कैसे खत्म होगा कूड़ों का पहाड़? गाजीपुर लैंडफिल साइट पर हर रोज जमा हो रहा 800 मीट्रिक टन कचरे का ढेर
दिल्ली के शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने गाजीपुर लैंडफिल का निरीक्षण कर अधिकारियों से कूड़ा निस्तारण पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि प्रतिदिन 800 मीट्रिक टन ताजा कूड़ा जमा हो रहा है और दिसंबर 2027 तक लैंडफिल को पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य है।
HighLights
मंत्री आशीष सूद ने गाजीपुर लैंडफिल का निरीक्षण किया।
प्रतिदिन 800 मीट्रिक टन ताजा कूड़ा जमा हो रहा।
दिसंबर 2027 तक लैंडफिल खत्म करने का लक्ष्य।
जागरण संवाददाता, पूर्वी दिल्ली। दिल्ली के शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने शुक्रवार को दिल्ली नगर निगम के अधिकारियों के साथ गाजीपुर लैंडफिल साइट का निरीक्षण किया। कचरा निस्तारण को लेकर अधिकारियों के साथ बातचीत की और लैंडफिल पर कूड़े की मौजूदा स्थिति के बारे में जाना।
मंत्री आशीष सूद ने कहा कि कूड़े के पहाड़ को खत्म करने में दो प्रमुख बधाएं आ रही हैं। पहली बाधा लैंडफिल पर प्रतिदिन आने वाले ताजे कचरे से है। शाहदरा पूर्वी एवं शाहदरा दक्षिणी जोन से प्रतिदिन लगभग 2,400 से 2,500 मीट्रिक टन ताजा कचरा गाजीपुर साइट पर आता है।
बड़ा हिस्सा वेस्ट-टू-एनर्जी संयंत्र में भेज दिया जाता
इसमें से एक बड़ा हिस्सा वेस्ट-टू-एनर्जी संयंत्र में भेज दिया जाता है, जबकि लगभग 800 मीट्रिक टन प्रतिदिन ताजे कचरे के ढेर में जमा हो रहा है। यह ढेर बढ़ रहा है। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ताजे कचरे का प्रसंस्करण लेगेसी कचरे से पूरी तरह अलग व्यवस्था के तहत किया जाए, ताकि नए कचरे का जमाव न हो और बायोमाइनिंग का कार्य निर्बाध रूप से जारी रह सके।
कूड़ा निस्तारण के पहले फेज में 24 नवंबर 2022 से 19 नवंबर 2024 तक 30 लाख मीट्रिक टन लेगेसी कचरे की बायोमाइनिंग का कार्य सौंपा गया था, लेकिन पूरे अनुबंध काल में केवल 13.90 लाख मीट्रिक टन कचरे का ही बायोमाइनिंग के माध्यम से निस्तारण किया जा सका।
फरवरी 2025 में भाजपा सरकार के गठन के बाद इस कार्य में उल्लेखनीय तेजी लाई गई। सात मार्च 2025 को फेज दो के तहत 30 लाख मीट्रिक टन लेगेसी कचरे की बायोमाइनिंग का कार्य आवंटित किया गया, जिसे सितंबर 2026 तक पूरा किये जाने का लक्ष्य है।
लगभग 20 एकड़ भूमि कूड़ा मुक्त हो गई
24 लाख मीट्रिक टन कचरे का निस्तारण किया जा चुका है तथा लगभग 20 एकड़ भूमि कूड़ा मुक्त हो गई है। मंत्री ने दूसरी प्रमुख चुनौती बायोमाइनिंग के दौरान निकलने वाले इनर्ट (अप्रसंस्करणीय) पदार्थ के निस्तारण से संबंधित है। अधिकारियों ने मंत्री से कहा कि अब इसके निस्तारण के लिए गाजीपुर लैंडफिल से लगभग 23 किलोमीटर दूर स्थित एनटीपीसी इको पार्क में व्यवस्था कर दी गई है।
इसपर मंत्री ने कूड़ा निस्तारण में लगी एजेंसी को निर्देश दिए कि इनर्ट पदार्थ को संबंधित जगह तक पहुंचाने के लिए वाहनों की संख्या तत्काल बढ़ाई जाए तथा एक सप्ताह के भीतर मंत्री कार्यालय को इसकी रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए, ताकि इनर्ट के निस्तारण के कारण बायोमाइनिंग कार्य प्रभावित न हो। दिल्ली की जनता अस्थायी नहीं बल्कि स्थायी समाधान की हकदार है।
1. अप्रैल 2026 में किए गए नवीनतम ड्रोन सर्वेक्षण के अनुसार गाजीपुर लैंडफिल पर 67.81 लाख मीट्रिक टन कचरा मौजूद था
2. 30 अप्रैल से 25 जून 2026 के बीच लगभग 3.39 लाख मीट्रिक टन कचरे का बायोमाइनिंग के माध्यम से निस्तारण किया गया, जिसके बाद वर्तमान में साइट पर 66.68 लाख मीट्रिक टन कचरा शेष है।
3. 31 जुलाई तक प्रतिदिन बायोमाइनिंग क्षमता 7 हजार मीट्रिक टन से बढ़ाकर 12 हजार मीट्रिक टन करने के निर्देश।
4. दिसंबर 2027 तक गाजीपुर लैंडफिल से कचरे का पूरी तरह से निस्तारण कर दिया जाएगा।

