'महिला को पता था शादीशुदा है प्रेमी, फिर झांसा कैसे', हाई कोर्ट ने महिला की अपील खारिज की
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अहम फैसले में कहा है कि यदि महिला को पहले से पता हो कि पुरुष विवाहित है, तो बाद में शादी का झांसा देकर दुष्कर्म या धोखाधड़ी का ...और पढ़ें

'महिला को पता था शादीशुदा है प्रेमी, फिर झांसा कैसे', हाई कोर्ट (सांकेतिक तस्वीर)
HighLights
महिला ने व्यक्ति पर शादी का झांसा देकर संबंध बनाने और धोखाधड़ी का आरोप लगाया था
कोर्ट ने कहा कि धोखाधड़ी का मामला तब बनता है, जब महिला को वैध पत्नी होने का भ्रम दिया जाए
जेएनएन, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अहम फैसले में कहा है कि यदि महिला को पहले से पता हो कि पुरुष विवाहित है, तो बाद में शादी का झांसा देकर दुष्कर्म या धोखाधड़ी का आरोप टिक नहीं सकता।
जस्टिस संजय एस. अग्रवाल की सिंगल बेंच ने न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत के आरोपित को बरी करने के फैसले को बरकरार रखा। महिला की अपील खारिज कर दी गई है।
डोंगरगढ़ की महिला ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर बताया कि उसने वर्ष 2008 में पहले से शादीशुदा महेश गंजीर नाम से विवाह किया था। दोनों के बीच एक इकरारनामा भी हुआ था और वे पति-पत्नी की तरह रह रहे थे।
महिला ने महेश गंजीर पर शादी का झांसा देकर संबंध बनाने और धोखाधड़ी का आरोप लगाया था। कोर्ट ने कहा कि धोखाधड़ी का मामला तब बनता है, जब महिला को वैध पत्नी होने का भ्रम दिया जाए।
चूंकि महिला को पुरुष के विवाहित होने की जानकारी थी और कथित इकरारनामा हिंदू विवाह अधिनियम के तहत शून्य था, इसलिए धोखाधड़ी का मामला नहीं बनता।