मिला नहीं है 300 किलो विस्फोटक, गणतंत्र दिवस पर बांग्लादेशी-खालिस्तान समर्थक आतंकी संगठनों के हमले का अलर्ट
गणतंत्र दिवस से पहले दिल्ली में कड़ी सुरक्षा है क्योंकि 300 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट विस्फोटक अभी भी लापता है। पिछले साल लाल किला बम धमाके की साजिश ...और पढ़ें

आशंका है कि यह विस्फोटक दिल्ली या एनसीआर क्षेत्र में कहीं छिपाया हो सकता है।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
मोहम्मद साकिब, नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस से ठीक पहले राष्ट्रीय राजधानी कड़े सुरक्षा घेरे में है। इसके पीछे का कारण केवल औपचारिक सतर्कता नहीं, बल्कि लाल किला बम धमाके की साजिश से जुड़ा एक गंभीर खतरा है। जिसका सुराग अभी तक नहीं लगा है।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, बीते वर्ष नवंबर में हुए आतंकी षड्यंत्र में इस्तेमाल किए जाने वाले कुल विस्फोटक में से करीब 300 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट अब भी बरामद नहीं हो सका है। आशंका है कि यह विस्फोटक दिल्ली या एनसीआर क्षेत्र में कहीं छिपाया हो सकता है।
10 नवंबर कहीं रिहर्सल तो नहीं थी..
इसी संभावित खतरे को देखते हुए गणतंत्र दिवस समारोह के मद्देनजर राजधानी में मल्टी-लेयर सुरक्षा व्यवस्था लागू कर दी गई है। सुरक्षा एजेंसियां किसी भी चूक से बचने के लिए राजधानी को अभेद्य किला बनाने में जुटी हैं। जांच में सामने आया था कि बीते वर्ष 10 नवंबर को लाल किले के पास हुआ कार बम विस्फोट दरअसल 26 जनवरी को बड़े आतंकी हमले की रिहर्सल या असफल प्रयास था।
मोबाइल फोन डेटा, लोकेशन हिस्ट्री और रेकी से जुड़े साक्ष्यों से पुष्टि हुई कि आतंकी मुजम्मिल गनाई और उमर मोहम्मद नबी ने बीते वर्ष जनवरी में कई बार लाल किला, उसके आसपास के इलाके और संभावित परेड रूट की रेकी की थी। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ के घनत्व और मूवमेंट पैटर्न का बारीकी से अध्ययन किया गया।
खबरें और भी
300 किलो अमोनियम नाइट्रेट अब भी लापता
जांच एजेंसियों का मानना है कि समय रहते पुलिस और खुफिया एजेंसियों की कार्रवाई से आतंकी नेटवर्क घबरा गया और अपनी मूल योजना को अंजाम नहीं दे सका। इसके बाद आनन-फानन में लाल किले के पास विस्फोट किया गया। यह हमला एएनएफओ (अमोनियम नाइट्रेट फ्यूल ऑयल) से लदे वाहन के जरिए किया गया सुसाइड अटैक था, जिसमें 15 लोगों की मौत और 27 से अधिक घायल हुए थे।
जांच में यह भी पता चला कि यह ‘व्हाॅइट कालर टेरर माॅड्यूल’ जैश-ए-मोहम्मद और अंसार गजवत-उल-हिंद से जुड़ा था, जिसमें डाॅक्टरों और मौलवियों की भूमिका सामने आई। फरीदाबाद और जम्मू-कश्मीर में हुई छापेमारी के दौरान करीब 2,900 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री बरामद की गई थी। कुल साजिश में 3,200 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट के इस्तेमाल की योजना थी, जिसमें से करीब 300 किलोग्राम विस्फोटक अब भी लापता है।
माॅक ड्रिल से जांची जा रही सुरक्षा व्यवस्था
सुरक्षा एजेंसियों के आकलन के मुताबिक, आतंकी योजना किसी एक स्थान तक सीमित नहीं थी। लाल किला, इंडिया गेट, रेलवे स्टेशन, माल और भीड़भाड़ वाले इलाके संभावित निशाने पर थे।
इसी पृष्ठभूमि में राजधानी में ड्रोन से निगरानी, एरिया डोमिनेशन एक्सरसाइज और सघन तलाशी अभियान चलाए जा रहे हैं। लाल किला, कश्मीरी गेट, चांदनी चौक, सदर बाजार और प्रमुख मेट्रो स्टेशनों पर आतंकवाद-रोधी माक ड्रिल कराई गई हैं। 22 से 29 जनवरी तक कर्तव्य पथ और आसपास के इलाकों में विशेष हाई अलर्ट रहेगा।
हाई-प्रोफाइल 'वाॅन्टेड' आतंकियों के लगाए गए पोस्टर
खुफिया एजेंसियों ने खालिस्तानी और बांग्लादेश-आधारित आतंकी संगठनों से संभावित खतरे को लेकर भी अलर्ट जारी किया है। दिल्ली के मेट्रो स्टेशनों और बाजारों में हाई-प्रोफाइल 'वाॅन्टेड' आतंकियों के अपडेटेड पोस्टर लगाए हैं। लिस्ट में सबसे ऊपर अर्शदीप सिंह उर्फ अर्श डाला है, जो खालिस्तान टाइगर फोर्स का चीफ है।
इंटेलिजेंस एजेंसियां डाला को सांप्रदायिक अस्थिरता भड़काने के लिए किए गए कई टारगेटेड हमलों के पीछे का मास्टरमाइंड मानती हैं। ‘वाॅन्टेड’ लिस्ट में खालिस्तान के सपोर्टर दूसरे पुराने लोग भी शामिल हैं, जो विदेश से भी काम करते हैं। खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स के चीफ रणजीत सिंह नीटा और परमजीत सिंह पम्मा के नाम पोस्टरों पर खास तौर पर हैं।