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बाजार में गिरावट के बीच 'रुपये' ने दिखाई ताकत, 6 सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंचा; क्या हैं तेजी के कारण?

Published: Mon, 07 Sep 2026 10:12 AM (IST)

भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 10 पैसे मजबूत होकर छह सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। FCNR-B डिपॉजिट ...और पढ़ें

7 सितंबर को रुपया तेजी के साथ कारोबार कर रहा है।

7 सितंबर को रुपया तेजी के साथ कारोबार कर रहा है।

HighLights

  1. रुपया डॉलर के मुकाबले छह सप्ताह के उच्चतम स्तर पर।

  2. FCNR-B जमा और RBI के हस्तक्षेप से मिली मजबूती।

  3. कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक हालात चिंता का विषय।

नई दिल्ली। शेयर बाजार में गिरावट के बीच भारतीय मुद्रा 'रुपया' ने तेजी दिखाई है। 7 सितंबर को रुपया 10 पैसे की बढ़त के साथ खुला और लगभग छह हफ़्ते के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। विदेशी मुद्रा अनिवासी (FCNR-B) बैंक जमा में भारी बढ़ोतरी और रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया के दखल से बाज़ार का मूड बेहतर हुआ, जबकि ब्रेंट क्रूड की कीमतें अभी भी चिंता का विषय बनी हुई हैं।

पिछले सेशन में 94.49 पर बंद होने के बाद, रुपया डॉलर के मुकाबले 94.39 पर ट्रेड कर रहा था। यह एक महीने से ज़्यादा समय में इसका सबसे अच्छा हफ़्ता रहा। मार्केट के जानकारों के मुताबिक, पिछले दो हफ़्तों में सेंट्रल बैंक के बार-बार मार्केट में दखल देने से करेंसी को मज़बूती मिली है, जबकि ग्लोबल हालात इसके पक्ष में नहीं थे।

रुपये में क्यों आई तेजी?

कमोडिटी मार्केट के एक्सपर्ट्स का कहना है कि RBI रुपये की कीमत में भारी गिरावट को रोकने के लिए बाज़ार में अपनी मौजूदगी बनाए रखेगा। मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, CR फॉरेक्स एडवाइजर्स के मैनेजिंग डायरेक्टर अमित पबारी ने कहा, "FCNR से जुड़े डॉलर के भारी इनफ्लो की वजह से रुपया इस हफ़्ते मज़बूत स्थिति में है। हालांकि, ग्लोबल हालात अभी भी एक चुनौती बने हुए हैं। ₹94–₹94.20 का स्तर अहम सपोर्ट ज़ोन बना हुआ है। अगर ग्लोबल स्तर पर मुश्किलें बढ़ती हैं, तो USDINR की कीमत फिर से ₹95.00 प्रति डॉलर की ओर बढ़ सकती है।"

आगे क्या होंगे अहम ट्रिगर?

अमेरिका और ईरान के बीच नए हमलों से जियोपॉलिटिकल माहौल पर असर पड़ा और पश्चिम एशिया से एनर्जी सप्लाई को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ गईं, जिसके बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर $97 प्रति बैरल हो गई। जानकारों के मुताबिक, इस हफ्ते रुपये की चाल इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या RBI डॉलर बेचने का अपना दखल जारी रखता है या नहीं। साथ ही, तेल की कीमतें और US में ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें करेंसी और बॉन्ड मार्केट के लिए अहम ग्लोबल संकेत देंगी।

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अमेरिका के ताज़ा आर्थिक आंकड़ों से पता चलता है कि फ़ेडरल रिज़र्व अगले हफ़्ते होने वाली अपनी बैठक में ब्याज दरें बढ़ा सकता है। अगस्त में नॉन-फ़ार्म पेरोल में उम्मीद से ज़्यादा, यानी 1,62,000 की बढ़ोतरी हुई।