प्रकृति, रोमांच, और स्थानीय स्वाद का अद्भुत अनुभव कराता है बस्तर मानसून सर्किट
बारिश में बस्तर का तीन दिवसीय मानसून सर्किट प्रकृति, रोमांच और स्थानीय स्वाद का अनूठा अनुभव कराता है। केशकाल घाटी, टाटामारी हिल स्टेशन, झरने और प्राची ...और पढ़ें
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बस्तर का जंगल हिल स्टेशन और आदिवासी संस्कृति का अनूठा संगम(फोटो: वन विभाग)

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जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
विनोद सिंह, जगदलपुर। बारिश की फुहार पड़ते ही बस्तर का जंगल हरे रंग की अनगिनत छटाओं से भर उठता है। केशकाल घाटी की सर्पीली सड़कें, बादलों से घिरा टाटामारी हिल स्टेशन, झरने, प्राचीन शैलचित्र और आदिवासी संस्कृति का अनूठा संगम इस सफर को खास बना देता है।
रायपुर से शुरू होने वाला यह तीन दिन का बस्तर मानसून सर्किट प्रकृति, रोमांच, इतिहास और स्थानीय स्वाद का अद्भुत अनुभव कराता है। यदि आप बारिश को सिर्फ खिड़की से नहीं, बल्कि बादलों के बीच जीना चाहते हैं, तो बस्तर की यह यात्रा आपकी यादों में लंबे समय तक बस जाएगी।

टाटामारी: प्रकृति का सान्निध्य और पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद
रायपुर से 130 किलोमीटर दूर फूलों की घाटी केशकाल की सर्पीली घुमावदार सड़क से यात्रा रोमांचित और पर्यटकों की जिज्ञासा को भी बढ़ाती है। केशकाल से तीन किलोमीटर दूर स्थित है प्रकृति प्रेमियों के लिए आदर्श स्थल ‘टाटामारी हिल स्टेशन’। हर मौसम में टाटामारी का सौंदर्य अलग-अलग शृंगार के साथ लुभावना नजर आता है।

यहां मनमोहक सूर्योदय और सूर्यास्त के दृश्य, जंगल ट्रैकिंग का रोमांच तथा वीआईपी काटेज, वुडन काटेज, शयनगृह और टेंट में आरामदायक सुविधाएं पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद इस यात्रा को और यादगार बना देता है। यहां नीला आसमान मानो छत बन जाता है, बादल पहाड़ियों के ऊपर तैरते दिखाई देते हैं और हरे-भरे पेड़ प्रकृति का अनुपम शृंगार रचते हैं।
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झरनों की ध्वनि, फूलों पर मंडराती रंग-बिरंगी तितलियां और चारों ओर फैली हरियाली मन और आंखों दोनों को सुकून से भर देती है। केशकाल इको पर्यटन क्षेत्र में टाटामारी सहित आसपास कई दर्शनीय स्थल हैं।

कुंवेमारी, होनहेड़ व उमरादाह जैसे झरनों का रोमांच
केशकाल घाटी और आसपास में दो दर्जन से अधिक मनमोहक जलप्रपात हैं। टाटामारी से 32 किलोमीटर दूर स्थित कुंवेमारी गांव अपने सीढ़ीनुमा स्वच्छ झरनों और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है।
यहां गिरते जल की ध्वनि, चारों ओर फैली हरियाली और शांत वातावरण पर्यटकों को प्रकृति के बेहद करीब होने का अहसास कराते हैं। होनहेड़, उपरबेदी, उमरादाह, मुत्ते खडका, कटुलकासा जैसे जलप्रपात का मनोहारी दृश्य भी पर्यटकों को खूब आकर्षित करता है।

लिंगोदरहा: शैलचित्रों में बसती है प्राचीन संस्कृति
टाटामारी से 17 किमी दूर बावनीमारी गांव में स्थित प्राकृतिक स्थल लिंगोदरहा जलप्रपात व अपने प्राचीन शैलचित्रों के लिए विशेष पहचान रखता है। यहां के शैलचित्र प्राचीन सभ्यताओं के जीवन, संस्कृति और विश्वासों की सजीव झलक प्रस्तुत करते हैं। टाटामारी से आठ किलोमीटर दूर गढ़धनोरा पुरातात्विक, ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व का स्थल है।

यहां नलयुगीन ईंट निर्मित मंदिरों के भग्नावशेष हैं। पांचवी-छठीं सदी का प्राचीन शिवलिंग, विष्णु मंदिर, प्राचीन मूर्तियां और बावड़ी है। यहां एक टीले पर शिवलिंग है जो गोबरहीन के नाम से प्रसिद्ध है। धनोरा की पहाड़ी गुफाओं में भी दुर्लभ शैलचित्र सुरक्षित हैं।
जटायु शिला : केशकाल-टाटामारी से 29 किलोमीटर दूर जटायु शिला एक प्राकृतिक शिलाखंड है, जो अपनी सुंदरता और धार्मिक आस्था का केंद्र है।

कैसे पहुंचे और कहां रुके
जगदलपुर से 110 किमी, रायपुर से 180 किमी दूर सड़क मार्ग से यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है। रायपुर तक रेल और हवाई सेवा उपलब्ध है, जबकि जगदलपुर रेल, विमान और सड़क मार्ग से देश के प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है।
टाटामारी में काटेज, जबकि केशकाल में होटल उपलब्ध हैं। कोंडागांव और कांकेर में भी ठहरने व भोजन की बेहतर सुविधाएं हैं। इन दोनों शहरों से केशकाल-टाटामारी इको टूरिस्ट सर्किट घूमने के लिए निजी वाहन भी आसानी से मिल जाते हैं।