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    प्राइवेट स्कूलों को लेकर दिल्ली HC का बड़ा फैसला, 1 अप्रैल से मनमानी फीस वसूली बंद; SLFRC न बनाने पर एक्शन

    Updated: Sat, 21 Feb 2026 10:13 AM (IST)

    दिल्ली सरकार ने हाई कोर्ट में कहा कि निजी स्कूल 1 अप्रैल से नए सत्र के लिए बिना स्वीकृति मनमानी फीस नहीं वसूल सकते। सरकार ने फीस नियमन समितियों (SLFRC ...और पढ़ें

    बिना नियमन और स्वीकृति के फीस नहीं वसूल सकते सकते प्राइवेट स्कूल। फोटो: सांकेतिक

    बिना नियमन और स्वीकृति के फीस नहीं वसूल सकते सकते प्राइवेट स्कूल। फोटो: सांकेतिक

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    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार ने स्पष्ट कहा कि निजी स्कूल एक अप्रैल से नए शैक्षणिक सत्र के लिए बिना नियमन और स्वीकृति के फीस नहीं वसूल सकते। सरकार ने अदालत को बताया कि नई फीस विनियमन व्यवस्था के तहत तय और स्वीकृत फीस के अलावा कोई शुल्क लेना कानूनन प्रतिबंधित होगा।

    सरकार की ओर से अतिरिक्त साॅलिसिटर जनरल एसवी राजू ने दलील दी कि यदि स्कूल स्तर की फीस नियमन समितियों (एसएलएफआरसी) के गठन पर रोक लगाई जाती है तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। उन्होंने कहा कि इन समितियों के गठन से स्कूलों को कोई नुकसान नहीं होगा, बल्कि इससे नए सत्र से पहले फीस तय करने की प्रक्रिया पूरी हो सकेगी।

    मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ निजी स्कूल संघों की याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें एक फरवरी की सरकारी अधिसूचना को चुनौती दी गई है। इस अधिसूचना में स्कूलों को 10 दिनों के अंदर स्कूल-स्तरीय फीस नियमन समितियां गठित करने का निर्देश दिया गया था।

    सरकार ने अदालत में कहा कि दिल्ली स्कूल शिक्षा (फीस निर्धारण और विनियमन में पारदर्शिता) कानून के तहत स्कूल केवल स्वीकृत फीस ही ले सकते हैं। यदि एक अप्रैल 2026 से पहले फीस निर्धारित नहीं होती और स्कूल मनमानी फीस वसूलते हैं तो कानून का उद्देश्य ही विफल हो जाएगा, जिसका मकसद व्यवसायीकरण और मुनाफाखोरी रोकना है।

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    वहीं निजी स्कूलों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अखिल सिब्बल ने दलील दी कि सरकार की एक फरवरी की अधिसूचना कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है क्योंकि यह अधिनियम में निर्धारित समय-सीमा को बदलती है।

    उनका कहना था कि कानून के अनुसार फीस निर्धारण की प्रक्रिया पिछले शैक्षणिक वर्ष के जुलाई से शुरू होनी चाहिए थी और इतनी कम अवधि में सर्वसम्मति से फैसला करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।

    अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 24 फरवरी के लिए सूचीबद्ध करते हुए निजी स्कूलों को एसएलएफआरसी गठन के लिए दी गई 10 फरवरी की समय-सीमा भी तब तक बढ़ा दी। अदालत ने कहा कि अधिसूचना पर रोक लगाने की मांग पर अगली तारीख को आदेश पारित किया जा सकता है।

    दिल्ली शिक्षा निदेशालय ने अपने जवाब में कहा कि यदि नए कानून को 2026-27 सत्र से लागू नहीं किया गया तो फीस नियमन और अभिभावकों को राहत देने का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा। सरकार के अनुसार यह आदेश तीन शैक्षणिक वर्षों के लिए एक विशेष अंतरिम व्यवस्था के रूप में जारी किया गया है, ताकि नए सत्र की शुरुआत से ही फीस पारदर्शी और नियंत्रित रहे।

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