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    जमानत मिली तो फरार हो गया दोषी, चार साल बाद गिरफ्तार; हाई कोर्ट ने सजा घटाने से क्यों किया इन्कार?

    Updated: Mon, 10 Aug 2026 12:30 AM (GMT+05:30)

    दुष्कर्म के दोषी वहीद खान को अंतरिम जमानत के बाद चार साल तक फरार रहना महंगा पड़ा। दिल्ली हाई कोर्ट ने उसकी 12 वर्ष की कठोर कारावास की सजा कम करने से इ ...और पढ़ें

    दुष्कर्म के दोषी वहीद खान को अंतरिम जमानत के बाद चार साल तक फरार रहना महंगा पड़ा।

    दुष्कर्म के दोषी वहीद खान को अंतरिम जमानत के बाद चार साल तक फरार रहना महंगा पड़ा।

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। किशोरी से दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराए गए वहीद खान को अंतरिम जमानत मिलने के बाद करीब चार साल तक फरार रहना भारी पड़ा। दिल्ली हाई कोर्ट ने उसकी 12 वर्ष की कठोर कारावास की सजा कम करने से इन्कार करते हुए कहा कि अपराध की गंभीरता और दोषी के आचरण को देखते हुए सजा में हस्तक्षेप का कोई असाधारण आधार नहीं है। कोर्ट ने उसकी अपील खारिज कर दी।

    न्यायमूर्ति चंद्रशेखरन सुधा ने कहा कि दोषी को सात जून 2021 को अंतरिम जमानत दी गई थी। बाद में इसे पांच अगस्त से एक सितंबर 2021 तक चार सप्ताह के लिए बढ़ाया गया। लेकिन अवधि समाप्त होने पर उसने आत्मसमर्पण नहीं किया। करीब चार वर्ष तक वह कानून की प्रक्रिया से बचता रहा।

    कोर्ट ने कहा कि 12 सितंबर 2025 को उसके फरार होने की जानकारी सामने आने के बाद जमानती वारंट जारी किया गया, लेकिन उसकी तामील नहीं हो सकी। इसके बाद आठ दिसंबर 2025 को गैर-जमानती वारंट जारी किया गया और अगले ही दिन यानी नौ दिसंबर को उसे गिरफ्तार किया गया, तब से वह जेल में है।

    पीड़िता तस्वीरें प्रसारित करने की धमकी से रही चुप

    मामला वर्ष 2015 का है, जब करीब 14 वर्षीय किशोरी के साथ आरोपित ने लगभग सात माह तक बार-बार यौन शोषण किया था। आरोपित ने उसकी आपत्तिजनक तस्वीरें मोबाइल में खींची और इंटरनेट पर डालने व उसके भाई-बहनों को जान से मारने की धमकी दी।

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    कोर्ट ने कहा कि इसी डर के कारण पीड़िता घटना के बारे में अपने माता-पिता को तत्काल नहीं बता सकी। हाई कोर्ट ने उसकी गवाही को विश्वसनीय माना और मोबाइल से मिली तस्वीरों व एफएसएल रिपोर्ट को भी अभियोजन के मामले की पुष्टि करने वाला साक्ष्य माना।

    दोषी की ओर से घटना के समय लागू कानून के तहत न्यूनतम 10 वर्ष की सजा का हवाला देते हुए सजा घटाने की मांग की गई थी। लेकिन कोर्ट ने कहा कि अपराध की गंभीरता के साथ जमानत पर रिहा होने के बाद चार वर्ष तक फरार रहने का उसका आचरण राहत देने के पक्ष में नहीं है।

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