आतिशी के बयान, कपिल मिश्रा पर FIR और जांच रिपोर्ट न देने से दिल्ली विधानसभा नाराज; पंजाब सरकार-पुलिस पर सवाल
दिल्ली विधानसभा ने कैबिनेट मंत्री कपिल मिश्रा के खिलाफ दर्ज एफआईआर से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध न कराने पर पंजाब पुलिस और सरकार पर सवाल उठाए हैं। विधानस ...और पढ़ें

विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा- तथ्यों को जानबूझकर छिपाने का प्रयास किया जा रहा।
HighLights
दिल्ली विधानसभा ने पंजाब पुलिस से एफआईआर दस्तावेज मांगे
विजेंद्र गुप्ता ने पारदर्शिता पर सवाल उठाए, तथ्य छिपाने का आरोप
गुरुओं के सम्मान से जुड़ा मामला, विधानसभा इसे गंभीरता से लेगी
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा के गत शीतकालीन सत्र में नेता प्रतिपक्ष आतिशी द्वारा दिए गए बयान को लेकर माहौल लगातार गर्माया हुआ है। एक तरफ उनके बयान में अतिरिक्त सामग्री जोड़कर इंटरनेट मीडिया पर जारी कर देने का आरोप लगाते हुए पंजाब के जालंधर में दिल्ली के कैबिनेट मंत्री कपिल मिश्रा खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है।
दूसरी तरफ दिल्ली विधानसभा ने इस एफआईआर पर पंजाब पुलिस से दस्तावेज मांगे हैं। मगर पंजाब पुलिस ने अभी तक इस बारे में कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए हैं। जिससे दिल्ली विधानसभा नाराज है और एफआईआर मामले में पंजाब सरकार पर सवाल उठा रही है।
विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने जारी बयान में कहा है कि पंजाब सरकार ने अभी तक जिस प्रकार से संबंधित फाइल को रोके रखा गया है, उससे कई गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।
कहा है कि न तो अब तक एफआईआर की प्रति उपलब्ध कराई गई है, न ही शिकायत की कापी सौंपी गई है और न ही जांच से संबंधित कोई आधिकारिक रिपोर्ट सार्वजनिक की गई है।
उन्होंने कहा है कि यह स्थिति संदेह को जन्म देती है और पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगाती है। गुप्ता ने कहा है कि दिल्ली विधानसभा पूरी दृढ़ता के साथ इस मामले को उठाएगी और न्याय सुनिश्चित करने के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगी।
कहा कि इस पूरे मामले में जिस तरह की चुप्पी और टालमटोल देखने को मिल रही है, उससे यह प्रतीत होता है कि कुछ तथ्यों को जानबूझकर छिपाने का प्रयास किया जा रहा है। कहा कि इस प्रकरण के तार सीधे तौर पर पंजाब के मुख्यमंत्री तक जुड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं, जो इस मामले की गंभीरता को और बढ़ा देता है।
गुप्ता ने कहा कि दिल्ली विधानसभा इस विषय को किसी भी रूप में हल्के में नहीं लेगी। यह मामला केवल प्रशासनिक या राजनीतिक नहीं है, बल्कि यह हमारे गुरुओं के सम्मान और आस्था से जुड़ा हुआ है। ऐसे संवेदनशील विषयों पर किसी भी प्रकार की लापरवाही या असंवेदनशीलता को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

