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कार बेचने के बाद RC ट्रांसफर नहीं हुई, शराब तस्करी के जाल में फंसे वकील को दिल्ली HC ने दी राहत

Updated: Tue, 23 Jun 2026 02:35 PM (IST)

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक वकील को बड़ी राहत दी है, जिनकी बेची गई कार का कथित तौर पर शराब तस्करी में इस्तेमाल हुआ था और आरसी ट्रांसफर नहीं हुई थी।

वर्ष 2023 में एक पुरानी कार बेचने वाले प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपनी कार एक डीलर को बेच दी थी।

वर्ष 2023 में एक पुरानी कार बेचने वाले प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपनी कार एक डीलर को बेच दी थी।

HighLights

  1. दिल्ली हाईकोर्ट ने वकील को शराब तस्करी मामले में राहत दी।

  2. बेची गई कार की आरसी ट्रांसफर न होने से मामला फंसा।

  3. कोर्ट ने वकील के खिलाफ जबरन कार्रवाई पर रोक लगाई।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने एक वकील को बड़ी राहत देते हुए उनकी बेची गई कार के कथित अवैध इस्तेमाल से जुड़े मामले में किसी भी प्रकार की जबरन कार्रवाई पर रोक लगा दी है।

क्या है गाड़ी बेचने का पूरा मामला?

वकील शंकर कुमार झा ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2023 में एक पुरानी कार बेचने वाले प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपनी कार एक डीलर को बेच दी थी। इसके बावजूद कार का रजिस्ट्रेशन खरीदार के नाम ट्रांसफर नहीं किया गया।

बार-बार याद दिलाने के बावजूद भी ट्रांसफर नहीं हुआ। इस महीने की शुरुआत में उन्हें पुलिस की ओर से एक नोटिस मिला, जिसमें कार को शराब तस्करी से जुड़े अपराध में इस्तेमाल करने का आरोप था।

अगली सुनवाई 10 अगस्त को

19 जून को न्यायमूर्ति मधु जैन की वैकेशन बेंच ने झा की याचिका पर केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और संबंधित यूज्ड कार डीलर को नोटिस जारी किया और चार सप्ताह के अंदर जवाब दाखिल करने को कहा। कोर्ट ने आदेश दिया कि अगली सुनवाई तक सभी प्रतिवादियों को याचिकाकर्ता के खिलाफ कार के इस्तेमाल से संबंधित कोई भी जबरन कार्रवाई करने से रोका जाता है। मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त को होगी।

याचिका में क्या कहा गया?

याचिका में झा ने कहा कि कार बेचने के बावजूद अधिकारियों की लापरवाही और डीलर के गैर-जिम्मेदाराना रवैये के कारण उन्हें गंभीर कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। वरिष्ठ अधिवक्ता अभिजात के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया कि प्लेटफॉर्म ने उन्हें आश्वासन दिया था कि बिक्री के बाद सभी काम किए जाएंगे।

इसमें आरटीओ में मालिकाना हक का ट्रांसफर भी शामिल है लेकिन ट्रांसफर में हुई अनावश्यक देरी के कारण उनकी पहचान की चोरी, आपराधिक विश्वासघात, अनुचित व्यापार प्रथा और उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है।

याचिका में कहा गया, 'कार को शराब तस्करी जैसे गंभीर अपराध में इस्तेमाल किया गया, जबकि मैंने उसे 2.5 साल पहले सभी दस्तावेजों के साथ बेच और सौंप दिया था। इससे मेरे आर्टिकल 21 के तहत गरिमापूर्ण जीवन जीने के अधिकार, गोपनीयता के अधिकार, व्यक्तित्व और प्रतिष्ठा के अधिकार खतरे में पड़ गए हैं।'

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(पीटीआई के इनपुट के साथ)