दिल्ली चिड़ियाघर में वन्यजीवों की सुरक्षा पर उठे सवाल, हिरण का शव छह दिन तक पड़ा रहा
दिल्ली चिड़ियाघर में एक पाड़ा हिरण का शव छह दिन से अधिक समय तक एरिना में पड़ा रहा, जिससे वन्यजीवों ...और पढ़ें

दिल्ली चिड़ियाघर में हिरण का शव छह दिन से अधिक समय तक पड़ा रहा।
HighLights
दिल्ली चिड़ियाघर में छह दिन तक पड़ा रहा हिरण का शव।
वन्यजीवों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे।
निदेशक ने लापरवाही पर जांच के आदेश दिए, कार्रवाई होगी।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली चिड़ियाघर में वन्यजीवों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एरिना क्षेत्र में एक पाड़ा हिरण का शव छह दिन से अधिक समय तक पड़ा रहा, लेकिन इसकी जानकारी जिम्मेदार कर्मचारियों को नहीं हो सकी। बाद में शव क्षत-विक्षत हालत में मिला।
वहीं, पांच मादा और एक नर पाडा हिरण भी घायल अवस्था में हैं जिनका इलाज चल रहा है। इन हादसों के बाद चिड़ियाघर में हिरणों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल और गहरा गए हैं। एरिना वह क्षेत्र है, जहां दर्शकों को दिखाने के लिए वन्यजीवों को कुछ समय के लिए लाया जाता है। सूत्रों के मुताबिक, बीट नंबर-एक में करीब 60 पाडा हिरण हैं।
बीट इंचार्ज के अवकाश पर होने पर हुई लापरवाही
बीट इंचार्ज के अवकाश पर रहने के दौरान एरिना में हिरणों की आवाजाही की निगरानी के लिए एमटीएस बीट असिस्टेंट की ड्यूटी लगाई गई थी। उसे एरिना में लाए गए हिरणों की संख्या और शाम को उन्हें वापस बाड़े में भेजे जाने के समय उनकी संख्या का रिकॉर्ड रखना था। आरोप है कि निर्धारित रिकॉर्ड नहीं रखा गया।
इसी वजह से एक हिरण के एरिना से वापस बाड़े में नहीं लौटने की जानकारी समय पर सामने नहीं आई। छह दिन से अधिक समय तक शव खुले क्षेत्र में पड़ा रहा। बारिश के कारण शव फूल गया और बाद में चील, जंगली बिल्ली तथा नेवले जैसे जानवरों ने उसे क्षत-विक्षत कर दिया।
छुट्टी से लौटे बीट इंचार्ज ने एरिना में हिरण का शव देखा
मामले का पता तब चला जब छुट्टी से लौटे बीट इंचार्ज ने एरिना में हिरण का शव देखा। इसके बाद शव को चिड़ियाघर के वेटनरी अस्पताल भेजा गया। शव काफी हद तक कंकाल में बदल चुका है, इसलिए उसकी मौत के कारणों का पता लगाने में भी परेशानी आ रही है।
वहीं, पांच मादा और एक नर पाड़ा हिरण के घायल मिलने से भी सवाल उठ रहे हैं कि चिड़ियाघर में हिरणों की नियमित निगरानी किस तरह की जा रही है। इन हिरणों के घायल होने के कारणों की भी जांच की जा रही है।
चिड़ियाघर के निदेशक डा. संजीत कुमार ने कहा कि वन्यजीवों की देखरेख में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मामले की जांच कर जिम्मेदारी तय की जाएगी।
एक दशक बाद जिराफ और जेब्रा की वापसी की तैयारी
वहीं, चिड़ियाघर में करीब एक दशक बाद जिराफ और जेब्रा की वापसी की तैयारी है। नए मास्टर प्लान के तहत दोनों प्रजातियों के लिए आधुनिक बाड़े बनाए जा रहे हैं। निर्माण पूरा होने के बाद इन्हें विदेश से दिल्ली लाने की योजना है। आखिरी जिराफ अंकित की जून 2015 में दिल का दौरा पड़ने से मौत हुई थी, जबकि आखिरी जेब्रा की मृत्यु 30 अप्रैल 2011 को हुई थी।
चिड़ियाघर में वन्यजीवों की प्रजातियों और संख्या बढ़ाने पर भी जोर है। करीब तीन दशक पहले यहां 130 से अधिक प्रजातियां थीं, जो घटकर 93 रह गई हैं। वर्तमान में करीब 1,245 वन्यजीव हैं। मास्टर प्लान-2047 में प्रजातियों की संख्या बढ़ाकर 109 करने का लक्ष्य है। जिराफ-जेब्रा के अलावा चीता, न्यू वर्ल्ड मंकी और माउस डियर को भी लाने की योजना है।
