दिल्ली के आईवीएफ सेंटर पर गंभीर आरोप, डीएनए टेस्ट में बच्चों की अदला-बदली का खुलासा
गुरुग्राम के दंपती ने ग्रेटर कैलाश के आईवीएफ सेंटर पर बच्चों की अदला-बदली का आरोप लगाया है, जब डीएनए टेस्ट में जुड़वां बेटियां उनकी जैविक संतान नहीं न ...और पढ़ें

ग्रेटर कैलाश स्थित आइवीएफ सेंटर पर बच्चों की अदला-बदला का आरोप लगाया है।
HighLights
आईवीएफ सेंटर पर बच्चों की अदला-बदली का आरोप।
डीएनए टेस्ट में बेटियां जैविक संतान नहीं निकलीं।
कोर्ट के आदेश पर एफआईआर दर्ज, पुलिस जांच में।
जागरण संवाददाता, दक्षिणी दिल्ली। गुरुग्राम के रहने वाली दंपती ने दक्षिणी दिल्ली के ग्रेटर कैलाश स्थित आइवीएफ सेंटर पर बच्चों की अदला-बदला का आरोप लगाया है। शिकायतकर्ता राहुल व मीनू राठौर द्वारका एक्सप्रेसवे पर सेक्टर-111 स्थित पुरी डिप्लोमेटिक ग्रीन्स सोसाइटी में रहते हैं। उनकी दो बेटियां पहले से हैं।
जनवरी 2026 में उनके यहां आइवीएफ तकनीक से दो जुड़वां बच्चियों का जन्म हुआ था। पर, बच्चियों के नाक-नक्शे परिवार के किसी भी सदस्य से मैच नहीं कर रहे थे। जब डीएनए टेस्ट कराया गया तो पैरों तले जमीन ही खिसक गई। लैब रिपोर्ट के मुताबिक दोनों बच्चियों का बायोलॉजिकल मैच न तो अपनी मां से हो रहा है और न ही पिता से।
पीड़ित राहुल राठौर के मुताबिक सबसे पहले वे 17 जनवरी को डीसीपी के पास गए और 22 जनवरी को ग्रेटर कैलाश थाने के एसएचओ से मिले। शिकायत की पर तीन महीने एफआइआर ही नहीं दर्ज की। कोर्ट के आदेश पर 31 मार्च को एफआइआर हुई। फिर ग्रेटर कैलाश थाने से मामला डिफेंस कालोनी थाने में स्थानांतरित हुआ। अब पुलिस की चल रही जांच से वे संतुष्ट हैं। अब दंपती का 1.38 मिनट का वीडियो मैसेज इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हो रहा है।
दंपती के मुताबिक आइवीएफ सेंटर या द्वारका के अस्पताल में कहां उनके बच्चे बदल गए, कुछ पता नहीं चल पा रहा। उन्होंने जीके स्थित सेंटर में पिछले वर्ष आइवीएफ कराने वालों के साथ ही पांच जनवरी 2026 को द्वारका स्थित एक अस्पताल में जन्म लेने वाले बच्चों के माता-पिता से डीएनए टेस्ट कराने की अपील की है, ताकि उन्हें उनके बच्चे मिल सकें।
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वर्ष 2024 में शुरू कराया था आईवीएफ ट्रीटमेंट
राहुल राठौर के मुताबिक उन्होंने अपनी पत्नी मीनू के इलाज के लिए दिसंबर 2024 में दिल्ली के ग्रेटर कैलाश स्थित आइवीएफ सेंटर से संपर्क किया था। इलाज शुरू होने के समय अस्पताल प्रबंधन और चिकित्सकों ने उन्हें पूरा भरोसा दिलाया था कि इस पूरी मेडिकल प्रक्रिया में केवल उन्हीं के स्पर्म और उनकी पत्नी के एग्स का ही इस्तेमाल किया जाएगा।
जब डिलीवरी का समय आया तो आइवीएफ सेंटर ने उन्हें डिलीवरी के लिए द्वारका के एक प्राइवेट अस्पताल भेज दिया। यहां पांच जनवरी 2026 में उनकी पत्नी ने दो जुड़वां बेटियों को जन्म दिया। कुछ नाते-रिश्तेदारों ने कहा कि बच्चियों का फेस माता-पिता या परिवार के किसी भी सदस्य से बिल्कुल मेल नहीं खा रहा है। इससे पैदा हुए शक दूर करने के लिए दंपती ने दो अलग-अलग अधिकृत लैब से डीएनए टेस्ट कराए।
रिपोर्ट में बच्चियों का डीएनए माता-पिता से बिल्कुल भी मैच नहीं हुआ। उन्होंने आईवीएफ सेंटर और द्वारका के उस प्राइवेट अस्पताल से संपर्क किया जहां बच्चों का जन्म हुआ था। आरोप है कि आइवीएफ सेंटर ने उल्टा उन पर ही कई तरह के बेबुनियाद आरोप लगाने शुरू कर दिए।
दो एंब्रियो अभी भी सेंटर के पास
राहुल के मुताबिक जब पत्नी का ट्रीटमेंट चल रहा था, तब पांच एंब्रियो बने थे। इनमें से दो अभी भी आइवीएफ सेंटर में होने चाहिए। इनका गलत इस्तेमाल किया गया या नष्ट कर दिया गया, दोनों ही गैरकानूनी है। जब स्पर्म और एग्स लिए गए थे, तब की भी रिपोर्ट आइवीएफ सेंटर के पास है, उसकी भी एम्स या अन्य संस्थान में जांच कराना भी अहम साबित हो सकता है। उनके मुताबिक कड़ियों को जोड़ने और सच्चाई सामने लाने के लिए वैज्ञानिक साक्ष्यों का सहारा लिया जाना बेहद जरूरी है। आइवीएफ सेंटर के सीसीटीवी कैमरों के फुटेज को तुरंत जब्त कर जांचा जाए।