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दिल्ली हाई कोर्ट ने अयोग्य घोषित उम्मीदवार को जेईई एडवांस्ड-2026 में बैठने की दी इजाजत

Updated: Wed, 29 Apr 2026 05:25 AM (IST)

दिल्ली हाई कोर्ट ने आईआईटी प्रवेश के आधार पर अयोग्य घोषित एक उम्मीदवार को जेईई एडवांस्ड-2026 परीक्षा में बैठने की अनुमति दी है। न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर पंजीकरण और टिकट जारी करने का निर्देश दिया।

परीक्षा में बैठने की हाई कोर्ट ने दी अनुमति । फाइल फोटो

परीक्षा में बैठने की हाई कोर्ट ने दी अनुमति । फाइल फोटो

HighLights

  1. दिल्ली हाई कोर्ट ने जेईई एडवांस्ड 2026 की अनुमति दी।

  2. आईआईटी प्रवेश के आधार पर उम्मीदवार अयोग्य घोषित हुआ था।

  3. कोर्ट ने एक सप्ताह में पंजीकरण, टिकट जारी करने का निर्देश दिया।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। आइआइटी में प्रवेश स्वीकार करने के आधार पर अयोग्य घोषित किए गए उम्मीदवार को दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को जेईई एडवांस्ड-2026 परीक्षा में बैठने की अनुमति दे दी है।

न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने याचिकाकर्ता को परीक्षा के लिए पंजीकरण करने की अनुमति दी और आयोजन अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर उसे टिकट जारी करने का निर्देश दिया।

IIT दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित संस्थान

पीठ ने कहा कि आप इस संस्थान का महत्व नहीं समझते और आइआइटी दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित संस्थान है। कक्षा एक से ही बच्चों की यह महत्वाकांक्षा होती है कि उन्हें आइआइटी में सीट मिले। पीठ ने कहा कि यह बच्चों का सपना होता है और अदालत इसे अनदेखा नहीं कर सकता।

पीठ ने कहा कि उम्मीदवार कल किसी अमेरिकी विश्वविद्यालय में प्रवेश ले लेगा और यह प्रतिभा पलायन होगा।

अदालत ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ता को 17 मई 2026 को होने वाली प्रस्तावित परीक्षा, जेईई एडवांस्ड 2026 में बैठने के लिए अब से एक सप्ताह के भीतर निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार टिकट जारी कर दिया जाएगा।

पीठ ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता को परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी गई, तो उसकी याचिका निष्फल हो जाएगी और यदि वह मुकदमा हार जाता है, तो उसकी परीक्षा रद घोषित की जा सकती है।

नहीं मिला एडमिशन

उम्मीदवार की तरफ से पेश हुई अधिवक्ता तन्वी दुबे ने कहा कि उनके मुवक्किल जेईई (मेन्स) 2025 सफलतापूर्वक उत्तीर्ण की और जेईई (एडवांस्ड) 2025 के लिए अर्हता प्राप्त की, लेकिन किसी भी संस्थान में प्रवेश नहीं लिया।

अदालत को बताया गया कि काउंसलिंग के छठे दौर में, आइआइटी गुवाहाटी में एक सीट को स्वीकृत मान लिया गया और जुलाई 2025 में उसकी सहमति के बिना उसे आवंटित कर दिया गया।

याचिकाकर्ता ने कहा कि यद्यपि उसने आइआइटी गुवाहाटी में शामिल होने की अनिच्छा तुरंत बता दी थी, फिर भी आयोजन समिति ने अधिकारियों ने उन्हें इस वर्ष आइआइटी प्रवेश परीक्षा में बैठने से रोक दिया क्योंकि वे जेईई एडवांस्ड 2026 के मानदंड ए-पांच के अनुसार पात्र नहीं है।

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