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दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर पर सिर्फ बड़े आयोजनों में चौकसी क्यों? नरेला मर्डर केस के बाद सीमा निगरानी पर उठे गंभीर सवाल

Published: Tue, 08 Sep 2026 08:01 PM (IST)

दिल्ली-हरियाणा सीमा पर बड़े आयोजनों के दौरान सुरक्षा कड़ी होती है, पर सामान्य दिनों में ढीली निगरानी से सवाल उठ ...और पढ़ें

दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर पर सुरक्षा

दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर पर सुरक्षा

HighLights

  1. बड़े आयोजनों पर दिल्ली-हरियाणा सीमा पर कड़ी होती है सुरक्षा।

  2. सामान्य दिनों में ढीली निगरानी से अपराधों पर नियंत्रण कठिन।

  3. नरेला हत्याकांड ने सीमा पार सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए।

जागरण संवाददाता, बाहरी दिल्ली। राजधानी में जब भी कोई बड़ा आयोजन होता है, दिल्ली-हरियाणा सीमा पर पुलिस की चौकसी अचानक बढ़ जाती है। मुख्य बॉर्डर पर बैरिकेडिंग, अतिरिक्त पुलिस बल और वाहनों की जांच शुरू हो जाती है।

लेकिन आयोजन समाप्त होते ही सुरक्षा व्यवस्था धीरे-धीरे सामान्य हो जाती है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या अपराधियों से निपटने के लिए बॉर्डर की निगरानी केवल बड़े आयोजनों तक सीमित रहनी चाहिए?

जानकारी के अनुसार आगामी ब्रिक्स सम्मेलन को देखते हुए दिल्ली से सटे हरियाणा के सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा बढ़ाई जाने की उम्मीद है।

ब्रिक्स से पहले इन अवसरों पर बढ़ी थी चौकसी

इससे पहले किसान आंदोलन और अन्य बड़े आयोजनों के दौरान सिंघु, औचंदी, सफियाबाद और लामपुर समेत प्रमुख बार्डर पर पुलिस बल की तैनाती बढ़ाई गई थी।

वाहनों की जांच और बैरिकेडिंग के साथ संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी गई। लेकिन सामान्य दिनों में मुख्य मार्गों के अलावा गांवों को जोड़ने वाले छोटे रास्तों पर ऐसी सख्ती लगातार दिखाई नहीं देती।

हाल में नरेला इलाके में सोनीपत के नाहरी गांव निवासी प्रापर्टी डीलर प्रमोद की हत्या के बाद सीमा निगरानी व्यवस्था पर सवाल और गंभीर हो गए हैं।

पुलिस जांच में आरोपितों के हरियाणा से आने की बात सामने आई और तीनों हमलावर वारदात के बाद किस तरह दिल्ली की सीमा पार कर गए, यह जांच का विषय है।

'केवल मुख्य बॉर्डर पर पुलिस तैनात करना पर्याप्त नहीं'

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए केवल मुख्य बॉर्डर पर पुलिस तैनात करना पर्याप्त नहीं होगा।

नरेला, बवाना, बांकनेर, घोघा और आसपास के गांवों से हरियाणा की ओर जाने वाले संपर्क मार्गों को भी निगरानी नेटवर्क में शामिल करना होगा। इसके अलावा बॉर्डर की निगरानी में सीसीटीवी सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बन सकता है।

कैमरों की पर्याप्त संख्या के साथ उनकी लाइव निगरानी और रिकॉर्डिंग की नियमित समीक्षा होनी चाहिए। किसी वारदात के बाद फुटेज तलाशने के बजाय संदिग्ध वाहनों और नंबर प्लेट की पहचान के लिए प्रभावी निगरानी तंत्र विकसित करना जरूरी है।

इसके साथ दिल्ली और हरियाणा पुलिस के बीच सूचना साझा करने की व्यवस्था भी मजबूत करनी होगी।