दिल्ली में 20 साल में हृदय रोग से तीन लाख से अधिक मौतें, युवाओं पर भी बढ़ा खतरा; जीवनशैली बनी जानलेवा
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पिछले 20 वर्षों में हृदयाघात और हृदय संबंधी बीमारियों से तीन लाख से अधिक मौतें हुई हैं। 2024 में मौतों में 50% से अधिक की ...और पढ़ें

राष्ट्रीय राजधानी में हृदयाघात और हृदय से जुड़ी बीमारियों से 20 वर्षों में तीन लाख से अधिक मौत के मामले सामने आए हैं। प्रतीकात्मक तस्वीर

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जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी में हृदयाघात और हृदय से जुड़ी बीमारियों से 20 वर्षों में तीन लाख से अधिक मौत के मामले सामने आए हैं। दिल्ली सरकार के आधिकारिक आंकड़े चेतावनी दे रहे हैं कि हृदय रोग अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कामकाजी उम्र और अपेक्षाकृत युवा आबादी भी इसकी चपेट में तेजी से आ रही है।
तीन लाख से अधिक लोगों की मौत
वर्ष 2024 में दिल्ली में 34,539 लोगों की मौत हृदयाघात और हृदय रोगों के कारण हुई, जो वर्ष 2023 में दर्ज 22,385 मौतों की की तुलना में 12,000 से अधिक है जो एक वर्ष में 50 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी है। दिल्ली सरकार के डायरेक्टरेट ऑफ इकोनाॅमिक्स एंड स्टैटिस्टिक्स स्वास्थ्य-मृत्यु संबंधी सांख्यिकीय डाटा अनुसार वर्ष 2005 से 2024 के बीच दिल्ली में हृदयाघात और हृदय संबंधी बीमारियों से कुल 3,29,857 लोगों की मौत दर्ज की गई। इनमें 2,10,206 पुरुष, 1,19,626 महिलाएं और 25 अन्य श्रेणी के व्यक्ति शामिल हैं।
मृतकों के आयु उठा रहे गंभीर सवाल
इन आंकड़ों को आयु वर्ग के लिहाज से देखें तो सबसे अधिक 1,03,972 मौतें 45 से 64 वर्ष के लोगों की हुई। 65 वर्ष और उससे अधिक के लोगों की 92,048 और सबसे कम 46,129 25 से 44 वर्ष आयु वर्ग के लोगों की हुई। चिंता की बात यह है कि कुल मौतों में 14 वर्ष या उससे कम उम्र के बच्चों की संख्या भी 14,321 रही, जो कुल आंकड़े का पांच प्रतिशत से अधिक है।
महिलाओं की तुलना में दोगुने पुरुषों की मौत
आंकड़े बताते हैं कि 45 से 64 वर्ष आयु वर्ग में पुरुषों में हृदयरोग से मौतों की संख्या महिलाओं की तुलना में लगभग दोगुनी रही। इस वर्ग में 68,177 पुरुषों और 35,795 महिलाओं की मौत दर्ज की गई। इसी तरह दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों में दर्ज मौतों में भी 45 से 64 वर्ष आयु वर्ग की हिस्सेदारी 38.55 प्रतिशत रही, ज सवार्धिक है। 65 वर्ष से अधिक आयु वर्ग की 34.13 प्रतिशत और 25 से 44 वर्ष आयु वर्ग की 17.11 प्रतिशत रही।
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दिनचर्या में करना होगा बदलाव
विशेषज्ञों के अनुसार, हृदय रोग के बढ़ते मामलों के पीछे जीवनशैली एक बड़ा कारण बनकर उभर रही है। अनुवांशिक कारणों के बावजूद कम उम्र में दिल के दौरे के लिए जीवनशैली अधिक भूमिका निभा रही है। बैठी रहने वाली दिनचर्या, अत्यधिक स्क्रीन टाइम, अस्वस्थ खानपान, धूम्रपान, वेपिंग, नींद की कमी और अत्यधिक तनाव हृदय स्वास्थ्य को समय से पहले नुकसान पहुंचा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते जीवनशैली में सुधार ही इस बढ़ते संकट से निपटने का सबसे प्रभावी उपाय है।