Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    गाड़ियों के इंजन पर मानसून का खतरा, E-20 पेट्रोल में पानी मिला तो ठप हो जाएगी कार; दिल्ली के 400+ पेट्रोल पंपों पर हाई अलर्ट

    Updated: Sat, 18 Jul 2026 11:23 PM (IST)

    एथेनॉल मिश्रित ई-20 पेट्रोल में पानी मिलने से रोकने के लिए मानसून में दिल्ली के पेट्रोल पंप संचालक सतर्क हैं। पेट्रोलियम कंपनियां भी टैंकों की नियमित ...और पढ़ें

    एथेनॉल मिश्रित ई-20 पेट्रोल में पानी मिलने से रोकने के लिए मानसून में दिल्ली के पेट्रोल पंप संचालक सतर्क हैं। इमेज एआई

    एथेनॉल मिश्रित ई-20 पेट्रोल में पानी मिलने से रोकने के लिए मानसून में दिल्ली के पेट्रोल पंप संचालक सतर्क हैं। इमेज एआई

    नेमिष हेमंत, नई दिल्ली। एथेनाल विवाद के बीच मानसून के मौसम में दिल्ली समेत देशभर के पेट्रोल पंप संचालक सतर्क हैं। उनकी सतर्कता पेट्रोल टैंकों में वर्षा का पानी जाने से रोकने की है, क्योंकि, ई-20 (20 प्रतिशत एथनाल मिश्रित) पेट्रोल में अगर पानी मिल जाए तो वह गाड़ियों के इंजन की परेशानी बढ़ा सकती है। इसे लेकर पेट्रोलियम कंपनियां भी सतर्क हैं और पंपों के टैंक की नियमित औचक जांच की जा रही है।

    स्थिति यह कि मानसून के आरंभ होने के साथ दिल्ली के 400 से अधिक पंपों पर सुरक्षा के इंतजाम कड़े कर दिए गए हैं। इसके लिए न सिर्फ टैंकों को पूरी तरह से जलरोधी बनाया गया है बल्कि, उसकी नियमित जांच भी की जा रही है।

    दिल्ली पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन (डीपीडीए) के एक पदाधिकारी के अनुसार, दिल्ली में पेट्रोल पंपों के टैंक औसतन 20 हजार से 45 हजार लीटर क्षमता के हैं। यदि किसी भी टैंक में पानी की मिलावट हुई तो उसे तुरंत खाली कर पूरा पेट्रोल वापस डिपो भेजना पड़ेगा, जिससे पंप संचालन में व्यवधान के साथ आर्थिक नुकसान होगा।

    इसलिए एथेनाल मिश्रित पेट्रोल की बिक्री के साथ से ही टैंकों में यह विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। पंप संचालक निश्चल सिंघानियां के अनुसार, अच्छी बात है कि दिल्ली के अधिकांश पंप के टैंक आटोमेटेड है, ऐसे में पानी मिलने की समस्या न के बराबर है। डीपीडीए के अध्यक्ष बिबेक बनर्जी के अनुसार, वैसे, दिल्ली में वर्षा उतनी नहीं होती है कि पंप डूब जाए। फिर भी वह लोग सतर्क हैं और जांच कर रहे हैं।

    खबरें और भी

    यह हो रही कवायद

    दिल्ली के पंप संचालक इस संबंध में कोई जोखिम उठाना नहीं चाहते। उनके अनुसार, टैंकों को अच्छे से सील करने के साथ-साथ मानसून के दौरान कर्मियों द्वारा तथा डिजिटल माध्यम से जांच की जा रही है ताकि उपभोक्ताओं को शुद्ध ईंधन मिल सके। साथ ही इसके लिए तीन स्तरीय सुरक्षा चक्र अपनाया जा रहा है।

    • ऑटोमैटिक टैंक गेजिंग: दिल्ली के 400 से अधिक पंपों पर यह सिस्टम लगा है। टैंक में पानी का स्तर जरा सा भी बढ़ते ही यह अलार्म बजा देता है और पेट्रोल की बिक्री अपने आप बंद हो जाती है।
    • वाटर डिटेक्शन: यह सेंसर टैंक के सबसे निचले हिस्से में तैनात रहता है जो पानी की मौजूदगी को तुरंत भांप लेता है।
    • वाटर फाइंडिंग पेस्ट: एक विशेष पेस्ट को टेस्टिंग राड पर लगाकर टैंक में डाला जाता है। यदि नीचे पानी होगा, तो पेस्ट का रंग बदल कर गुलाबी या लाल जाता है।

    ई-20 पेट्रोल को लेकर क्यों है सतर्कता

    विशेषज्ञों के अनुसार, पेट्रोल टैंक में पानी पहुंचने पर पेट्रोल में मिला एथेनाल खुद को उससे अलग कर पानी के साथ चिपक जाता है। यह मिश्रण टैंक के निचले हिस्से में अलग परत बना लेता है। इसके इंजन में जाने पर जल्द स्टार्ट नहीं होने व बंद हाेने की शिकायत बढ़ सकती है।

    यह भी पढ़ें: जैमर लगा, चादर तानी और वांगचुक अस्पताल में... दिल्ली पुलिस के नए कप्तान आते ही 30 सेकेंड में उठाए गए सोनम वांगचुक