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    एअर इंडिया की फुकेट-दिल्ली फ्लाइट में टर्बुलेंस या सिस्टम फेलियर? जांच में उलझी 137 यात्रियों की सुरक्षा

    Updated: Mon, 10 Aug 2026 07:06 PM (IST)

    फुकेट से दिल्ली आ रही एअर इंडिया की उड़ान में 17 यात्री घायल हुए, जब विमान अचानक 300 फीट नीचे गिरा। शुरुआती टर्बुलेंस के दावे के बावजूद, जांच अब हाइड् ...और पढ़ें

    एअर इंडिया की फ्लाइट में टर्बुलेंस के दौरान लिए गए वीडियो के स्क्रीनशॉट। फोटो: वीडियो ग्रैब

    एअर इंडिया की फ्लाइट में टर्बुलेंस के दौरान लिए गए वीडियो के स्क्रीनशॉट। फोटो: वीडियो ग्रैब

    HighLights

    1. विमान 300 फीट नीचे गिरा, 17 यात्री घायल हुए

    2. हाइड्रोलिक और फ्लाइट-कंट्रोल सिस्टम फेलियर की आशंका

    3. पायलट के डोप टेस्ट और सुरक्षा मानकों की जांच

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। चार अगस्त को फुकेट से दिल्ली आ रही एअर इंडिया की उड़ान संख्या एआई 2379 में सवार 137 यात्रियों के साथ आखिर हवा में क्या हुआ था, इसका सटीक और अंतिम सच क्या है, यह तो विमान दुर्घटना अन्वेषण ब्यूरो (एएआईबी) की अंतिम जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरी तरह साफ हो पाएगा।

    लेकिन, जब तक इस गंभीर घटना की आधिकारिक जांच जारी है, तब तक कई तरह की बातें और दावे सामने आ रहे हैं। एक तरफ जहां शुरुआती दावों में इसे खराब मौसम का नतीजा यानी इन-फ्लाइट टर्बुलेंस बताया गया।

    air india turbulence

    वहीं तकनीकी रिपोर्टों और सूत्रों के हवाले से ऐसी जानकारियां सामने आ रही हैं जो किसी बड़े सिस्टम फेलियर की ओर इशारा करती हैं। जब तक सच सामने नहीं आता, तब तक उन तमाम पहलुओं और दावों पर गौर करना जरूरी है जो 17 यात्रियों के घायल होने और विमान के अचानक 300 फीट नीचे गिरने के बाद तैर रहे हैं।

    हाइड्रोलिक-फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम में गड़बड़ी की बात 

    सूत्रों का कहना है कि विमान के ऑटोमेटेड पोस्ट-फ्लाइट मेंटेनेंस रिपोर्ट के मुताबिक, टेकऑफ के करीब ढाई घंटे बाद विमान में हाइड्रोलिक और फ्लाइट-कंट्रोल सिस्टम का क्रमिक फेलियर शुरू हुआ।

    एअरबस ए320 नियो में तीन स्वतंत्र हाइड्रोलिक सिस्टम (लाल, नीला और हरा) होते हैं, जो विमान के मुख्य कंट्रोल (ब्रेक, एलेवेटर्स, नोज़-व्हील) को पावर देते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, महज एक मिनट के भीतर तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम में अलग-अलग और संयुक्त रूप से नौ फाल्ट मैसेज दर्ज हुए।

    ऑटोपायलट बंद और नोज-अप

    सूत्रों का कहना है कि इसके तुरंत बाद ऑटोपायलट अपने आप डिस्कनेक्ट हो गया और विमान की नोज ऊपर की ओर उठने लगी, जिससे स्टाल वार्निंग (हवा में लिफ्ट खत्म होने का खतरा) ट्रिगर हो गई। स्थिति को संभालने के लिए पायलट ने मैनुअल कंट्रोल लिया और नोज को नीचे दबाने (नोज डाउन) का प्रयास किया।

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    इस दौरान विमान अचानक बेहद तेज गति से 300 फीट नीचे आ गिरा, जिससे यात्री सीट से उछलकर छत से जा टकराए। विमानन विशेषज्ञों के अनुसार, एक ही समय में तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम का प्रभावित होना अत्यंत दुर्लभ है।

    air india turbulence 1

    यह सीधे तौर पर एअरलाइन के ग्राउंड चेक, रूटीन मेंटेनेंस पर सवाल खड़े करता है।विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती बयान में एअर इंडिया ने इस हादसे की वजह केवल 'टर्बुलेंस' बताई थी।

