्दे का समाधान नहीं हो पा रहा है। यह हाल तब है, जबकि दिल्ली में सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्वयं ही इस समस्या के समाधान के निर्देश दिए थे।
इसके तहत हर जिले में एक गौशाला बनाने की बात थी, लेकिन सब कुछ फाइलों में ही चल रहा है। जमीनी स्तर पर इस समस्या के समाधान के लिए एक कदम तक दिल्ली सरकार के पशुपालन विभाग और नगर निगम ने नहीं बढ़ाया है।
जबकि दिल्ली के रिहायशी इलाकों में अवैध डेयरियां चल रही हैं। पुलिस को भी इसकी जानकारी है और एमसीडी को भी इसकी जानकारी है।
लेकिन एमसीडी पुलिस को अवैध डेयरियों के खिलाफ एफआइआर करने का आदेश देकर अपनी जिम्मेदारी से इतिश्री कर लेती है और पुलिस भी अवैध डेयरी संचालकों की पहचान के अभाव में मामले को बंद कर देती है। फिर होता वही है, ढाक के तीन पात।
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चारों गौशालाएं भरने की कगार पर
दिल्ली में संचालित चारों गौशालाओं में गोवंश की संख्या लगातार बढ़ रही है। दो गौशालाएं निर्धारित क्षमता से अधिक भर चुकी हैं, जबकि दो में भी सीमित जगह बची है। सुल्तानपुर डबास गौशाला की क्षमता 7,848 गोवंश की है, जबकि यहां करीब 8,200 गोवंश रखे गए हैं।
वहीं, हरेवली गौशाला में 3,270 की क्षमता के मुकाबले 4,214 गोवंश मौजूद हैं। सुरहेड़ा गौशाला में 5,232 गोवंश रखने की क्षमता है और यहां करीब 5,100 गोवंश हैं। यानी यहां करीब 130 गोवंश रखने की ही गुंजाइश बची है।
रेवला खानपुर गौशाला की क्षमता 3,488 है और यहां करीब 2,700 गोवंश हैं। यहां करीब 800 गोवंश रखने की जगह शेष है। हालांकि दिल्लीभर से प्रतिदिन 100 से अधिक शिकायतें आने के कारण यह क्षमता भी जल्द पूरी होने की आशंका है। ऐसे में नई गौशालाओं और मौजूदा गौशालाओं की क्षमता बढ़ाने की जरूरत है।
दिल्ली सरकार के पशुपालन विभाग की क्या है जिम्मेदारी और क्या है परेशानी
- दिल्ली में जन्म लेने वाले प्रत्येक गोवंश का पंजीकरण और टीकाकरण की जिम्मेदारी दिल्ली के पशुपालन विभाग की है।
- ऐसे में जहां पर भी अवैध डेयरियां चल रही हैं, वहां उन्हें बंद कराने की जिम्मेदारी भी इसी विभाग की है।
- नई गौशालाओं का निर्माण करना।
- गौशालाओं को बनाने के लिए बड़ी मात्रा में भूमि की जरूरत होती है। ऐसे में दिल्ली सरकार के पशुपालन विभाग को इसके लिए जगह तलाशने में दिक्कत होती है।
- इन परियोजनाओं में अधिकारियों को परोक्ष व अपरोक्ष रूप से व्यक्तिगत लाभ नहीं होता है, इसलिए नई गौशालाएं बनाने की योजनाएं केवल फाइलों में अटक जाती हैं।
एमसीडी की क्या है जिम्मेदारी और क्या है परेशानी
- दिल्ली में पुलिस की मदद से अवैध डेयरियों को बंद कराना, लेकिन पुलिस समय पर न मिलने पर कार्रवाई नहीं हो पाती।
- एमसीडी की जिम्मेदारी बेसहारा गायों को पकड़कर गौशाला छोड़ना है।
- गौशालाएं 50 किलोमीटर तक दूर हैं। ऐसे में पूर्वी व दक्षिणी दिल्ली में पकड़ी गई गायों को छोड़ने में काफी समय लग जाता है।
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