'व्यापार का अधिकार नागरिकों और बच्चों के शोर-मुक्त माहौल के अधिकार के साथ संतुलित हो', दिल्ली हाई कोर्ट की टिप्पणी
दिल्ली हाई कोर्ट ने आरके आश्रम मेट्रो स्टेशन के पास एक बार के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि व्यापार के अधिकार को नागरिकों और बच्चों के शोर-मु ...और पढ़ें
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बच्चों के शोर-मुक्त और व्यवस्थित माहौल के अधिकार को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट की टिप्पणी।
HighLights
व्यापार अधिकार को शोर-मुक्त माहौल से संतुलित करें: दिल्ली हाई कोर्ट।
आबकारी आयुक्त को बार की शिकायतों की जांच का निर्देश।
देर रात तक बार संचालन पर याचिकाकर्ता की शिकायत।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। आरके आश्रम मेट्रो स्टेशन स्थित एक बार के खिलाफ कार्रवाई की मांग वाली याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि कानून के तहत बार और पब को चलाने की इजाजत है, लेकिन व्यापार करने के अधिकार को नागरिकों और बच्चों के शोर-मुक्त और व्यवस्थित माहौल के अधिकार के साथ संतुलित किया जाना चाहिए।
याचिका का निपटारा कर न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव की पीठ ने कहा कि प्राधिकारियों का कर्तव्य है वे कानून के अनुसार नागरिकों की शिकायतों की जांच करें और उन पर फैसला करें। कोर्ट ने आबकारी आयुक्त को मामले की जांच कर उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
पीठ ने कहा कि शराब की बिक्री का समय आबकारी आयुक्त तय करेंगे, जबकि पब्लिक असुविधा से जुड़ी शिकायतों पर डीएम विचार करेंगे। प्राधिकारियों की जवाबदेही पर कड़ी टिप्पणी करते हुए अदालत ने कहा कि एक सभ्य समाज में किसी नागरिक की असली शिकायत को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए।
शिकायतकर्ता ने याचिका में आरोप लगाया था कि बार रात दो बजे तक और कुछ मौकों पर तो सुबह 4:30 बजे तक भी चलता है, जबकि ऐसी जगहों पर रात एक बजे के बाद काम नहीं किया जा सकता। याची ने कहा कि दिल्ली पुलिस आयुक्त से लेकर आबकारी आयुक्त को कई बार शिकायत देने के बाद भी अब तक कोई जवाब नहीं मिला।