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    'एक्सीडेंट क्लेम के मामलों में आधार कार्ड उम्र का पक्का सबूत नहीं', छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

    Updated: Sun, 19 Jul 2026 09:41 AM (GMT+05:30)

    छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम में मुआवजा तय करते समय आधार कार्ड को उम्र का एकमात्र पक्का सबूत मानने से इनकार किया है। ...और पढ़ें

    एक्सीडेंट क्लेम में आधार कार्ड उम्र का अकेला सबूत नहीं- CG हाई कोर्ट (फाइल फोटो)

    एक्सीडेंट क्लेम में आधार कार्ड उम्र का अकेला सबूत नहीं- CG हाई कोर्ट (फाइल फोटो)

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    डिजिटल डेस्क, रायपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने कहा कि मोटर एक्सीडेंट क्लेम में मुआवजा तय करते समय आधार कार्ड में लिखी उम्र को ही पक्का सबूत नहीं माना जा सकता।

    कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि ट्रिब्यूनल को रिकॉर्ड में मौजूद सभी सबूतों के आधार पर क्लेम करने वाले की उम्र तय करनी चाहिए।

    दरअसल, जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की पीठ ने तीन जुड़ी हुई अपीलों पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने फैसले का हवाला दिया। इसके जरिए हाई कोर्ट ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (MACT) के उस आकलन में सुधार किया, जिसमें केवल आधार कार्ड के आधार पर दावेदार की उम्र 60 साल मान ली गई थी।

    केवल आधार कार्ड पर निर्भर रहना सही नहीं

    हाई कोर्ट ने मामले के तथ्यों को देखते हुए नोट किया कि दावेदार ने हर स्तर पर लगातार अपनी उम्र 58 साल बताई थी, जबकि उसके आधिकारिक विकलांगता प्रमाण पत्र में उसकी उम्र 60 साल दर्ज थी। इस मामले को लेकर कोर्ट स्पष्ट तौर पर कहा कि ऐसी विरोधाभासी परिस्थितियों में, ट्रिब्यूनल द्वारा अन्य साक्ष्यों को नजरअंदाज कर विशेष रूप से केवल आधार कार्ड पर निर्भर रहना कानूनी रूप से सही नहीं था।

    क्या है पूरा मामला?

    जस्टिस सचिन सिंह राजपूत एक सड़क दुर्घटना से जुड़े तीन मामलों की सुनवाई कर रहे थे। इस दुर्घटना में दो लोगों की मौत हो गई और एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसके कारण उसका पैर काटना पड़ा था। टाटा सूमो के मालिक और ड्राइवर ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल के फैसले को चुनौती देते हुए ये अपीलें दायर कीं।

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    मालिक का तर्क था कि भले ही इंश्योरेंस पॉलिसी में इंश्योरेंस की अवधि 20.04.2019 से शुरू हो रही थी, लेकिन प्रीमियम का भुगतान 19.04.2019 को ही इंश्योरेंस कंपनी का एजेंट होने का दावा करने वाले व्यक्ति को कर दिया गया। यह प्रीमियम उसी दिन शाम 4:35 बजे इंश्योरेंस कंपनी के खाते में जमा हो गया, जो रात 10:00 बजे हुई दुर्घटना से कई घंटे पहले की बात।

    इसलिए तर्क दिया गया कि इंश्योरेंस कंपनी मुआवजे का भुगतान करने के लिए जिम्मेदार है। दावा करने वालों ने भी ट्रिब्यूनल द्वारा दिए गए मुआवजे को बढ़ाने के लिए क्रॉस-ऑब्जेक्शन दायर किए।

    कोर्ट ने यह भी कहा कि सिर्फ इंश्योरेंस प्रीमियम मिलने से ही इंश्योरेंस कंपनी की जिम्मेदारी तय नहीं हो जाती, क्योंकि इंश्योरेंस का कॉन्ट्रैक्ट पॉलिसी में बताई गई तारीख और समय से शुरू होता है, न कि प्रीमियम मिलने की तारीख से।