वोटर लिस्ट में नाम बचाने कनाडा से दिल्ली आईं बुशरा, SIR नोटिस के जवाब में खर्च किए डेढ़ लाख
पुरानी दिल्ली की बुशरा सुल्तान ने मतदाता सूची में अपना नाम सुरक्षित रखने के लिए कनाडा से दिल्ली तक 1.5 ...और पढ़ें

बुशरा सुल्ताना का फाइल फोटो व बाड़ा हिंदूराव स्थित स्कूल में एसआइआर के नोटिस के बाद जानकारी के लिए पहुंचे लोग। जागरण
HighLights
बुशरा सुल्तान ने मतदाता सूची में नाम बचाने के लिए यात्रा की।
कनाडा से दिल्ली आने में डेढ़ लाख रुपये का खर्च आया।
ऑनलाइन सुनवाई की सुविधा न मिलने से आर्थिक नुकसान हुआ।
शशि ठाकुर, नई दिल्ली। एसआइआर को लेकर मचे राजनीतिक घमासान के बीच एक ऐसा मामला सामने आया है, जो चिंता के साथ संवैधानिक अधिकार को सुरक्षित रखने की मिसाल है।
पुरानी दिल्ली निवासी एक महिला ने को मतदाता सूची में अपना नाम सुरक्षित रखने के लिए करीब डेढ़ लाख रुपये खर्च कर कनाडा से 12 हजार किमी तक की हवाई यात्रा तय कर दिल्ली पहुंची है। मामला मटिया महल की बुशरा सुल्तान का है। उन्हें नोटिस का जवाब देने और निस्तारण के लिए पिछले माह कनाडा से दिल्ली आना पड़ा।
डेढ़ लाख की फ्लाइट ली, अब वापस लौट गईं बुशरा
वैंकूवर में बीमार बेटी के पास मौजूद बुशरा को नोटिस की प्रक्रिया पूरी करने के लिए 28 सितंबर की फ्लाइट पकड़ी, जिसका एक तरफ का हवाई किराया ही करीब डेढ़ लाख रुपये का था। दिल्ली आने के बाद उन्होंने प्रक्रिया पूरी की।
उनका आरोप है कि उन्हें समय रहते बीएलओ द्वारा ऑनलाइन सुनवाई की सुविधा की जानकारी नहीं दी गई और बूथ पर आने के लिए मजबूर किया गया। इस कारण उनके परिवार को आर्थिक व मानसिक नुकसान झेलना पड़ा है।
वह मटियामहल विधानसभा के पार्ट नंबर पांच की मतदाता हैं। एसआइआर के दौरान उन्होंने एन्युमरेशन फार्म जमा की थी। उनका नाम ड्राफ्ट रोल में शामिल भी हो गया।
तो नहीं होता नुकसान...
इस दौरान 22 सितंबर को उन्हें नाम में त्रुटि का नोटिस मिला। तब उन्होंने बीएलओ से संपर्क किया। जिसने, उन्हें बताया कि फोटो अपलोड करने के लिए उनका मौके पर मौजूद रहना जरूरी है। तब उन्होंने परेशानी बीएलए- दो के जरिये अधिकारियों को भी दी, लेकिन कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं मिली।
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इसलिए उन्हें आना पड़ा। अगर, ऑनलाइन नोटिस प्रक्रिया निस्तारण की जानकारी दे दी होती तो न तो उनको आर्थिक नुकसान होता और न ही परेशानी।
बुशरा के मामले की जानकारी नहीं है। जबकि, वह रोजाना बीएलओ के साथ बैठक करते हैं। अगर उन्हें समय रहते मामले की जानकारी दी जाती तो कोई दूसरी व्यवस्था की जा सकती थी।
प्रदीप कुमार, एइआरओ, मटियामहल विधानसभा
