यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 24, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
विधेयक लौटाने पर केजरीवाल ने किया तंज-' दिल्ली की हार को भुला दें PM साहब'
दिल्ली सरकार के 14 बिलों को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने लौटा दिया है। दिल्ली सरकार को वापस भेजे गए बिलों में जनलोकपाल बिल भी शामिल है।

नई दिल्ली [जोेएनएन]। केंद्र सरकार ने दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार को बड़ा झटका देते हुए उसके द्वारा मंजूरी के लिए भेजे गए 14 बिलों को वापस कर दिया है। बिल वापस भेजने के पीछे तर्क दिया गया है कि दिल्ली सरकार ने इन बिलों को भेजने के लिए तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया।
बिलों के वापस भेजे जाने के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पीएम नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला बोला है। केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा 'मोदी जी से फिर से हाथ जोड़ कर निवेदन है - थोडा बड़ा दिल कीजिये, दिल्ली की हार को भुला दीजिये और इस तरह से दिल्ली के लोगों से बदला मत लीजिये।'
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मोदी जी से फिर से हाथ जोड़ कर निवेदन है - थोडा बड़ा दिल कीजिये, दिल्ली की हार को भुला दीजिये और इस तरह से दिल्ली के लोगों से बदला मत लीजिये।
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) June 24, 2016
सीएम केजरीवाल यहीं नहीं रुके उन्होंने एक बाद एक ट्वीट कर पीएम मोदी पर निशाना साधा। एक और ट्वीट में सीएम ने कहा कि 'मोदी जी का नारा - न काम करूँगा, न करने दूंगा'
मोदी जी का नारा - न काम करूँगा, न करने दूंगा https://t.co/Z40pKzPJ5Z
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) June 24, 2016
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव आरपी सिंह ने कहा कि दिल्ली सरकार ने इन बिलों को केंद्र सरकार से मंजूरी के लिए भेजते समय तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार को ये बिल उपराज्यपाल के जरिए केंद्र को भेजने चाहिए थे। दिल्ली सरकार को वापस भेजे गए बिलों में जनलोकपाल बिल भी शामिल है।
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दिल्ली के पूर्व कानून मंत्री सोमनाथ भारती ने यह कहकर केंद्र सरकार पर निशान साधा है कि अगर प्रक्रिया सही नहीं थी तो बिल उसी समय वापस भेजे जाने चाहिए थे, आखिर केंद्र सरकार इन्हें पिछले एक साल से अपने पास क्यों लटकाए रही। भारती ने कहा कि केंद्र का बिलों को लौटाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। अगर बिल भेजने की प्रक्रिया सही नहीं थी तो उन्हें उसी दिन वापस कर देना चाहिए था जिस दिन ये मंजूरी के लिए भेजे गए थे। साफ है कि केंद्र सरकार दिल्ली की सरकार को यहां की जनता के कल्याण के लिए कुछ नहीं करने दे रही है।

