दिल्लीवासियों को अब तय समय में मिलेंगी सरकारी सेवाएं, IT मंत्री ने विधानसभा में किया विधेयक पेश
दिल्ली के आईटी मंत्री ने 'दिल्ली (नागरिकों का समय पर और आसानी से सेवाएं पाने का अधिकार) विधेयक, 2026' पेश किया है। यह विधेयक नागरिकों को तय समय में पा ...और पढ़ें

दिल्ली में अब नागरिकों को मिलेगा सरकारी सेवाओं का कानूनी अधिकार।
HighLights
नागरिकों को तय समय में मिलेंगी पारदर्शी सरकारी सेवाएं।
अधिकारियों की लापरवाही पर लगेगा कड़ा जुर्माना।
शिकायत निवारण के लिए दो-स्तरीय तंत्र स्थापित।
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। दिल्ली के आइटी मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने सोमवार को दिल्ली विधानसभा में ‘दिल्ली (नागरिकों का समय पर और आसानी से सेवाएं पाने का अधिकार) विधेयक, 2026’ पेश किया। इस नए कानून का मुख्य उद्देश्य दिल्ली के नागरिकों को पारदर्शी, डिजिटल और बिना किसी दफ्तर के चक्कर काटे तय समय-सीमा के भीतर सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराना है। यह नया कानून वर्ष 2011 में बने पुराने कानून का स्थान लेगा और नागरिकों को सेवा का कानूनी अधिकार देगा।
इस विधेयक की सबसे बड़ी खासियत आवेदन की आसान और पारदर्शी प्रक्रिया है। जमा किए गए प्रत्येक आवेदन को एक यूनिक एप्लीकेशन नंबर मिलेगा, जिससे नागरिक घर बैठे ऑनलाइन ट्रैकिंग कर सकेंगे। यदि कोई अधिकारी निर्धारित सीमा के भीतर सेवा प्रदान नहीं करता है, तो आवेदन आटो-एस्केलेशन सिस्टम के जरिए खुद-ब-खुद वरिष्ठ अधिकारी के पास ट्रांसफर हो जाएगा।
देरी पर नकेल कसने के लिए कड़े जुर्माने के प्रावधान
अधिकारियों की लापरवाही और सेवा में अनावश्यक देरी पर नकेल कसने के लिए कड़े जुर्माने के प्रावधान किए गए हैं। बिना उचित कारण देरी करने या गलत तरीके से आवेदन रद्द करने वाले जिम्मेदार अधिकारी पर 250 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से अधिकतम 5,000 रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। यह राशि सीधे संबंधित अधिकारी के वेतन से दंड के रूप में काटी जाएगी, हालांकि दंड तय करने से पहले अधिकारी को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा।
विधेयक में दो-स्तरीय शिकायत निवारण तंत्र बनाया गया है। प्रथम स्तर पर संबंधित विभाग का वरिष्ठ अधिकारी 30 दिनों के भीतर शिकायत का निस्तारण करेगा। इसके बाद भी संतुष्टि न मिलने पर नागरिक ‘दिल्ली राइट टू सर्विस कमीशन’ में दूसरी अपील कर सकेंगे। इस आयोग के पास सरकारी कार्यालयों का निरीक्षण करने, रिकॉर्ड जांचने, समन जारी करने और लापरवाह कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश करने की पूरी न्यायिक शक्तियां होंगी।
कानून पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में प्रभावी होगा
यह कानून पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में प्रभावी होगा। यह दिल्ली सरकार के विभागों के साथ-साथ एमसीडी, एनडीएमसी, दिल्ली कैंटोनमेंट बोर्ड, दिल्ली जल बोर्ड और डीडीए जैसे सभी स्थानीय निकायों एवं अधिसूचित संस्थाओं पर समान रूप से लागू होगा। आईटी मंत्री के अनुसार, यह विधेयक दिल्ली में पारदर्शी, जवाबदेह और जन-केंद्रित सुशासन की नींव मजबूत करेगा।