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    ‘महिला क्या पहने, यह उसकी पसंद’, वकील की जिरह के तरीके पर दिल्ली HC की फटकार; बरी हुआ साजिद अली दोषी करार

    Updated: Mon, 10 Aug 2026 10:47 PM (GMT+05:30)

    दिल्ली हाई कोर्ट ने यौन उत्पीड़न मामले में बचाव पक्ष द्वारा महिला के कपड़ों पर सवाल उठाने की कड़ी निंदा की है। कोर्ट ने कहा कि महिला की पसंद के कपड़ों ...और पढ़ें

    दिल्ली हाई कोर्ट ने जिरह के तरीके पर लगाई फटकार। फोटो: आर्काइव

    दिल्ली हाई कोर्ट ने जिरह के तरीके पर लगाई फटकार। फोटो: आर्काइव

    HighLights

    1. महिला के कपड़ों का चुनाव उसकी निजी पसंद है

    2. यौन उत्पीड़न मामले में पीड़िता के कपड़ों पर सवाल गलत

    3. आरोपित साजिद अली को दोषी ठहराया, फैसला पलटा

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। यौन उत्पीड़न के एक मामले में बचाव पक्ष के वकील की जिरह के तरीके पर दिल्ली हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है।

    न्यायमूर्ति चंद्रशेखरन सुधा की पीठ ने कहा कि कोई लड़की या महिला क्या पहनती है, यह उसकी अपनी पसंद है। समाज, पड़ोसियों या किसी अन्य व्यक्ति को उसके कपड़ों के बारे में बताने या तय करने का अधिकार नहीं है।

    पीठ ने कहा कि पीड़िता के कपड़ों को लेकर अदालत में पूछे गए सवाल पूरी तरह अप्रासंगिक थे। ऐसा लगता है कि इन सवालों का उद्देश्य उसे शर्मिंदा और अपमानित करना तथा उसके चरित्र पर सवाल उठाना था।

    कपड़ों और निजी पसंद को लेकर सवाल पर कोर्ट सख्त

    अदालत ने कहा कि महिला के कपड़ों, चरित्र, जीवनशैली, धर्म या निजी पसंद से जुड़े सवाल तब तक नहीं पूछे जाने चाहिए, जब तक उनका मामले से सीधा संबंध न हो।

    ट्रायल के दौरान बचाव पक्ष ने महिला के वेस्टर्न कपड़े पहनने पर इलाके के लोगों द्वारा जताई गई आपत्तियों को लेकर सवाल पूछे थे। महिला ने बताया था कि वह आम तौर पर सामान्य जींस और टाॅप पहनती है।

    कोर्ट ने कहा कि महिला की कपड़ों की पसंद न तो उसकी गरिमा को कम करती है और न ही उसके खिलाफ किए गए गैर-कानूनी व्यवहार को सही ठहराती है।

    ‘लड़कियों के कपड़ों को नियंत्रित करना समाधान नहीं’

    पीठ ने महिला को कैसे कपड़े पहनने चाहिए, इस सोच पर आधारित सवालों को अदालत में जगह दिए जाने पर भी आपत्ति जताई। कोर्ट ने कहा कि ऐसे सवालों का इस्तेमाल चरित्र हनन या पीड़िता को दोषी ठहराने के लिए नहीं किया जा सकता।

    महिला के जींस पहनने से युवा लड़के के बिगड़ने जैसे तर्क को भी पीठ ने ठुकरा दिया। अदालत ने कहा कि इसका समाधान लड़कियों और महिलाओं के कपड़ों को नियंत्रित करना नहीं है। इसके बजाय माता-पिता और समाज को बच्चों को अपना व्यवहार नियंत्रित करना सिखाना चाहिए।

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    ट्रायल कोर्ट का फैसला पलटा, आरोपित दोषी

    अदालत ने इन टिप्पणियों के साथ यौन उत्पीड़न के मामले में आरोपित साजिद अली को दोषी करार दिया। पीठ ने ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें आरोपित को बरी किया गया था। साजिद अली को आइपीसी की धारा 354ए (एक)(आई) के तहत दोषी ठहराया गया।

    आरोपित पर महिला का बार-बार पीछा करने, यौन टिप्पणी करने और गलत तरीके से छूने का आरोप था।

    जिरह के नाम पर गवाह की गरिमा से खिलवाड़ नहीं

    अदालत ने मामले में धर्म और स्थानीय रीति-रिवाजों को शामिल करने की कोशिशों की भी आलोचना की। पीठ ने न्यायिक अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि जिरह का इस्तेमाल किसी गवाह का अपमान करने, उसे शर्मिंदा करने, डराने-धमकाने या परेशान करने के लिए नहीं किया जा सकता।

    पीठ ने कहा कि जब जिरह की आड़ में किसी गवाह की गरिमा पर हमला किया जा रहा हो, तब अदालत मूकदर्शक बनकर नहीं रह सकती।