दिल्ली में 'मिनी-मकोका' से कांपे अपराधी, BNS की 2 धाराओं के तहत गैंग्स पर एक्शन; अब तक 1232 बदमाश गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 111 और 112 का उपयोग कर संगठित अपराधों पर अपनी कार्रवाई ...और पढ़ें

दिल्ली पुलिस ने क्रिमिनल्स पर कसा शिकंजा। फोटो: एआई जनरेटेड
HighLights
दिल्ली पुलिस ने संगठित अपराध पर कार्रवाई तेज की
BNS की धारा 111 और 112 का उपयोग प्रभावी
मामलों और गिरफ्तारियों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने संगठित अपराध और छोटे संगठित अपराध के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। वर्ष 2026 के पहले पांच महीनों में ऐसे मामलों में 16 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि गिरफ्तारियों की संख्या 60 प्रतिशत बढ़ गई।
पुलिस अब केवल अपराध करने वाले लोगों तक सीमित रहने के बजाय पूरे आपराधिक नेटवर्क को निशाना बनाने के लिए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 111 और 112 का इस्तेमाल कर रही है।
पांच महीने में 736 मामले दर्ज हुए
जनवरी से मई 2025 के दौरान BNS की धारा 111 और 112 के तहत कुल 634 मामले दर्ज हुए थे। इस साल इसी अवधि में इनकी संख्या बढ़कर 736 हो गई। गिरफ्तारियां भी 769 से बढ़कर 1,232 हो गईं।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, BNS की इन दोनों धाराओं का इस्तेमाल बड़े रंगदारी गिरोहों से लेकर शराब तस्करी जैसे छोटे नेटवर्क पर कार्रवाई के लिए किया जा रहा है।
गंभीर अपराध में धारा 111 का इस्तेमाल
BNS की धारा 111 गंभीर संगठित अपराध के लिए है। इसमें आर्थिक या दूसरे भौतिक लाभ के लिए गिरोह या आपराधिक नेटवर्क के जरिये किए जाने वाले अपराध शामिल हैं।
धारा 111 के तहत इस साल पहले पांच महीनों में 166 मामले दर्ज किए गए, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 122 मामले थे। गिरफ्तारियां 76 से बढ़कर 333 हो गईं।
पुलिस की कार्रवाई में मामलों के निस्तारण में भी बढ़ोतरी हुई है। इस साल मई तक संगठित अपराध के 154 मामले सुलझाए गए, जबकि पिछले साल यह संख्या 45 थी।
छोटे गिरोहों पर धारा 112 का वार
धारा 112 छोटे संगठित अपराध से जुड़ी है। इसमें ऐसे समूह या गिरोह आते हैं जो बार-बार आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देते हैं।
इस धारा के तहत मामले 512 से बढ़कर 570 हो गए। गिरफ्तारियां 693 से बढ़कर 899 तक पहुंचीं। सुलझाए गए मामलों की संख्या भी 500 से बढ़कर 533 हो गई।
एक पुलिस अधिकारी ने धारा 112 को “मिनी-मकोका” बताते हुए कहा कि इससे आपराधिक सिंडिकेट को तोड़ने में मदद मिलती है।
स्नैचिंग से साइबर ठगी तक नेटवर्क
पुलिस के मुताबिक, इन धाराओं का इस्तेमाल केवल किसी एक अपराधी के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है।
स्नैचिंग गिरोह में स्नैचर उपलब्ध कराने से लेकर चोरी किए गए मोबाइल फोन को ठिकाने लगाने वालों तक पर धारा 112 के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
शराब तस्करी से जुड़े नेटवर्क और ऐसे बार-बार साइबर ठगी करने वाले लोगों पर भी प्रावधान लागू हो सकता है, जो विदेशों में ठगी करने वाले लोगों के लिए म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराते हैं या अवैध रकम ट्रांसफर करते हैं।
बार-बार अपराध करने वालों पर फोकस
दिल्ली पुलिस ऐसे आरोपितों के खिलाफ भी इन प्रावधानों का इस्तेमाल कर रही है, जो कई बार जेल जा चुके हैं, लेकिन बाहर आने के बाद फिर आपराधिक गतिविधियों में शामिल हो जाते हैं और कथित तौर पर संगठित गिरोह चला रहे हैं।
एक अन्य अधिकारी के मुताबिक, इन धाराओं में मामला दर्ज होने से जमानत की कार्यवाही के दौरान पुलिस का पक्ष मजबूत हो सकता है। अदालतें ऐसे अपराधों को गंभीरता से लेती हैं और इनमें लंबे समय तक जेल में रहने की स्थिति बन सकती है।
इससे अपराधियों में डर पैदा करने और स्थानीय लोगों में उनके बनाए भय को कम करने में मदद मिल सकती है।
शिकायत न मिलने पर भी नेटवर्क मुश्किल
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कई बार स्थानीय लोग आपराधिक गतिविधियों में शामिल किसी व्यक्ति के खिलाफ शिकायत करने से हिचकते हैं। इससे पुलिस के लिए पूरे नेटवर्क को तोड़ना मुश्किल हो जाता है।
ऐसे मामलों में BNS की धारा 111 और 112 के जरिए व्यक्तिगत आरोपित के बजाय उससे जुड़े आपराधिक नेटवर्क पर कार्रवाई करने की कोशिश की जा रही है।
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