विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

'बैंक की गलती का खामियाजा विधवा पेंशनधारक नहीं भुगतेगी', दिल्ली HC का SBI को 3.6 लाख लौटाने का आदेश

Updated: Fri, 29 May 2026 10:13 AM (IST)

दिल्ली हाई कोर्ट ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को एक विधवा पेंशनधारक से वसूली गई 3.6 लाख रुपये की राशि ब्याज सहित लौटाने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि यह अतिरिक्त भुगतान बैंक की प्रक्रिया संबंधी गलती के कारण हुआ था।

कोर्ट ने कहा- बैंक की गलती है, याचिकाकर्ता की कोई गलती नहीं। फोटो: आर्काइव

कोर्ट ने कहा- बैंक की गलती है, याचिकाकर्ता की कोई गलती नहीं। फोटो: आर्काइव

HighLights

  1. दिल्ली हाई कोर्ट ने एसबीआई को राशि लौटाने का निर्देश दिया

  2. बैंक ने विधवा से 3.6 लाख रुपये की वसूली की थी

  3. अतिरिक्त भुगतान बैंक की प्रक्रिया संबंधी गलती से हुआ

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को एक विधवा पेंशनधारक से वसूली गई 3.6 लाख रुपये की राशि ब्याज सहित लौटाने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि अतिरिक्त पेंशन का भुगतान बैंक की प्रक्रिया संबंधी गलती के कारण हुआ था, न कि महिला की किसी धोखाधड़ी, गलत जानकारी या तथ्यों को छिपाने की वजह से।

न्यायमूर्ति संजीव नरूला ने इंद्रा नामक महिला की याचिका स्वीकार करते हुए एसबीआई को पहले से काटी गई राशि 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ वापस करने का आदेश दिया। साथ ही बैंक को आगे किसी भी तरह की वसूली करने से भी रोक दिया।

मामले के अनुसार, याचिकाकर्ता के पति, जो सरकारी कर्मचारी थे, का वर्ष 2003 में सेवा के दौरान निधन हो गया था। इसके बाद दिल्ली सरकार की ओर से जारी पेंशन भुगतान आदेश के आधार पर महिला को एसबीआई शाखा के माध्यम से पारिवारिक पेंशन दी जा रही थी।

अधिक भुगतान बताकर बैंक काटने लगा पेंशन 

कुछ समय बाद महिला ने देखा कि उसकी मासिक पेंशन में अचानक भारी कटौती हो रही है। पूछताछ करने पर बैंक ने बताया कि पेंशन रिकॉर्ड में गलत “एन्हांस डेट” दर्ज होने के कारण उसे अधिक पेंशन का भुगतान हो गया था। पहले यह अतिरिक्त राशि 2.5 लाख रुपये बताई गई, जिसे बाद में बैंक ने 3.6 लाख रुपये तय करते हुए मासिक कटौती शुरू कर दी।

महिला ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि उसने न तो कोई गलत जानकारी दी और न ही अतिरिक्त भुगतान में उसकी कोई भूमिका थी। साथ ही बैंक ने बिना पूर्व सूचना के एकतरफा तरीके से कटौती शुरू कर दी।

कोर्ट ने कहा- याचिकाकर्ता की कोई गलती नहीं 

हाई कोर्ट ने महिला की दलीलों से सहमति जताते हुए कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कुछ नहीं है जिससे यह साबित हो कि याचिकाकर्ता को पता था या उसे यह समझना चाहिए था कि उसे निर्धारित राशि से अधिक पेंशन मिल रही है।

अदालत ने यह भी कहा कि एसबीआई ने कथित अतिरिक्त भुगतान और वसूली की प्रक्रिया का पूरा विवरण दिए बिना ही कटौती शुरू कर दी, जो उचित नहीं था।

यह भी पढ़ें- दिल्ली में नाबालिग से डिजिटल कुकर्म पर कोर्ट का कड़ा रुख, दोषी को 10 साल की जेल; इंस्टाग्राम वीडियो से खुला राज