40 साल की उम्र में भारत के लिए किया टेस्ट डेब्यू, विंबलडन भी खेला और फिर हो गया गायब; जानिए चेन्नई के इस क्रिकेटर की परेशान करने वाली कहानी
भारतीय क्रिकेट टीम में एक ऐसा खिलाड़ी रहा है जो मिस्ट्री बन चुका है। हां, क्योंकि दो खेलों में भारत ...और पढ़ें

सी रामास्वामी की जिंदगी बनी मिस्ट्री

समय कम है?
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स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। क्रिकेट में अगर आप 40 की उम्र या इसके आस-पास भी पहुंच गए तो करियर खत्म मानिए। संन्यास की आवाजें इतनी जोर से शोर मचाएंगी कि साउंडप्रूफ कमरे में भी चैन नहीं मिलेगा। भारत में इसके कई उदाहरण हैं, लेकिन कुछ खिलाड़ी ऐसे भी हुए हैं जिन्होंने 40 पार करने के बाद भारतीय क्रिकेट टीम के लिए अपना पहला मैच खेला।
अभी तक के इतिहास में भारतीय क्रिकेट में दो और दुनिया में कुल 13 क्रिकेटर ऐसे हुए हैं जिन्होंने 40 के पार जाकर अपना पहला मैच खेला हो। उनमें से ही एक हैं कोटार रामास्वामी। 16 जून 1896 में मद्रास जिसे अब चेन्नई कहा जाता है, वहां उनका जन्म हुआ।
विरासत में मिला क्रिकेट
उन्हें क्रिकेट विरासत में मिला था। उनके पिता बुची बाबू नायडू मद्रास के लिए क्रिकेट खेलते थे। उनके भाई एम बालिया और एम वेंकटरमनजुलू भी फर्स्ट क्लास क्रिकेट खेले। घरेलू क्रिकेट में रामास्वामी लगातार खेल रहे थे और अपनी छाप छोड़ रहे थे। मद्रास क्रिकेट में वह जाना-माना नाम बन चुके थे। वह मद्रास के पहले रणजी ट्रॉफी मैच का हिस्सा भी बने थे जो मैसूर के खिलाफ खेला गया था। इस मैच में उन्होंने 26 रन बनाए थे। 40 साल की उम्र हो चुकी थी फिर भी वह खेल रहे थे।
तभी भारतीय टीम को इंग्लैंड के दौरे पर जाना था। बात साल 1936 की है। इस दौरे पर रामास्वामी को चुना गया। 40 साल 37 दिन की उम्र में उन्होंने भारत के लिए अपना पहला मैच खेला और वह ऐसा करने वाले देश के दूसरे सबसे उम्रदराज खिलाड़ी बने। उन्होंने इस मैच में पहली पारी में 40 और दूसरी पारी में 60 रन बनाए।
विंबलडन भी खेले
भारत के लिए डेब्यू करने से पहले रामास्वामी टेनिस के चार ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट में से एक विंबलडन भी खेल चुके थे। वह कैमब्रिज यूनिवर्सिटी में पढ़ते थे और वहां भी क्रिकेट खेलते थे, लेकिन साथ ही उन्होंने टेनिस में भी हाथ आजमाए। वह वहां 1923 तक रहे और पुरुष डबल्स में कैमब्रिज यूनिवर्सिटी से खेले। वह डेविस कप के लिए भी चुने गए। उस साल वह विंबलडन भी खेले और ब्रिटेन के उलीसस विलियम्स को पांच सेटों के मैच में मात भी दी। दूसरे राउंड में वह निकोसल मीसू से मात खाकर बाहर हो गए।
भारत आकर उन्होंने क्रिकेट खेला और देश का प्रतिनिधित्व किया। संन्यास लेने के बाद वह इस खेल से जुड़े रहे। 1953 में उन्होंने भारत के वेस्टइंडीज दौरे को मैनेज किया। 1950 के दौरन वह सेलेक्टर भी रहे।
अचानक हो गए गायब
लेकिन रामास्वामी को लेकर अभी काफी कुछ होना बाकी था। 15 अक्टूबर 1985 वह अपने घर से चले गए और फिर कभी लौटकर नहीं आए। तब से रामास्वामी के बारे में कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिल सकी है।
