8th Pay Commission पर बड़ा अपडेट, टर्म ऑफ रेफरेंस में होगा बदलाव? 2026 से पहले रिटायर हुए पेंशनर्स को मिला DoPT का साथ
8th Pay Commission Latest News: डीओपीटी ने 8वें वेतन आयोग के तहत 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर होने वाले ...और पढ़ें
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सरकार ने कब-कब बदला टर्म ऑफ रेफरेंस?

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| आठवें वेतन आयोग के तहत पेंशन बढ़ोतरी का बेसब्री से इंतजार कर रहे लाखों पेंशनर्स के लिए राहत भरी खबर है। 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर होने वाले करीब 69 लाख केंद्रीय पेंशनर्स के मन में एक बड़ा डर बैठ गया था। डर इस बात का कि आठवें वेतन आयोग के टर्म्स ऑफ रेफरेंस (8th pay commission ToR) में उनकी पेंशन के रिवीजन का कोई स्पष्ट जिक्र ही नहीं है। लेकिन अब, खुद डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग ( DoPT) उनके हक में मैदान में उतर आया है।
DoPT ने सरकार पर बनाया दबाव
ऑल इंडिया डिफेंस इम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF), पोस्टल पेंशनर्स एसोसिएशन, मेल मोटर स्टाफ (MMS) और रेलवे मेल सर्विस (RMS) जैसे बड़े कर्मचारी संगठनों ने सरकार से मांग की थी कि ToR में संशोधन कर 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हुए पेंशनर्स को भी शामिल किया जाए। इस मांग को अब बड़ी ताकत मिल गई है, क्योंकि डीओपीटी ने व्यय विभाग (Department of Expenditure) को चिट्ठी लिखकर इन कर्मचारी संगठनों की मांग का पुरजोर समर्थन किया है। इससे पहले Nc-JCM के जनरल सेक्रेटरी शिवगोपाल मिश्रा भी पेंशनर्स को अपना समर्थन दे चुके हैं।
#8thPayCommission पर महत्वपूर्ण बयान...@AIRF_DELHI pic.twitter.com/aquglLlB8C
— Shiva Gopal Mishra (@ShivaGopalMish1) August 29, 2026
कब-कब टर्म ऑफ रेफरेंस में हुआ बदलाव?
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या आठवें वेतन आयोग के नियमों (ToR) में बीच में बदलाव करना मुमकिन है? क्या पहले कभी ऐसा हुआ है? जवाब है- बिल्कुल हुआ है। इतिहास गवाह है कि सरकार ने जब चाहा, नियमों में बदलाव किया है।
- चौथा वेतन आयोग: नवंबर 1985 में सरकार ने चौथे वेतन आयोग के ToR में बड़ा बदलाव किया था। इसमें साफ तौर पर एक क्लॉज जोड़ा गया था कि मौजूदा और भविष्य दोनों पेंशनर्स के लिए एक सही पेंशन स्ट्रक्चर बनाया जाए। इसमें पब्लिक सेक्टर और राज्य सरकार के कर्मचारियों को भी ध्यान में रखा गया था।
- पांचवां वेतन आयोग: इसमें एक-दो नहीं, बल्कि पूरे 4 बार बदलाव हुए! जनवरी 1995 और जुलाई 1996 में कर्मचारियों को अंतरिम राहत देने के लिए नियम बदले गए। अक्टूबर 1996 में केंद्र शासित प्रदेशों की अधीनस्थ न्यायपालिका को इसके दायरे से बाहर किया गया। वहीं, नवंबर 1996 में प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस (PLB) और तदर्थ बोनस के लिए फिर से संशोधन हुआ।
- छठा वेतन आयोग: इसके ToR में दो बार कैंची चली। दिसंबर 2006 में रेगुलेटरी बॉडीज के सदस्यों (RBI को छोड़कर) और अगस्त 2007 में सुप्रीम कोर्ट के अधिकारियों-कर्मचारियों को इसके दायरे में लाने के लिए नियम बदले गए।
- सातवां वेतन आयोग: फरवरी 2014 में इसके ToR तय हुए थे, लेकिन सितंबर 2015 में सरकार ने एक प्रस्ताव लाकर आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए 4 महीने (31 दिसंबर 2015 तक) का एक्सटेंशन दे दिया था।
अब आगे क्या होगा?
आंकड़े और इतिहास साफ चीख-चीख कर कह रहे हैं कि नियमों में बदलाव कोई नई बात नहीं है। जब 4th से लेकर 7th पे-कमीशन तक लगातार शर्तें बदली गई हैं, तो आठवें वेतन आयोग में क्यों नहीं? DoPT के समर्थन के बाद अब गेंद वित्त मंत्रालय के पाले में है। अगर ToR में संशोधन होता है, तो 2026 से पहले रिटायर होने वाले लाखों कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित हो जाएगा।
