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HDFC Bank में ₹45 करोड़ की गड़बड़ी! CEO शशिधर जगदीशन की भूमिका पर सवाल; ऑडिट रिपोर्ट से हड़कंप मचने के बाद टूटा शेयर

Published: Wed, 27 May 2026 10:22 AM (GMT+05:30)

एचडीएफसी बैंक के शेयर 2% से अधिक गिरे, क्योंकि बैंक ने महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) को किए गए ...और पढ़ें

क्यों फिसला एचडीएफसी बैंक का शेयर?

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नई दिल्ली। एचडीएफसी बैंक का शेयर (HDFC Bank Share Price Today) बुधवार को 2 प्रतिशत से ज्यादा गिर गया। दरअसल मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बैंक ने महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) को किए गए 45 करोड़ रुपये के ब्याज भुगतानों की इंटरनल विजिलेंस इंवेस्टिगेशन की थी। यह जांच उस समय के आसपास हुई थी, जब पूर्व चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती ने मार्च में अचानक इस्तीफा दे दिया था।
जांच में MSRDC को किए गए 45 करोड़ रुपये के ब्याज भुगतान का अंतर पाया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस जांच में कई सीनियर अधिकारियों की जवाबदेही तय की गई है, जिनमें MD और CEO शशिधर जगदीशन भी शामिल हैं। इस खुलासे का बैंक के शेयर पर आज निगेटिव असर दिख रहा है।

लेन-देन पर उठे थे सवाल

यह जाँच पूर्व चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती के 18 मार्च को इस्तीफा देने से कुछ समय पहले शुरू हुई थी। उन्होंने इस्तीफे की वजह बताते हुए कहा था कि "बैंक के अंदर कुछ ऐसी घटनाएँ और तौर-तरीके" चल रहे थे जो उनके निजी मूल्यों और नैतिकता के "अनुरूप" नहीं थे।
HDFC बैंक के बोर्ड की ऑडिट कमेटी ने 12 मार्च को इस जाँच का आदेश दिया था। यह आदेश बैंक के मार्केटिंग विभाग के एक इंटरनल ऑडिट के बाद दिया गया था, जिसमें कुछ लेन-देन पर सवाल उठाए गए थे और विभाग के कामकाज को "असंतोषजनक" बताया गया था।

घुमा-फिरा कर पहुंची रकम

ये पेमेंट MSRDC डिपॉजिट पर "डिफ्रेंशियल इंटेरेस्ट" के रूप में दिखाई गई थी। ब्याज भुगतान के तौर पर सीधे जमा करने के बजाय, इस पैसे को मार्केटिंग विभाग के जरिए घुमाया गया और चार स्थानीय वेंडरों के जरिए सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान में योगदान के तौर पर दिखाया गया।

एमडी-सीईओ की भूमिका पर सवाल

रिपोर्ट्स के अनुसार जगदीशन उन चर्चाओं के दौरान मौजूद थे, जहाँ MSRDC को अधिक भुगतान करने पर "मौखिक रूप से" सहमति बनी थी। जगदीशन "उस कॉल में शामिल हुए थे, जो यह जाँचने के लिए बुलाई गई थी कि बैंक MSRDC को कैसे मुआवजा दे सकता है, और वे मार्केटिंग बजट के जरिए वन-टाइम अरेंजमेंट के तौर पर ब्याज का अंतर देने के फैसले का भी हिस्सा थे।

मार्केटिंग विभाग ने किया ये काम

HDFC बैंक के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर रवि संथानम ने जाँच के दौरान यह स्वीकार किया कि मार्केटिंग विभाग ने ब्याज की अलग-अलग दरों पर दी गई छूट को मार्केटिंग खर्च के रूप में छिपाने में एक 'सुविधादाता' की भूमिका निभाई।
विजिलेंस रिपोर्ट बाद में 10 अप्रैल को बोर्ड की ऑडिट कमेटी को और उसके एक हफ्ते बाद नॉमिनेशन और रेमुनरेशन कमेटी को सौंपी गई।

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(डिस्क्लेमर: यहां शेयर बाजार की जानकारी दी गयी है, निवेश की सलाह नहीं। जागरण बिजनेस निवेश की सलाह नहीं दे रहा है। स्टॉक मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है, इसलिए निवेश करने से पहले किसी सर्टिफाइड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से परामर्श जरूर करें।)