1 नवंबर से दिखेगा "Ease of Doing Business" का असर! CBIC ने व्यापारियों और अधिकारियों के लिए जारी किए 8 सर्कुलर!
केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने GST प्रक्रियाओं को स्पष्ट करने और कारोबारियों के लिए कंप्लायंस आसान ...और पढ़ें

CBIC के 8 सर्कुलर
HighLights
GST रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया अब होगी और भी आसान।
टैक्स नोटिस और अपील प्रक्रियाओं में स्पष्टता लाई गई।
ITC, बैंक-NBFC और निर्यात रिफंड पर नए दिशानिर्देश।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने GST से जुड़ी प्रक्रियाओं को स्पष्ट करने के लिए 8 सर्कुलर जारी किए हैं। 26 अक्टूबर को जारी इन सर्कुलरों में जीएसटी रजिस्ट्रेशन, टैक्स डिमांड और अपील की प्रक्रिया, अपील के लिए जमा की जाने वाली रकम, इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC), बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC), कार डीलरों तथा निर्यात भुगतान और रिफंड से जुड़े मुद्दों पर दिशानिर्देश दिए गए हैं। इनका उद्देश्य टैक्स नियमों को लागू करने में एकरूपता लाना, अनावश्यक विवाद कम करना और कारोबारियों के लिए कंप्लायंस प्रोसेस को आसान बनाना है। ये सर्कुलर जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक में की गई सिफारिशों के बाद जारी किए गए हैं।
रजिस्ट्रेशन के लिए डाक्यूमेंटेशन आसान
जीएसटी रजिस्ट्रेशन के लिए जारी सर्कुलर में आवेदन की जांच और जरूरी दस्तावेजों को लेकर दिशा-निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत टैक्स अधिकारियों को निर्धारित डाक्यूमेंट्स के अलावा अनावश्यक कागजात मांगने या बिना पर्याप्त आधार के आपत्ति उठाने से बचना होगा। आवेदन में कोई कमी होने पर उसे स्पष्ट रूप से बताना होगा, ताकि कारोबारी जरूरी जानकारी या दस्तावेज देकर उसे ठीक कर सकें। इससे रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में अनावश्यक देरी और आवेदन खारिज होने की आशंका कम करने में मदद मिल सकती है।
टैक्स नोटिस और अपील की प्रक्रिया होगी स्पष्ट
टैक्स डिमांड, निर्णय और अपील की प्रक्रिया से जुड़े सर्कुलर में अधिकारियों को नोटिस जारी करने और आदेश तैयार करने के संबंध में गाइडलाइनंस दिए गए हैं। नोटिस में आरोप, संबंधित टैक्स ड्यूरेशन, कानूनी प्रावधान और टैक्स की गणना स्पष्ट होनी चाहिए। केवल कानून की धाराओं का उल्लेख करना पर्याप्त नहीं होगा। इसी तरह, धोखाधड़ी, जानबूझकर गलत जानकारी देने या तथ्य छिपाने के आधार पर सख्त कार्रवाई करने के लिए संबंधित मामले में ठोस आधार होना चाहिए।
गाइडलाइनंस के मुताबिक कारोबारी के जवाब और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने तथा कारण सहित आदेश देने पर भी जोर दिया गया है। जहां संभव हो, औपचारिक कारण बताओ नोटिस जारी करने से पहले कारोबारी को शुरुआती स्तर पर अपना पक्ष स्पष्ट करने का अवसर दिया जा सकता है। इससे कुछ मामलों में विवाद को आगे बढ़ने से पहले सुलझाने में मदद मिल सकती है।
अपील के लिए जमा रकम और रिफंड पर भी स्पष्टीकरण
एक अन्य सर्कुलर में जीएसटी कानून के तहत अपील दाखिल करते समय जमा की जाने वाली रकम और अनुकूल आदेश मिलने पर उसके रिफंड की प्रक्रिया स्पष्ट की गई है। इसमें यह बताया गया है कि विवादित टैक्स राशि और कारोबारी की ओर से स्वीकार की गई देनदारी के बीच अंतर कैसे निर्धारित किया जाए। साथ ही, अपील में जमा रकम वापस मिलने की प्रक्रिया और उस पर ब्याज से जुड़े पहलुओं पर भी स्पष्टीकरण दिया गया है। इससे अपील करने वाले कारोबारियों को अपनी वित्तीय देनदारी और रिफंड की प्रक्रिया समझने में मदद मिलेगी।
ITC, बैंक-NBFC और कार डीलरों से जुड़े मुद्दे
CBIC ने इनपुट सर्विस डिस्ट्रीब्यूटर (ISD) व्यवस्था के तहत इनपुट टैक्स क्रेडिट के वितरण से जुड़े सवालों पर भी स्पष्टीकरण दिया है। इसके अलावा, बैंकों और NBFC के लिए जीएसटी कानून की धारा 17(4) के तहत विकल्प तथा कार डीलरों की ओर से डेमो वाहनों पर आईटीसी के मुद्दे को भी सर्कुलरों में शामिल किया गया है। इन दिशानिर्देशों का मकसद संबंधित कारोबारों में नियमों को आसानी से समझाना है।
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एक्सपोर्टर्स को भुगतान और रिफंड के नियमों में स्पष्टता
निर्यात से जुड़े दो सर्कुलरों में विदेशी भुगतान प्राप्त होने और रिफंड के नियमों पर स्पष्टीकरण दिया गया है। एक्सपोर्ट भुगतान के मामले में, यदि आयात के बकाये और निर्यात से मिलने वाली रकम का अर्जस्टमेंट भारतीय रिजर्व बैंक के लागू निर्देशों के अनुसार किया गया है, तो निर्धारित शर्तों के अधीन इसे निर्यात से प्राप्त भुगतान की शर्त पूरी करने के रूप में माना जा सकता है। इसके अलावा, नियम 96(10) को हटाए जाने से जुड़े मुद्दे पर भी सर्कुलर जारी किया गया है।
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