    हालांकि, बाद में जारी बयानों और नागरिक उड्डयन मंत्रालय के बयानों से शब्द पूरी तरह गायब हो गया और विमान दुर्घटना अन्वेषण ब्यूरो ने इसे 'गंभीर घटना' श्रेणी में रखकर आधिकारिक जांच शुरू कर दी। यह भी कहा जा रहा है कि एअर इंडिया ने भी विमान निर्माता कंपनी 'एअरबस' को पत्र लिखकर इस तकनीकी विफलता पर जवाब मांगा है।

    सुरक्षा मानक, यात्रियों का दावा और डोप टेस्ट पर खड़े होते सवाल

    विमान में हुए इस भयानक हादसे के बाद नागरिक उड्डयन क्षेत्र में सुरक्षा मानकों के साथ-साथ काकपिट क्रू की शारीरिक व मानसिक फिटनेस पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हादसे के बाद विमान में सवार कुछ यात्रियों ने पायलट के नशे में होने या मानसिक रूप से पूरी तरह सतर्क न होने की आशंका भी जताई।

    इस आशंका ने पूरे मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। हालांकि अभी इस मामले में पायलट के डोप टेस्ट के अंतिम नतीजे नहीं आए हैं।

    air india turbulence 2

    उड्डयन विशेषज्ञों का कहना है कि हाइड्रोलिक फेलियर जैसी आपातकालीन या जानलेवा स्थितियों में पायलट का शत-प्रतिशत सतर्क और मानसिक रूप से स्थिर होना ही 137 जिंदगियों की रक्षा कर सकता है।

    अगर ऐसे नाजुक मोड़ पर निर्णय लेने की क्षमता में जरा सी भी चूक हो जाए, तो परिणाम बेहद भयावह हो सकते हैं।इसी खतरे को देखते हुए डीजीसीए ने वर्ष 2022 से फ्लाइट क्रू, एटीसी और मेंटेनेंस स्टाफ के लिए रैंडम डोप टेस्ट नियम अनिवार्य किया था, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उड़ान के दौरान क्रू किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थों (साइकोट्रापिक सबस्टेंस) या एल्कोहल के प्रभाव में न हो।

    भारत में प्री-फ्लाइट ब्रेथ एनालाइजर (बीए) टेस्ट में अतीत में भी कई वरिष्ठ पायलटों के नशे में पाए जाने और उनके लाइसेंस निलंबित होने के मामले सामने आ चुके हैं।

    यही वजह है कि विमान दुर्घटना अन्वेषण ब्यूरो (एएआईबी) की जांच में अब सिर्फ एक मिनट में आए नौ फाल्ट मैसेज जैसी तकनीकी खराबी ही नहीं, बल्कि पायलट के सेफ्टी प्रोटोकाल, मेडिकल फिटनेस और डोप/एल्कोहल जांच के पहलुओं की भी गहराई से समीक्षा की जा रही है।

    अतीत के मामले

    • एअर इंडिया लंदन-दिल्ली उड़ान मामला (2018): एअर इंडिया के वरिष्ठ कप्तान अरविंद कथपलिया नई दिल्ली से लंदन जाने वाली उड़ान से ठीक पहले प्री-फ्लाइट ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट में फेल पाए गए।
    • जेट एअरवेज और स्पाइसजेट के मामले (2015 - 2019): जेट एअरवेज और स्पाइसजेट के कई विदेशी और भारतीय पायलट लगातार चेकिंग के दौरान अल्कोहल टेस्ट में पाजिटिव पाए गए। कुछ मामलों में क्रू मेंबर्स लैंडिंग के बाद हुए टेस्ट में भी अल्कोहल के असर में पाए गए।
    • वर्ष 2019 के मामले: वर्ष 2019 में अनिवार्य अल्कोहल टेस्ट (शराब की जांच) में 19 पायलट पाजिटिव पाए गए। सभी को डयूटी से हटाया गया।
    • वर्ष 2022 के मामले: डीजीसीए के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में कम से कम 41 पायलट अनिवार्य अल्कोहल टेस्ट (शराब की जांच) में फेल पाए गए।

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