दिल्ली से चल रहा था ISI का जासूसी नेटवर्क, मास्टरमांइड सॉफ्टवेयर इंजीनियर गिरफ्तार; 4 राज्यों में फैला था जाल
पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े एक बड़े अंतरराष्ट्रीय जासूसी नेटवर्क का दिल्ली में पर्दाफाश हुआ है, जिसमें मास्टरमाइंड प्रदीप्त बसु को हौजरानी से गिरफ्तार किया गया।

हौजरानी से पाकिस्तानी जासूस गिरफ्तार। फोटो: सांकेतिक
HighLights
दिल्ली में ISI जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश, मास्टरमाइंड गिरफ्तार
प्रदीप्त बसु हौजरानी से पकड़ा गया, फर्जी सिम का इस्तेमाल
संवेदनशील सैन्य जानकारी जुटाने की कोशिश, अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन सामने
राकेश कुमार सिंह, नई दिल्ली। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े एक बड़े अंतरराष्ट्रीय जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। इस नेटवर्क का कनेक्शन दिल्ली से सामने आया है। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच और बंगाल एसटीएफ के साझा ऑपरेशन में तीन दिन पहले हौजरानी से प्रदीप्त बसु को गिरफ्तार किया गया।
जांच के अनुसार, राजस्थान, पंजाब, दिल्ली और बंगाल तक फैले इस मॉड्यूल में भारतीय मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल कर संवेदनशील सैन्य और प्रशासनिक कंट्रोल रूम से जानकारी हासिल करने की कोशिश की जा रही थी।
हौजरानी में बांग्लादेशियों के साथ छिपा था प्रदीप्त
डीसीपी क्राइम ब्रांच संजीव कुमार यादव के अनुसार, प्रदीप्त बसु इस मॉड्यूल का मास्टरमाइंड है। वह साफ्टवेयर इंजीनियर है और मूलरूप से सिलीगुड़ी, बंगाल का रहने वाला है। पुलिस के मुताबिक, वह हौजरानी में बांग्लादेशी नागरिकों के साथ छिपकर रह रहा था।
जांच में सामने आया है कि प्रदीप्त बांग्लादेशी नागरिकों को मेडिकल इलाज दिलाने के बहाने दिल्ली लाता था। इसके बाद उनके रहने और ठहरने की व्यवस्था करता था। पुलिस का आरोप है कि इसी आड़ में वह जासूसी नेटवर्क को संचालित कर रहा था।
सीमा पर मनी एक्सचेंजर के तौर पर भी करता था काम
प्रदिप्त बसु भारत-बांग्लादेश सीमा पर मनी एक्सचेंजर के तौर पर भी काम करता था। इससे पुलिस को नेटवर्क में वित्तीय लेनदेन और हवाला के इस्तेमाल का भी शक है। अब जांच एजेंसियां इस पहलू की भी जांच कर रही हैं।
फर्जी नाम पर लिए गए सिम पाकिस्तान तक पहुंचते थे
जांच के अनुसार, दिल्ली में रहकर प्रदीप्त बसु और उसका साथी समीर सरकार नेपाल के संदिग्ध नागरिक विशाल शाह के संपर्क में थे। आरोप है कि ये लोग बंगाल के कूचबिहार और उत्तर दिनाजपुर के आम लोगों के नाम पर सिम कार्ड हासिल करते थे।
इन सिम कार्ड को बांग्लादेशी एजेंट अकबर हुसैन की मदद से ढाका और काठमांडू के रास्ते पाकिस्तान पहुंचाए जाने का आरोप है।
भारतीय सिम के OTP से एक्टिवेट करते थे वाट्सएप
पुलिस के अनुसार, पाकिस्तान के रावलपिंडी, लाहौर और कराची में बैठे आपरेटिव्स भारतीय सिम कार्ड पर आने वाले ओटीपी के जरिये वाट्सएप नंबर एक्टिवेट कर लेते थे। इन भारतीय नंबरों का इस्तेमाल पंजाब और राजस्थान सीमा पर तैनात भारतीय अधिकारियों और कंट्रोल रूम से संवेदनशील सैन्य जानकारी हासिल करने के लिए किए जाने का आरोप है।
सात आरोपितों के नाम, अब तक तीन गिरफ्तार
बंगाल पुलिस की एफआइआर में सात आरोपितों के नाम दर्ज हैं। इसमें प्रदीप्त बसु को मास्टरमाइंड बताया गया है। बंगाल एसटीएफ ने राशिदुल हक और नूरनासिरुद्दीन अली को बंगाल से गिरफ्तार किया है।
चार आरोपित अभी फरार हैं। इनमें मोहम्मद शफीकुल इस्लाम, अकबर हुसैन उर्फ सम्राट, उमर और नेपाल का विशाल साह शामिल हैं।
दिल्ली में किन लोगों से संपर्क था, इसकी जांच
क्राइम ब्रांच और बंगाल एसटीएफ अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि दिल्ली में रहकर प्रदीप्त बसु ने किन-किन लोगों से संपर्क किया। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस नेटवर्क के जरिये देश की कोई रणनीतिक या सामरिक जानकारी सीमा पार भेजी गई।
देश की संप्रभुता और अखंडता पर खतरे को देखते हुए मामले में धाराएं और सख्त किए जाने की प्रक्रिया भी चल रही है।
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