CJP प्रोटेस्ट में पाकिस्तानी कनेक्शन की जांच, फेक वीडियो से फैलाया भ्रम; दिल्ली पुलिस ने X पर खोली पोल
दिल्ली पुलिस ने विरोध प्रदर्शनों से संबंधित 20 से अधिक फर्जी वीडियो की पहचान की है, जिन्हें पुराने मामलों का बताकर प्रसारित किया जा रहा है।

दिल्ली पुलिस ने वीडियो पोस्ट कर बताई फेक वीडियो की कहानी। फोटो: वीडियो ग्रैब
HighLights
20 से अधिक फर्जी वीडियो की पहचान हुई
पुराने वीडियो को नए बताकर फैलाया जा रहा
पुलिस ने पाकिस्तानी कनेक्शन की जांच शुरू की
मोहम्मद साकिब, नई दिल्ली। सीजेपी के विरोध प्रदर्शन मामले में सुरक्षा एजेंसियां दोहरे चुनौती से जूझती रही। एक तो सड़क पर एक इंटरनेट मीडिया की दुनिया में।
इस प्रदर्शन के साथ ही इंटरनेट मीडिया पर भ्रामक सूचनाएं फैलाने के कई ऐसे मामले सामने आए, जो फेक और गलत तथ्यों के साथ प्रसारित किए जा रहे थे। सुबह से ही कई पुराने और दूसरे मामलों के वीडियो को 10 अक्टूबर का बताकर प्रसारित किया जाने लगा।
इनमें जुलाई में सीजेपी के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के अलावा किसान आंदोलन के समय के वीडियो भी शामिल हैं। कुछ वीडियो में 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुई हिंसा के दृश्यों को इस तरह पेश किया गया, मानो ये घटनाएं शनिवार को हुई हों।
Online chaos. On-ground calm. The difference is there for everyone to see.. #DPUpdates #PublicSafetyMatters #FAKEvsREAL https://t.co/IiTxqzjGUf
— Delhi Police (@DelhiPolice) October 10, 2026
इससे लोगों के बीच भ्रम फैलने और माहौल बिगड़ने की आशंका पैदा हुई। अब तक 20 से अधिक ऐसे वीडियो की पहचान की गई है। सीजेपी के पिछले प्रदर्शन के दौरान ऐसे 56 भ्रामक वीडियो का दिल्ली पुलिस ने खंडन किया था।
इस बार भी मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने ऐसे कई वीडियो का फैक्ट चेक कर उन्हें इंटरनेट मीडिया पर साझा किया और लोगों से अपील की कि वे ऐसे पोस्ट पर भरोसा न करें और बिना पुष्टि किए किसी भी सामग्री को आगे साझा करने से बचें।
पुलिस के मुताबिक, इस तरह की भ्रामक सामग्री के जरिये लोगों को गुमराह करने और माहौल खराब करने की कोशिश की जा रही है।
पड़ोसी देश के कनेक्शन की भी पड़ताल
जांच एजेंसियां इस पहलू की भी पड़ताल कर रही हैं कि कहीं इन भ्रामक वीडियो को प्रसारित करने के पीछे पाकिस्तानी हैंडलर्स या सीमा पार से संचालित किसी नेटवर्क की भूमिका तो नहीं है।
हालांकि, अब तक ऐसे किसी विदेशी कनेक्शन की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि पुराने वीडियो को एक खास तारीख के साथ साझा करने के पीछे किसी सुनियोजित अभियान की भूमिका थी या नहीं।
ऐसे वीडियो साझा करने की पुलिस की अपील
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि अलग-अलग अकाउंट से एक जैसी सामग्री साझा करने के पीछे कोई समन्वित नेटवर्क सक्रिय था या नहीं।
जांच पूरी होने के बाद ही वीडियो प्रसारित करने वालों की मंशा और संभावित साजिश को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित किसी भी वीडियो की सत्यता की पुष्टि किए बिना उसे साझा न करें।
