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    दिल्ली हाई कोर्ट ने लोकपाल के CBI जांच आदेश को किया रद, निर्दोष पाया गया था DRI अधिकारी

    Updated: Thu, 16 Apr 2026 01:24 PM (IST)

    दिल्ली हाई कोर्ट ने राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) के एक अधिकारी के खिलाफ सीबीआई जांच के लोकपाल के आदेश को रद कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि पिछली जांच ...और पढ़ें

    दिल्ली हाई कोर्ट। प्रतीकात्मक तस्वीर

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    विनीत त्रिपाठी, नई दिल्ली। राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) के एक अधिकारी के खिलाफ सीबीआई जांच का निर्देश देने संबंधी लोकपाल के आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट ने रद कर दिया है।

    न्यायमूर्ति विकास चौधरी व न्यायमूर्ति रेणु भट्नागर की पीठ ने कहा कि स्पष्ट कारण दर्ज किए बिना ऐसा निर्णय नहीं लिया जा सकता। खासकर तब जब पिछली जांच में अधिकारी को निर्दोष पाया गया हो।

    पीठ ने कहा कि लोकपाल को यह बताना चाहिए था कि दोषमुक्त करने के बाद भी ऐसे क्या तथ्य हैं, जिसके आधार पर प्रथम दृष्टया मामला अभी भी क्यों बनता है।

    24 जुलाई 2025 के आदेश को रद किया

    अदालत ने उक्त आदेश डीआरआई अधिकारी द्वारा दायर याचिका को स्वीकार करते हुए दिया और लोकपाल के 24 जुलाई 2025 के आदेश को रद कर दिया। शिकायत के आधार पर लोकपाल ने सीबीआई द्वारा प्रारंभिक जांच का आदेश दिया था।

    याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई सामग्री नहीं मिली

    वहीं, जांच के बाद, एजेंसी को याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई सामग्री नहीं मिली और उसने उन्हें निर्दोष बताते हुए एक रिपोर्ट प्रस्तुत की। सतर्कता महानिदेशक ने इन निष्कर्षों से सहमति व्यक्त की, जिन्हें वित्त मंत्रालय में सक्षम प्राधिकारी ने भी स्वीकार किया।

    पूरा मामला याचिकाकर्ता और कुछ कस्टम अधिकारियों पर भ्रष्टाचार और कदाचार का आरोप लगाने से जुड़ा है। शिकायत के आधार पर लोकपाल ने सीबीआई द्वारा एक प्रारंभिक जांच का आदेश दिया था।

    एजेंसी ने जांच के बाद किहा था कि याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई सामग्री नहीं पाई और उसे दोषमुक्त करने वाली एक रिपोर्ट सौंपी।

    सामग्री पर उचित रूप से विचार किया गया

    सतर्कता महानिदेशक ने भी इससे सहमति जताई और वित्त मंत्रालय में सक्षम प्राधिकारी ने भी इसे स्वीकार कर लिया था। उक्त तथ्यों को देखते हुए पीठ ने टिप्पणी की कि लोकपाल को यह दिखाना होगा कि प्रकरण से जुड़ी सामग्री पर उचित रूप से विचार किया गया है और आगे की कार्रवाई केवल कोरे आरोपों या अनुमानों के आधार पर नहीं की जा रही है।

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    अदालत ने यह भी कहा कि केवल इसलिए कि लोकपाल के पास धारा 20(तीन) के तहत जांच करने की शक्ति निहित है, इसका मतलब यह नहीं है कि इस शक्ति का प्रयोग मनमाने या स्वेच्छाचारी तरीके से किया जा सकता है। पर्याप्त सामग्री के बगैर यह कार्रवाई मनमानी और अवैध हो जाती है।

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