'पेड़ कभी आसमान तक नहीं बढ़ते'...इस एक चीज पर भरोसा करके शेयर बाजार से झुनझुनवाला ने बनाए अरबों; अरबपति ने उठाया पर्दा
रमेश दमानी ने राकेश झुनझुनवाला की निवेश रणनीति का खुलासा किया है। झुनझुनवाला बाजार की गिरावट में भी भारत की विकास यात्रा पर अटूट विश्वास रखते थे। वे निवेशकों को निराशा से दूर रहने और भारत की दीर्घकालिक वृद्धि पर भरोसा रखने की सलाह देते थे।

भारत की ग्रोथ पर था झुनझुनवाला का भरोसा

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
नई दिल्ली। जब से मध्य पूर्व में संघर्ष शुरू हुआ, दुनिया भर के शेयर बाजारों में जोरदार गिरावट देखी गयी। उस संघर्ष से भारतीय शेयर बाजार भी अछूता नहीं रहा। हालांकि बीच-बीच में युद्ध रुकने की उम्मीद से बाजार चढ़ा भी और जब से ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच सीजफायर हुआ है, तब से बाजार ने अच्छी वापसी की है। मगर आम तौर पर ऐसी किसी घरेलू या ग्लोबल घटना पर निवेशक जरूर रिएक्ट करते हैं और घबराहट में बिकवाली शुरू कर देते हैं, जिससे मार्केट और टूटता है।
मगर भारतीय शेयर बाजार के बिग बुल कहे जाने वाले राकेश झुनझुनवाला (Rakesh Jhunjhunwala) ऐसा नहीं करते थे। ऐसे समय पर उनकी क्या रणनीति होती है, एक अन्य भारतीय अरबपति ने उसका खुलासा किया है।
क्या करते थे झुनझुनवाला?
झुनझुनवाला बाजार में मंदी के समय क्या करते थे, इसका खुलासा हाल ही में दिग्गज निवेशक और अरबति कारोबारी रमेश दमानी ने किया है। दमानी ने झुनझुनवाला के सीक्रेट फॉर्मुले से पर्दा उठाया। उन्होंने बताया कि झुनझुनवाला किसी टेक्निकल चार्ट या मैथेमेटिकल फॉर्मूले के बजाय एक भरोसे पर टिके रहते थे, जिस पर उनका अटूट विश्वास था।
क्या था वो अटूट विश्वास?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार झुनझुनवाला से दमानी ने सीखा कि मार्केट के मुश्किल हालातों में भारत को लेकर आशावादी बने रहो। यानी झुनझुनवाला का अटूट भरोसा भारत की ग्रोथ पर था। दमानी के अनुसार बाजार में बड़ी गिरावट पर हर तरफ निराशा होती, तो उस समय तब झुनझुनवाला कहते कि भारत की ग्रोथ जर्नी पर भरोसा रखो और निगेटिविट से दूर रहो।
झुनझुनवाला को इसी भरोसे हजारों करोड़ रुपये की दौलत बनाने में कामयाबी मिली, क्योंकि उनके दौर में कई बार बाजार में मंदी आई। इनमें 1992 का हर्षद मेहता घोटाला, 2000-2002 डॉट-कॉम बबल, 2008 का वैश्विक वित्तीय संकट और 2020 की महामारी का दौर शामिल है।
बाजार हमेशा ऊपर नहीं जाता
दमानी के अनुसार झुनझुनवाला का मानना था कि बाजार में उतार-चढ़ाव आता रहता है, लेकिन भारत की लॉन्ग टर्म ग्रोथ एक स्थायी सच्चाई है। वे ये भी कहते थे कि ‘पेड़ कभी आसमान तक नहीं बढ़ते।’ यानी बाजार हमेशा ऊपर नहीं रहता, नीचे आता है और फिर रिकवरी करता है।
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(डिस्क्लेमर: यहां शेयर बाजार की जानकारी दी गयी है, निवेश की सलाह नहीं। जागरण बिजनेस निवेश की सलाह नहीं दे रहा है। स्टॉक मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है, इसलिए निवेश करने से पहले किसी सर्टिफाइड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से परामर्श जरूर करें।)
