घर खरीदने से पहले समझ लें 3-20-30-40 का ये गोल्डन रूल, वरना जिंदगी भर चुकाते रहेंगे EMI!
घर खरीदने से पहले वित्तीय परेशानियों से बचने के लिए '3-20-30-40' नियम का पालन करना चाहिए। यह नियम घर की ...और पढ़ें
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3-20-30-40 क्या है ये गोल्डन रूल?
HighLights
घर की कीमत सालाना आय के 3 गुने से अधिक न हो।
डाउन पेमेंट घर की कुल कीमत का कम से कम 20% हो।
कुल EMI मासिक आय के 40% से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली: हर किसी का सपना होता है कि उसका अपना एक घर हो। लेकिन घर खरीदना जिंदगी के सबसे बड़े वित्तीय फैसलों (Financial Decision) में से एक है। अक्सर लोग दूसरों की देखा-देखी या भावनाओं में बहकर अपने बजट से ज्यागा महंगा घर खरीद लेते हैं और फिर सालों तक EMI के बोझ तले दबे रहते हैं।
ऐसी आर्थिक परेशानी और मानसिक तनाव से बचने के लिए एक्सपर्ट घर खरीदने पहले 3-20-30-40 का नियम फॉलो करने की सलाह देते हैं। आइए इस नियम को विस्तार से समझते हैं।
3-20-30-40 में 3 का क्या है मतलब?
यह नियम तय करता है कि आपके लिए कितने बजट का घर खरीदना सुरक्षित है। इस नियम के अनुसार, आप जो भी घर खरीद रहे हैं उसकी कुल कीमत आपकी सालाना पारिवारिक आय (Annual family income) के 3 गुने से अधिक नहीं होनी चाहिए।
उदाहरण के तौर पर अगर आपकी और आपके जीवनसाथी की कुल इन-हैंड सालाना आमदनी मिलाकर ₹15 लाख रुपये है, तो आपको ₹45 लाख (15x3) से ज्यादा का घर नहीं खरीदना चाहिए। इसका फायदा यह होगा कि बजट इसके भीतर रखने से आपको बहुत बड़ा लोन नहीं लेना पड़ेगा और आप आसानी से लोन चुका पाएंगे।
इस नियम में 20 का क्या है अर्थ?
घर खरीदते समय बैंक आपको 100% लोन नहीं देता, कुछ पैसा आपको जेब से देना होता है। यह नियम कहता है कि घर की कुल कीमत का कम से कम 20% हिस्सा डाउन पेमेंट के रूप में आपकी सेविंग्स से जाना चाहिए।
उदाहरण के तौर पर अगर आप ₹50 लाख का घर खरीद रहे हैं, तो कम से कम ₹10 लाख ( 20%) आपके पास नकद होने चाहिए। बैंक से आपको ₹40 लाख तक का ही लोन लेना चाहिए।
इसके फायदे की बात करें तो आप जितना ज्यादा डाउन पेमेंट करेंगे, लोन की रकम उतनी ही कम होगी, जिससे भविष्य में ब्याज (Interest) का बोझ कम पड़ेगा और EMI भी छोटी बनेगी।
30 का नियम क्या है?
यह नियम हर महीने बैंक को जाने वाली किश्त के बारे में है। आपकी होम लोन की EMI आपकी मासिक टेक-होम सैलरी के 30% से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।
उदाहरण के तौर पर अगर आपकी महीने की इन-हैंड सैलरी 1 लाख रुपये है, तो आपकी होम लोन की EMI किसी भी हाल में 30,000 रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए।
इसका फायदा होगा कि अगर EMI 30% के भीतर रहेगी, तो आपके पास राशन, बच्चों की फीस, मेडिकल और रोजमर्रा के खर्चों के लिए पर्याप्त पैसा बचेगा।
40 का नियम कुल कर्जों की लिमिट?
आजकल लोग होम लोन के अलावा कार लोन, पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड की EMI भी चुकाते हैं। यह नियम कहता है कि आपके सभी कर्जों की कुल EMI आपकी मासिक आय के 40% से अधिक नहीं होना चाहिए।
उदाहरण के तौर पर 1 लाख रुपये की सैलरी में, अगर 30,000 रुपये होम लोन की EMI में जा रहे हैं, तो बाकी बचे सभी लोन (कार, फोन, पर्सनल) की EMI 10,000 रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए (ताकि कुल EMI 40,000 रुपये यानी 40% तक ही रहे)।
इसके फायदे की बात करें तो बाकी का 60% पैसा आपके घर खर्च, लाइफस्टाइल, भविष्य के निवेश (SIP, PPF) और इमरजेंसी फंड के लिए सुरक्षित बचेगा।
