विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

छत्तीसगढ़ में 80 साल की महिला को 35 साल के मुकदमे से मुक्ति, जमीन विवाद को लेकर भाई-बहन लड़ते रहे कानूनी लड़ाई

Published: Mon, 26 Oct 2026 07:34 AM (IST)

छत्तीसगढ़ के बालोद में आठ एकड़ जमीन के विवाद में भाई-बहन ने 35 साल तक कानूनी लड़ाई लड़ी। 80 वर्षीय ...और पढ़ें

80 साल की महिला ने जीती सालों पुरानी कानूनी लड़ाई।

80 साल की महिला ने जीती सालों पुरानी कानूनी लड़ाई।

डिजिटल डेस्क, डौंडीलोहारा। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में आठ एकड़ जमीन के विवाद में भाई-बहन करीब 35 साल तक कानूनी लड़ाई लड़ते रहे। मृत बहन राधा बाई की पहचान अपनाकर पिता की संपत्ति में हिस्सा मांगने के मामले में करीब 80 वर्षीय गणेशिया बाई को दोषी ठहराया गया था।

कुछ दिन पहले छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने उनकी दोषसिद्धि बरकरार रखते हुए सजा पहले से जेल में बिताई गई 16 दिन की अवधि तक सीमित कर दी।

इस मामले का भावुक पहलू यह है कि लंबी कानूनी लड़ाई के बाद भाई-बहन के रिश्तों में फिर से मिठास लौट आई है। गणेशिया बाई और उनके भाई पोषण लाल देवांगन अब पुराने गिले-शिकवे भुला चुके हैं।

बता दें कि बालोद के डौंडीलोहारा क्षेत्र के ग्राम पासौद निवासी सरजू राम देवांगन और स्वजन उनकी पत्नी सुखबती के परिवार के पास करीब आठ एकड़ जमीन थी। उनके परिवार में दो बेटे और तीन बेटियां थीं।

तीन बेटियों में से एक राधा बाई की जन्म के लगभग 15 दिन बाद ही साल 1950 में मृत्यु हो गई थी।गणेशिया बाई के बेटे चंद्र कुमार देवांगन के मुताबिक, उनकी मां की पहली शादी हड़गहन में हुई थी। वैवाहिक जीवन में परेशानियों के कारण वह मायके लौट आई थीं। इस दौरान कुछ लोगों ने उन्हें संपत्ति में हिस्सा मांगने के लिए प्रेरित किया था।

वर्ष 1991-92 में नायब तहसीलदार डौंडीलोहारा के समक्ष राजस्व प्रकरण की बांग्ल सुनवाई के दौरान गणेशिया बाई पर मृत बहन की पहचान अपनाकर पेश होने का आरोप लगा। भाई पोषण लाल ने इस दावे को चुनौती दी।

जन्म-मृत्यु पंजी के अभिलेखों और अन्य दस्तावेजों के आधार पर जांच के बाद 30. अप्रैल 2016 को जिला एवं सत्र न्यायालय ने उन्हें दोषी ठहराया और छह माह की सजा सुनाई।

अपील अदालतों से राहत न मिलने पर उन्होंने हाई कोर्ट में आपराधिक पुनरीक्षण मीडि याचिका दायर की थी। हाई कोर्ट ने साक्ष्यों के को आधार पर दोषसिद्धि तो बरकरार रखी, लेकिन वृद्धावस्था को देखते हुए सजा को राज्य केवल 16 दिन (जो वे पहले ही जेल में सख्त सजा काट चुकी थीं) तक सीमित कर दिया।

यह भी पढ़ें: छत्तीसगढ़ के दुर्ग में 250 संदिग्ध बांग्लादेशी चिह्नित, एसटीएफ ने चलाया सर्च ऑपरेशन