Cotton Production: रिकॉर्ड तोड़ मांग से घटेगा कॉटन का स्टॉक! जानिए क्या कहती है USDA की ताजा रिपोर्ट
Cotton Production Report: अमेरिकी कृषि विभाग की जून WASDE रिपोर्ट के अनुसार, 2026-27 में वैश्विक कपास उत्पादन स्थिर रहेगा, लेकिन बढ़ती मांग के कारण स् ...और पढ़ें
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HighLights
वैश्विक कपास उत्पादन स्थिर, खपत में वृद्धि का अनुमान।
बढ़ती मांग के कारण कपास का वैश्विक स्टॉक घटेगा।
भारत में कपास की खपत उत्पादन से अधिक रहेगी।
नई दिल्ली: वैश्विक कपास बाजार ( Global cotton market) को लेकर अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) की जून WASDE (World Agricultural Supply and Demand Estimates) रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें 2026-27 को लिए उत्पादन अनुमान को बरकरार रखा गया है, लेकिन मांग बढ़ने और स्टॉक घटने के संकेत दिए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया में कॉटन का उत्पादन (Cotton production) करीब 116 मिलियन बेल रहने का अनुमान है, जो पिछले अनुमान के समान है। हालांकि, खपत (Consumption) इससे ज्यादा यानी करीब 121.7 मिलियन बेल रहने की उम्मीद है, जो मांग में मजबूती को दर्शाता है।
क्या कहती है रिपोर्ट
रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक स्तर पर मांग (Global demand) में बढ़ोतरी और शुरुआती स्टॉक में कमी के चलते आने वाले समय में कॉटन के अंतिम स्टॉक में गिरावट देखने को मिल सकती है। जून के अनुमान के अनुसार, ओपनिंग स्टॉक घटकर करीब 76.63 मिलियन बेल्स रह गया है, जो मई के अनुमान (77.27 मिलियन बेल्स) से कम है। वहीं क्लोजिंग स्टॉक भी घटकर करीब 71.13 मिलियन बेल्स रहने की अनुमान है।
कॉटन की मांग?
मांग के मोर्चे पर तस्वीर मिली-जुली है। चीन (China) में कॉटन (Cotton) की मांग बढ़ने की उम्मीद जताई गई है, जबकि बांग्लादेश (Bangladesh), पाकिस्तान (Pakistan) और दक्षिण कोरिया (South Korea) जैसे देशों में खपत में गिरावट देखी जा सकती है। इसके बावजूद कुल वैश्विक खपत में हल्की बढ़ोतरी का अनुमान है, जो जून में बढ़कर करीब 121.76 मिलियन बेल्स तक पहुंच सकती है।
भारत में कॉटन की मांग
भारत के संदर्भ में भी रिपोर्ट अहम संकेत देती है। 2026-27 में देश का कॉटन उत्पादन करीब 24 मिलियन बेल्स रहने का अनुमान है, जबकि खपत लगभग 26 मिलियन बेल्स हो सकती है। इसके अलावा भारत से करीब 1.5 मिलियन बेल्स एक्सपोर्ट और लगभग 2.5 मिलियन बेल्स इंपोर्ट होने की संभावना जताई गई है।
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रिपोर्ट यह भी संकेत देती है कि वैश्विक स्तर पर कॉटन बाजार में सप्लाई और डिमांड के बीच अंतर बढ़ सकता है, जिससे कीमतों को सपोर्ट मिल सकता है। खासकर जब खपत उत्पादन से ज्यादा रहने की संभावना है, तो बाजार में टाइट सप्लाई की स्थिति बन सकती है।
(डिस्क्लेमर: यह खबर ऑफिशियल रिपोर्ट के आधार पर है। )