दिल्ली में चलती स्लीपर बस में किशोरी से दुष्कर्म केस में 398 पन्नों की चार्जशीट; सीमेन, बाल और डीएनए का जिक्र
दिल्ली पुलिस ने चलती स्लीपर बस में 17 वर्षीय किशोरी से दुष्कर्म मामले में वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर जांच ...और पढ़ें

इसी स्लीपर बस में 17 वर्षीय किशोरी से दुष्कर्म के मामले में दिल्ली पुलिस ने जांच को वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर मजबूत किया है। फाइल फोटो
HighLights
चलती बस में 17 वर्षीय किशोरी से दुष्कर्म का मामला।
पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर जांच मजबूत की।
398 पन्नों की चार्जशीट में जैविक नमूने अहम सबूत।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। ग्रेटर नोएडा से दिल्ली के कश्मीरी गेट तक करीब 45 से 55 किलोमीटर के सफर के दौरान चलती स्लीपर बस के अंदर ड्राइवर व कंडक्टर ने बीते तीन अगस्त की रात 17 वर्षीय किशोरी के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया था। इस मामले में कश्मीरी गेट थाना पुलिस ने दोनों आरोपितों के खिलाफ तीन हजारी कोर्ट में आरोपपत्र दाखिल कर दिया है। 398 पन्ने के आरोपपत्र में पुलिस ने 10 पुलिसकर्मियों, डाॅक्टरों व अन्य को गवाह बनाया है।
चार्जशीट में किन तथ्यों को बनाया मुख्य आधार?
बीते 18 सितंबर को दाखिल आरोपपत्र में कोर्ट ने 24 सितंबर को संज्ञान भी ले लिया है। इस सनसनीखेज मामले में बस के अंदर फोरेंसिक जांच में मिले आरोपितों के वीर्य और किशोरी के बालों के कतरन जैसे जैविक नमूने को अहम साक्ष्य के तौर पर पेश किया है, जो आरोपितों के खिलाफ पुख्ता साक्ष्य के तौर पर माना जा रहा है।
क्या हुआ था पीड़िता के साथ?
पुलिस और कोर्ट में दिए गए बयान में पीड़िता ने बताया था कि वह नोएडा सेक्टर 63 जाना चाहती थी। आरोपितों ने उसे झूठ बोलकर यह कहते हुए बस में बैठा लिया था कि बस उसी दिशा में जा रही है। बस में चढ़ने के बाद जब उसने देखा कि अंदर एक भी यात्री नहीं है, तब उसने उतरने की कोशिश की थी, लेकिन कंडक्टर ने उसे बस से उतरने नहीं दिया था और अंदर से दरवाजे बंद कर लिया था। आरोपितों ने बस के अंदर ही घिनौने अपराध को अंजाम दिया था।
मेडिकल जांच के बाद दर्ज हुई एफआईआर
घटना के बाद आरोपितों ने किशोरी को कश्मीरी गेट बस अड्डा के बाहर उतार दिया था और फिर वहां से बस लेकर भाग गए थे। पीड़िता ने वहां किसी तरह हिम्मत जुटाकर स्थानीय पुलिस स्टेशन से संपर्क कर आपबीती बता दी थी। इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने बिना किसी सीमा विवाद में उलझे पीड़िता को अस्पताल ले जाकर मेडिकल जांच के बाद तुरंत मामला दर्ज कर लिया था।
रूट खंगालने पर सामने आए खौफनाक तथ्य
पुलिस की कई टीमों ने सीसीटीवी फुटेज की मदद से जांच करते हुए तिमारपुर के एक पार्किंग में खड़ी बस को महज चार घंटे के भीतर बरामद कर वहां से दोनों आरोपितों को भी दबोच लिया था।
पकड़े गए आरोपितों की पहचान बस चालक कुलदीप और कंडक्टर संदीप के रूप में हुई थी। दोनों कानपुर के रहने वाले हैं और पीड़िता मैनपुरी की रहने वाली है। बाद में पुलिस जांच में ग्रेटर नोएडा, नोएडा और दिल्ली तक बस के रूट को खंगालने पर कई चौंकाने वाली और डरावनी बातें सामने आईं थी।
बस का सीसीटीवी कैमरा भी था खराब
यात्रा के दौरान सुरक्षा या नियमों की जांच के लिए बस को कहीं भी नहीं रोका गया था। जांच में पता चला था कि बस पर 11 ट्रैफिक चालान लंबित थे, जिनमें से सात तो जुलाई महीने में ओवर स्पीड और परमिट के उल्लंघन के लिए थे।
यहां तक कि बस मालिक ने आरोपितों का बिना पुलिस सत्यापन कराए नौकरी पर रखा था। बस का सीसीटीवी कैमरा खराब पाया गया था, खिड़कियों में पर्दे लगे हुए थे ताकि अंदर का नजारा किसी को दिखाई न दें।
जांच में यह भी पता चला कि घटना के समय बस में जीपीएस, व्हीकल-ट्रैकिंग सिस्टम और पैनिक बटन जैसे सुरक्षा उपकरण नहीं लगे थे।
जांच के दौरान एकत्र किए गए जैविक नमूनों को पुलिस टीम ने जांच के लिए फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी में भेज दिया था।
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