दिल्ली-NCR में GRAP के नियम बदले, जरूरी सामान वाले पुराने ट्रकों को भी राहत नहीं; उल्लंघन पर दोगुना जुर्माना
CAQM ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत 500 वर्ग मीटर से अधिक के निर्माण परियोजनाओं का पंजीकरण अनिवार्य होगा।

एनसीआर में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने नए दिशा-निर्देश और संशोधन जारी किए हैं। प्रतीकात्मक तस्वीर
HighLights
NCR में वायु प्रदूषण नियंत्रण हेतु CAQM के नए नियम।
500 वर्ग मीटर से अधिक निर्माण परियोजनाओं का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य।
दिल्ली-NCR में केवल EV, CNG, BS-6 बसों को अनुमति।
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। सर्दियों में दिल्ली एवं एनसीआर की हवा को प्रदूषण से बचाने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप) के प्रविधानों में कई अहम बदलाव किए हैं।
संशोधित व्यवस्था के तहत अब जरूरी सामान ले जाने वाले बीएस-4 और इससे पुराने मालवाहक वाहनों को भी प्रदूषण संबंधी प्रतिबंधों से छूट नहीं मिलेगी।
इसके साथ ही पुराने वाहनों पर रोक का भौगोलिक दायरा बढ़ाया गया है और दिल्ली में प्रवेश करने वाली अंतरराज्यीय बसों के लिए भी शुरुआती चरण से ही सख्त नियम लागू होंगे।
55 प्रविधान और 34 सिटीजन चार्टर रहेंगे
सीएक्यूएम की सोमवार को हुई पूर्ण बैठक में इन बदलावों को मंजूरी दी गई और मंगलवार को इनकी घोषणा की गई। पत्रकार वार्ता में आयोग के सदस्य (तकनीकी) डाॅ एसडी अत्री ने बताया कि नवंबर 2025 के बाद पहली बार ग्रेप के ढांचे में इस तरह के व्यापक संशोधन किए गए हैं। अब ग्रेप के तहत कुल 55 प्रविधान और 34 सिटीजन चार्टर रहेंगे।
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सोनीपत तक बढ़ा पुराने वाहनों पर प्रतिबंध
ग्रेप-3 के दौरान बीएस-3 पेट्रोल और बीएस-4 डीजल या इससे पुराने हल्के चार पहिया वाहनों के परिचालन पर रोक का दायरा अब हरियाणा के सोनीपत तक बढ़ा दिया गया है। पहले यह व्यवस्था केवल गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर में लागू थी।
मतलब, ग्रेप-3 लागू होने पर इन श्रेणियों के वाहन निर्धारित क्षेत्रों में नहीं चल सकेंगे। दिल्ली में पंजीकृत पुराने वाहन भी इस प्रतिबंध के दायरे में रहेंगे। वहीं, एनसीआर के अन्य क्षेत्रों में पंजीकृत ऐसे वाहनों के दिल्ली में प्रवेश पर भी रोक रहेगी।
जरूरी सामान वाले मालवाहक वाहनों को भी राहत नहीं
अब तक ग्रेप-3 में आवश्यक वस्तुएं ले जाने वाले कुछ बीएस-3 पेट्रोल और बीएस-4 डीजल हल्के मालवाहक वाहनों को तथा ग्रेप-4 में कुछ पुराने ट्रकों को छूट दे दी जाती थी। संशोधित प्रविधान में यह छूट समाप्त कर दी गई है। यानी ईंधन मानक पूरा नहीं करने वाले वाहन सिर्फ जरूरी सामान ले जाने के आधार पर प्रतिबंध से बाहर नहीं रहेंगे।
बसों पर ग्रेप-1 से सख्ती
अंतरराज्यीय बसों के लिए भी नियम कड़े किए गए हैं। अब ग्रैप-1 लागू होते ही हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और आसपास के राज्यों से दिल्ली व एनसीआर आने वाली बसों में केवल इलेक्ट्रिक, सीएनजी और बीएस-6 डीजल श्रेणी की बसों को प्रवेश की अनुमति होगी। पहले यह प्रतिबंध ग्रेप-2 से लागू होता था।
500 वर्गमीटर से बड़े निर्माण कार्यों की निगरानी बढ़ी
सीएक्यूएम ने निर्माण और ध्वस्तीकरण (सीएंडडी) गतिविधियों से जुड़े 2021 के निर्देशों में भी संशोधन किया है। पहले आनलाइन पंजीकरण और निगरानी का दायरा मुख्य रूप से नगर निकाय या शहरी क्षेत्रों तक सीमित था।
अब इसे एनसीआर के शहरी, नियंत्रित, विकास, औद्योगिक विकास, औद्योगिक क्षेत्रों और हाईवे कारिडोर जोन तक बढ़ाया गया है।
इसके तहत 500 वर्गमीटर या उससे अधिक क्षेत्रफल वाली सीएंडडी परियोजनाओं का आनलाइन पंजीकरण और निगरानी की जाएगी। इसका उद्देश्य निर्माण गतिविधियों से होने वाले धूल प्रदूषण के स्रोतों की पहचान और नियंत्रण को मजबूत करना है।
डीजी सेट पर भी कड़ा प्रविधान
ग्रेप-1 से ही डीजल जनरेटर सेट से जुड़े नियमों के उल्लंघन पर दोगुना जुर्माना लगाने का प्रविधान किया गया है। इससे प्रदूषण नियंत्रण नियमों के अनुपालन को शुरुआती चरण में ही सख्त करने का प्रयास है। पहले दोगुना जुर्माना ग्रेप-2 में लगता था।
