केंद्र की कार्रवाई के खिलाफ दिल्ली HC पहुंचे दिल्ली जिमखाना क्लब के सदस्य, 6 जुलाई को होगी सुनवाई
दिल्ली जिमखाना क्लब के सदस्य और कर्मचारी संघ ने केंद्र सरकार की बेदखली कार्रवाई को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है। इस मामले पर न्यायमूर्ति अवनीश झि ...और पढ़ें

दिल्ली जिमखाना क्लब के सदस्य फिर पहुंचे दिल्ली हाई कोर्ट। फोटो: आर्काइव
HighLights
क्लब सदस्य और कर्मचारी संघ ने बेदखली को चुनौती दी
दिल्ली हाई कोर्ट 6 जुलाई को मामले की सुनवाई करेगा
केंद्र सरकार की कार्रवाई के खिलाफ आपत्ति दर्ज कराई
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। लुटियंस दिल्ली स्थित 27.3 एकड़ में फैले दिल्ली जिमखाना क्लब को खाली कराने की केंद्र सरकार की कार्रवाई के खिलाफ क्लब के एक सदस्य और कर्मचारियों के संगठन ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
दोनों ने पहले से लंबित याचिकाओं में नई अर्जियां दाखिल कर बेदखली की प्रक्रिया पर आपत्ति जताई है। मामले पर न्यायमूर्ति अवनीश झिंगन की अदालत छह जुलाई को सुनवाई करेगी।
केंद्र सरकार ने दिया है नोटिस
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब भूमि एवं विकास कार्यालय (एलएंडडीओ) के एस्टेट ऑफिसर ने केंद्र सरकार की ओर से दायर बेदखली याचिका के आधार पर क्लब को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में पूछा गया है कि क्लब को परिसर से बेदखल क्यों न किया जाए।
हाई कोर्ट में लंबित याचिकाएं क्लब के सदस्य विजय खुराना और क्लब के स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से दायर की गई हैं। इन याचिकाओं में केंद्र सरकार के परिसर खाली करने संबंधी आदेश को चुनौती दी गई है।
हाई कोर्ट ने रोक लगाने से किया था इनकार
मई में हुई पिछली सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने केंद्र के आदेश पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया था। उस समय केंद्र की ओर से सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को आश्वस्त किया था कि विधिसम्मत नोटिस दिए बिना कोई बेदखली की कार्रवाई नहीं की जाएगी।
दिल्ली जिमखाना क्लब वर्ष 1928 से स्थायी लीज पर इस भूमि का उपयोग कर रहा है। लीज की शर्तों के अनुसार सार्वजनिक उद्देश्य के लिए आवश्यकता होने पर केंद्र सरकार को भूमि का दोबारा कब्जा लेने का अधिकार है।
वर्ष 2022 में केंद्र सरकार ने लीज शर्तों के उल्लंघन और कुप्रबंधन का आरोप लगाते हुए एनसीएलटी का रुख किया था। इसके बाद एनसीएलटी ने क्लब के दैनिक संचालन के लिए केंद्र सरकार द्वारा नामित 15 सदस्यों की नियुक्ति का आदेश दिया था।