Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    अब सिर्फ सर्दी नहीं, गर्मी में भी खतरा; दिल्ली-NCR देश में 'ओजोन प्रदूषण' का सबसे बड़ा हॉटस्पॉट

    Updated: Tue, 30 Jun 2026 02:40 PM (IST)

    सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायरमेंट (सीएसई) के विश्लेषण के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर देश में ओजोन प्रदूषण का सबसे बड़ा हॉटस्पॉट बन गया है। ...और पढ़ें

    सांकेतिक तस्वीर। सौजन्य- AI Generated

    सांकेतिक तस्वीर। सौजन्य- AI Generated

    HighLights

    1. हवा में घुला ओजोन, सांस-अस्थमा के मरीज रहें अलर्ट

    2. गर्मी और वाहनों से बढ़ता अदृश्य ओजोन प्रदूषण

    3. स्वास्थ्य, कृषि और ग्लेशियरों पर गंभीर प्रभाव

    राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। पर्यावरण थिंक टैंक सेंटर फार साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) के एक नए विश्लेषण में एक बहुत चिंताजनक ट्रेंड सामने आया है। देश के शहरों में जमीनी स्तर का ओजोन प्रदूषण अब किसी एक मौसम या कुछ घंटों की बात नहीं रह गया है, बल्कि यह एक गंभीर और सालभर का संकट बन चुका है।

    गर्मी में ज्यादा खतरनाक हुआ साइलेंट किलर

    विश्लेषण के अनुसार दिल्ली-एनसीआर देश में ओजोन प्रदूषण के सबसे बड़ा हॉटस्पॉट बनकर उभरा है। वहीं उत्तर भारत के साथ-साथ दक्षिण एवं तटीय इलाकों के शहर भी इस अदृश्य गैस की चपेट में आ चुके हैं।

     Noida Authority (6)

    मंगलवार को जारी किए गए इस विश्लेषण के अनुसार बढ़ती गर्मी, तेज धूप और वाहनों व उद्योगों से निकलने वाली गैसों के आपसी रिएक्शन के कारण यह प्रदूषक पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य दोनों के लिए बड़ा खतरा बन गया है।

    विश्लेषण के मुख्य प्वाइंट

    • चंडीगढ़ और जयपुर में सबसे ज्यादा असर : वर्ष 2021 से 2026 के आंकड़ों के विश्लेषण के मुताबिक, गर्मियों में चंडीगढ़ में ओजोन का औसत स्तर देश में सबसे अधिक रहा। इसके ठीक बाद जयपुर और अहमदाबाद का स्थान है।
    • दिल्ली और एनसीआर मुख्य केंद्र : दिल्ली और एनसीआर में ओजोन की स्थिति सबसे बदतर है। अध्ययन के सभी 71 दिनों में यहां प्रदूषण का स्तर राष्ट्रीय मानक (100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर) से ऊपर रहा। दिल्ली का पूसा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद इसके सबसे बड़े हॉटस्पॉट रहे।
    • ''टाक्सिक नाइट्स'' का नया खतरा : आमतौर पर दिन में धूप के साथ बढ़ने वाला ओजोन अब रात में भी हवा में जमा रह जाता है। रात के समय ओजोन के खतरनाक स्तर के मामले में दिल्ली एवं एनसीआर (46 रातें) सबसे ऊपर है, जिसके बाद बेंगलुरु (14 रातें) और भोपाल (13 रातें) का नंबर आता है।
    • असर की लंबी अवधि : ओजोन हवा में अब ज्यादा समय तक टिक रहा है। भोपाल में सबसे ज्यादा (औसतन 17 घंटे प्रतिदिन) ओजोन का स्तर सुरक्षित सीमा से ऊपर रहा, जबकि लखनऊ, मुंबई, बेंगलुरु में यह अवधि करीब 16 घंटे दर्ज की गई।
    • सेहत पर सीधा वार : यह गैस फेफड़ों को भारी नुकसान पहुंचाती है, जिससे अस्थमा और सांस की बीमारियां बढ़ रही हैं। डॉक्टरों के अनुसार, इसके लंबे समय तक संपर्क में रहने से दिल के दौरे और स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ जाता है।
    • खेती और ग्लेशियरों को नुकसान : ओजोन के कारण देश में गेहूं की पैदावार में हर साल करीब 14-15 प्रतिशत की कमी आ रही है। इतना ही नहीं, यह प्रदूषण उड़कर हिमालयी क्षेत्रों तक पहुंच रहा है, जिससे ग्लेशियर पिघलने की रफ्तार तेज हो सकती है।

    आगे की राह : क्या है समाधान?

    सीएसई की कार्यकारी निदेशक अनुमिता रायचौधुरी के अनुसार, वर्तमान राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) मुख्य रूप से धूल और पीएम (पीएम) कणों को कम करने पर केंद्रित है। लेकिन अब समय आ गया है कि एनसीएपी 2.0 में ''मल्टी-पाल्यूटेंट रणनीति'' अपनाई जाए।

    खबरें और भी

    ओजोन को रोकने के लिए वाहनों, उद्योगों और कचरा जलाने से निकलने वाली गैसों (जैसे नाइट्रोजन डाइआक्साइड और वोलेटाइल आर्गेनिक कंपाउंड) पर एक साथ लगाम लगानी होगी। इसके लिए राज्यों को अपनी सीमाओं से ऊपर उठकर साझा क्षेत्रीय कार्ययोजना के तहत काम करना होगा।