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महिलाओं के खिलाफ हो रहे अत्याचार को लेकर इंग्लैंड के क्रिकेटर ने उठाई आवाज, इस लीग में न खेलने का किया फैसला

Published: Tue, 13 Oct 2026 12:31 PM (IST)

इंग्लैंड के बल्लेबाज ओली पोप ने अफगानिस्तान प्रीमियर लीग से अपना नाम वापस ले लिया है। उन्होंने यह फैसला अफगानिस्तान ...और पढ़ें

ओली पोप ने लिया बड़ा फैसला

ओली पोप ने लिया बड़ा फैसला 

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स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। इंग्लैंड के बल्लेबाज ओली पोप ने अफगानिस्तान प्रीमियर लीग (एपीएल) के पहले सीजन के ड्राफ्ट से अपना नाम वापस ले लिया है। यह लीग इस साल के अंत में संयुक्त अरब अमीरात में खेली जानी थी। उनका यह फैसला इस बात को लेकर आया है कि क्या इंग्लैंड के क्रिकेटरों को लीग में हिस्सा लेना चाहिए या नहीं और यह बहस अफगानिस्तान की तालिबान सरकार में महिलाओं और लड़कियों के साथ हो रहे अत्याचार को देखते हुए उपजी है।

पोप ड्राफ्ट में इंग्लैंड के इकलौते केंद्रीय अनुबंध वाले खिलाड़ी थे। उनका ड्राफ्ट में से नाम वापस लेने का फैसला उनका खुद का निजी फैसला समझा जा रहा है। इसमें इंग्लैंड के निदेशक रोब की का हाथ नहीं माना जा रहा है जिनसे अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेने को लेकर चर्चा चल रही थी। खिलाड़ियों को दूसरे देश की लीग में खेलने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र की जरूरत होती है।

यहां से शुरू हुई बहस

साल 2021 में तालिबान सरकार ने अफगानिस्तान में वापसी की थी और तब इंग्लैंड ने अफगानिस्तान के साथ द्विपक्षीय सीरीज खेलने से मना कर दिया था। हालांकि, इंग्लैंड आईसीसी या मल्टी टीम फॉर्मेट वाले टूर्नामेंट में अफगानिस्तान के खिलाफ खेलती है। क्रिकइंफो की रिपोर्ट के मुताबिक, इस महीने की शुरुआत में ईसीबी ने फैसला किया था कि वह एपीएल में खेलने के लिए अपने खिलाड़ियों को एनओसी दे देगा।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि रोब की ने खिलाड़ियों से कहा था कि वह एपीएल में खेलने को लेकर सही स्टांस लें। उन्होंने कहा था कि वह लीग में खेलने को लेकर पोप से बात करेंगे। दोनों के बीच चर्चा होने से पहले ही पोप ने नाम वापस ले लिया है। उनके अलावा विल स्मीड और डेविड विली ने भी 24 अक्टूबर से शुरू हो रही लीग में न खेलने का फैसला किया है।

रोब की ने कही थी ये बात

कुछ दिन पहले ही रोब की ने बीबीसी टेस्ट मैच स्पेशल पॉडकास्ट पर बात करते हुए कहा था, "कानूनी तौर पर खिलाड़ियों को किसी दूसरे टूर्नामेंट में जाने से रोका नहीं जा सकता। यह एक नैतिक फैसला होता है। खिलाड़ियों को सही नैतिक फैसला लेने के लिए तैयार रहना चाहिए। मेरे लिए यह कहना आसान है कि मैं खेलने नहीं जाऊंगा।"

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