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    'मंत्रालय का मुख्यालय दिल्ली में होना हाईकोर्ट के क्षेत्राधिकार का आधार नहीं', अदालत का अहम फैसला

    Updated: Sun, 12 Jul 2026 06:44 PM (IST)

    दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि किसी केंद्रीय मंत्रालय का मुख्यालय दिल्ली में होने मात्र से हर विवाद पर उसका क्षेत्राधिकार नहीं हो जाता। अदालत ने पासपोर्ट ...और पढ़ें

    दिल्ली हाई कोर्ट का अहम फैसला: मंत्रालय मुख्यालय से नहीं तय होगा क्षेत्राधिकार।

    दिल्ली हाई कोर्ट का अहम फैसला: मंत्रालय मुख्यालय से नहीं तय होगा क्षेत्राधिकार।

    HighLights

    1. मंत्रालय मुख्यालय दिल्ली में होने से क्षेत्राधिकार नहीं मिलता।

    2. क्षेत्राधिकार विवाद को जन्म देने वाली कार्रवाई पर निर्भर।

    3. पासपोर्ट विवाद में यूपी में हुई घटनाओं को आधार माना।

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। किसी केंद्रीय मंत्रालय का मुख्यालय दिल्ली में होने मात्र से उससे जुड़े प्रत्येक विवाद पर दिल्ली हाई कोर्ट का क्षेत्राधिकार नहीं हो जाता।

    पासपोर्ट में जन्मतिथि में सुधार और इमिग्रेशन चेक रिक्वायर्ड (ईसीआर) श्रेणी हटाने की मांग वाली याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि क्षेत्राधिकार इस आधार पर तय होगा कि विवाद को जन्म देने वाली कार्रवाई कहां हुई है।

    न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि विदेश मंत्रालय (एमईए) का कार्यालय दिल्ली में स्थित होने का तथ्य अपने आप में दिल्ली हाई कोर्ट को क्षेत्रीय क्षेत्राधिकार प्रदान नहीं करता। अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता की शिकायत से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण घटनाएं उत्तर प्रदेश में हुई थीं।

    अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता भी उत्तर प्रदेश का निवासी है और विवाद से जुड़ी किसी महत्वपूर्ण कार्रवाई का कारण दिल्ली में उत्पन्न नहीं हुआ। ऐसे में याचिका दिल्ली हाई कोर्ट के समक्ष सुनवाई योग्य नहीं है। हाई कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए याचिकाकर्ता को सक्षम न्यायिक मंच, जिसमें इलाहाबाद हाई कोर्ट भी शामिल है, के समक्ष उचित कानूनी उपाय अपनाने की स्वतंत्रता दी।

    जन्मतिथि को सही करने और ईसीआर स्थिति हटाने की मांग

    याचिकाकर्ता ने पासपोर्ट में दर्ज जन्मतिथि को सही करने और ईसीआर स्थिति हटाने की मांग की थी। उसका कहना था कि जन्म प्रमाणपत्र में पहले गलत जन्मतिथि दर्ज थी, जिसे बाद में सक्षम प्राधिकारी ने ठीक कर दिया था। हालांकि, पासपोर्ट बनवाते समय पुराने जन्म प्रमाणपत्र का इस्तेमाल होने के कारण उसमें पहले वाली जन्मतिथि ही दर्ज रही। बाद में सुधार का अनुरोध क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय ने खारिज कर दिया।

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    याचिकाकर्ता ने विदेश मंत्रालय के दिल्ली में होने की दी दलील

    याचिकाकर्ता ने दलील दी कि विदेश मंत्रालय दिल्ली में स्थित है और क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय उसके प्रशासनिक नियंत्रण में काम करता है, इसलिए दिल्ली हाई कोर्ट मामले की सुनवाई कर सकता है। केंद्र सरकार ने इसका विरोध करते हुए कहा कि जन्म प्रमाणपत्र जारी करने और उसमें सुधार से लेकर पासपोर्ट जारी करने, उसके नवीनीकरण और सुधार का अनुरोध खारिज करने तक की सभी कार्रवाई उत्तर प्रदेश में हुई। संबंधित क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय भी गाजियाबाद में है।

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