एनडीएमसी वेंडिंग प्लान पर हाई कोर्ट की दिल्ली सरकार को फटकार, कहा- फैसला लेने से बच रही सरकार
दिल्ली हाई कोर्ट ने एनडीएमसी के टाउन वेंडिंग प्लान को संशोधन के लिए वापस भेजने के दिल्ली सरकार के फैसले पर सवाल उठाया है। अदालत ने कहा कि सरकार अंतिम ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।
HighLights
दिल्ली सरकार ने एनडीएमसी वेंडिंग प्लान को संशोधन हेतु वापस भेजा।
हाई कोर्ट ने सरकार के इस फैसले पर गंभीर सवाल उठाए।
अदालत ने वेंडरों और आम जनता की स्थिति बिगड़ने की आशंका जताई।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (एनडीएमसी) के टाउन वेंडिंग प्लान को स्ट्रीट वेंडर्स (आजीविका की सुरक्षा और स्ट्रीट वेंडिंग का नियमन) अधिनियम के तहत तय करने के बजाय संशोधन के लिए वापस भेजने के दिल्ली सरकार के निर्णय पर दिल्ली हाई कोर्ट ने सवाल उठाया है।
न्यायमूर्ति प्रतिबा एम सिंह व न्यायमूर्ति विकास महाजन की पीठ ने कहा कि सरकार अंतिम फैसला लेने को तैयार नहीं दिख रही है और सरकार इसे मंजूरी नहीं देना चाहती।
पीठ ने सरकार की इस दलील को भी खारिज कर दिया कि टाउन वेंडिंग कमेटी की काबिलियत और कार्यकाल पर फिर से विचार करने की जरूरत है।
दुकानदारों और आम जनता के लिए और खराब होगी स्थिति
अदालत ने उक्त टिप्पणी दिल्ली स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट और टाउन वेंडिंग प्लान को लागू करने से जुड़ी याचिकाओं पर करते हुए की। याचिकाकर्ताओं की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता संजीव राल्ली ने कहा कि अदालत ने पांच फरवरी 2026 के अपने आदेश में दिल्ली सरकार को निर्देश दिया था कि वह एनडीएमसी द्वारा अक्टूबर 2025 में जमा किए गए वेंडिंग प्लान को मंजूरी देने से पहले दुकानदारों और स्ट्रीट वेंडर्स की आपत्तियों पर विचार करे।
इस संबंध में 24 फरवरी 2026 को शहरी विकास विभाग के संयुक्त सचिव के सामने एक बैठक हुई, लेकिन आपत्तियों पर निर्णय लेने के बजाय सरकार ने बाद में मामले को एनडीएमसी को वापस भेज दिया।
उक्त तथ्यों को देखते हुए पीठ ने कहा कि लगातार बनी हुई अनिश्चितता से वेंडरों, दुकानदारों और आम जनता के लिए स्थिति और खराब होगी। पीठ ने सरकार की स्टेटस रिपोर्ट पर एनडीएमसी को जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए मामले की सुनवाई 26 नवंबर तक के लिए स्थगित कर दी।
गुमराह करने वाली तस्वीरें पेश करने पर HC ने लगाया जुर्माना
एक स्ट्रीट वेंडर को अपनी वेंडिंग साइट पर अतिक्रमण की सीमा को छिपाने के लिए गुमराह करने वाली तस्वीरें जमा करने पर पर दिल्ली हाई कोर्ट ने फटकार लगाई है। न्यायमूर्ति प्रतिबा एम सिंह व न्यायमूर्ति विकास महाजन की पीठ ने वेंडर पर 25000 रुपये का जुर्माना लगाया।
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हालांकि, आजीविका के लिए वेंडिंग सर्टिफिकेट की शर्तों का सख्ती से पालन करने की शर्त पर वेंडर को वेंडिंग जारी रखने की अनुमति दी। अदालत ने उक्त कार्रवाई हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन के एक स्ट्रीट वेंडर की याचिका पर सुनवाई करते हुए की।
वेंडर ने अधिकारियों द्वारा उत्पीड़न से सुरक्षा और अपनी तय जगह पर शांतिपूर्वक वेंडिंग करने की अनुमति मांगी थी। हालांकि, सुनवाई के दौरान एमसीडी ने कहा कि याचिकाकर्ता वेंडर द्वारा दाखिल की गई तस्वीरें गुमराह करने वाली हैं और इसमें अतिक्रमण के दायरे को छिपाया गया है।