यमुनापार में पांच से छह मंजिला अवैध भवन में फ्लैट बनाकर बेच रहे हैं बिल्डर, कार्रवाई में फंस रहे खरीदार
पूर्वी दिल्ली के यमुनापार में बिल्डर धड़ल्ले से पांच-छह मंजिला अवैध इमारतें बनाकर फ्लैट बेच रहे हैं, जिससे खरीदार फंस ...और पढ़ें

यमुनापार में अवैध तरीके से फ्लैट का निर्माण कर हो रही बिक्री। (एआई जेनरेटेड इमेज)
HighLights
यमुनापार में धड़ल्ले से बन रहे पांच-छह मंजिला अवैध भवन।
निगम की सील तोड़कर बेचे जा रहे हैं अवैध फ्लैट।
अवैध निर्माण में अधिकारियों की संलिप्तता के गंभीर आरोप।
शुजाउद्दीन, पूर्वी दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी में मकान गिरने से हादसे हो रहे हैं। लोगों की जान जा रही है। अधिकारी दावे कर रहे हैं कि पांच से छह मंजिला मकानों पर कार्रवाई हो रही है। बृहस्पतिवार को दैनिक जागरण संवाददाता ने यमुनापार में अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों की दावे की पड़ताल की।
इस पड़ताल में वह सच निकलकर सामने आया जिसकी हकीकत सबसे सामने है, लेकिन अधिकारी उसे स्वीकार नहीं करते हैं। धड़ल्ले से पांच व छह मंजिला भवन अभी भी बन रहे हैं।
निगम द्वार सील कई अवैध मकानों की सील तोड़कर बिल्डरों ने पांच से छह मंजिला फ्लैट बनाकर लाखों रुपये में बेच दिए। जिन अवैध मकानों में फ्लैट बन रहे हैं, उनका न तो नक्शा पास है न ही बिल्डरों के पास कंप्लीशन सर्टिफिकेट है। फंस वह लोग रहे हैं जिन्होंने पांच से छह मंजिल पर फ्लैट खरीदा है।

क्षेत्र में धड़ल्ले से पांच से छह मंजिला भवन बन रहे
ब्रजपुरी, चांदबाग, दयालपुर, मुस्तफाबाद, गौतमपुरी, मयूर विहार, हर्ष विहार समेत कई क्षेत्रों में पड़ताल में मिला कि क्षेत्र में धड़ल्ले से पांच से छह मंजिला भवन बन रहे हैं। सरकारी कार्यालय में बैठे निगम, प्रशासन और पुलिस के अधिकारी कार्रवाई का ढोंग दिखा रहे हैं।
सत्य निकेतन जैसे हादसे इसलिए हो रहे हैं, क्योंकि अवैध निर्माण करवाने में खुद अधिकारी शामिल हो रहे हैं। ब्रजपुरी में निगम की टीम ने करीब दो वर्ष पहले छह सौ गज में बिल्डर द्वारा पांच मंजिला मकान को सील किया था। आरोप है सील तोड़कर 20 फ्लैट बनाए गए। एक फ्लैट 40 लाख रुपये व एक दुकान 60 लाख रुपये में बची गई।
इसी सील मकान में दुकान खरीदने वाले ने दावा किया बिल्डर ने निगम को मोटी रकम दी, जिसके बाद निगम ने आंखे बंद कर लीं। इसी बिल्डर ने ब्रजपुरी 18 नंबर गली में पांच-पांच मंजिला करीब चार भवन बनाए, एक मकान अभी निर्माणाधीन है। बाकायदा करीब 15 मीटर लंबी एक गली भी बनाई है।
निगम ने इन मकानों पर भी कागजी कार्रवाई करके वसूली की
आरोप है निगम ने इन मकानों पर भी कागजी कार्रवाई करके वसूली की। जिस तरह से सरकार कह रही है पांच मंजिला मकानों पर कार्रवाई होगी। सवाल है यह फ्लैट्स बिल्डर बेचकर चला गया है। अगर अब यहां कार्रवाई होती है तो लोगों की मेहनत का पैसा निगम या बिल्डर किससे वसूला जाएगा। क्योंकि निगम के कागजातों में निगम कार्रवाई यहां कर चुका है।

सबसे चौकाने वाला मामला वजीराबाद रोड स्थित शराब के ठेके पास का है। निगम ने चार मंजिला मकान को वर्ष 2024 में सील किया था। अक्टूबर 2024 में निगम के तत्कालीन उपायुक्त कर्नल विनोद अत्री ने दयालपुर थाने में सील तोड़ने के मामले में मुकदमा भी दर्ज करवाया था।
निगम ने कंप्लीशन सर्टिफिकेट नहीं दिया। मौजूदा समय में यहां निजी कंपनियों के आफिस चल रहे हैं। आरोप है पुलिस व निगम की सांठगांठ से ऐसा हो रहा है।
जिस वक्त मैंने ब्रजपुरी में फ्लैट खरीदा मुझे पता नहीं था कि यह भवन निगम ने सील किया था। क्योंकि जब खरीदा तो सील लगी हुई नहीं थी। अगर निगम कार्रवाई करता है तो मैं तो सड़क पर आ जाउंगा, क्योंकि जीवन भर जो कमाया उससे एक फ्लैट परिवार के लिए खरीदा। -निजाम अंसारी, स्थानीय निवासी
चांदबाग में फ्लैट खरीदने के बाद पता चला भवन को निगम ने सील किया था। बहुत ही मुश्किल से रकम खर्च करके बिजली का मीटर मिला है। काईवाई बिल्डर के खिलाफ होनी चाहिए। यमुनापार में अधिकतर कालोनी अवैध हैं, यहां नक्शे पास नहीं होते हैं। - कमाल खान, स्थानीय निवासी
यह स्पष्ट है निगम के अधिकारी दिल्ली के सबसे बड़े भ्रष्टाचारी हैं। पांच व छह मंजिला मकान सीलिंग का ड्रामा करते हैं, सील गलत तरीके से तोड़ दी जाती है। उसमें फ्लैट बनाकर बेच दिए जाते हैं। बिल्डर व अधिकारी बच जाते हैं और फंसते वह लोग हैं जो उन फ्लैट को अपनी मेहनत की कमाई से खरीदते हैं। कई बार इस मुद्दे को दिल्ली विधानसभा में उठा चुका हूं, लेकिन निगम कार्रवाई चाहता ही नहीं है। - मोहन सिंह बिष्ट, डिप्टी स्पीकर दिल्ली विधानसभा
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