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सिर्फ 7 दिन में बेचना होगा चीनी का पूरा स्टॉक, जमाखोरी के खिलाफ सरकार सख्त! 1 सितबंर से बिक्री का नया नियम

Published: Mon, 31 Aug 2026 01:52 PM (IST)Updated: Mon, 31 Aug 2026 01:54 PM (IST)

सरकार ने चीनी की कीमतों को नियंत्रित करने और जमाखोरी रोकने के लिए बिक्री के नए नियम लागू किए हैं। ...और पढ़ें

चीनी के स्टॉक पर सरकार का सख्त नियम

चीनी के स्टॉक पर सरकार का सख्त नियम

HighLights

  1. चीनी बिक्री के लिए सरकार ने नए नियम बनाए।

  2. मिलों को 7 दिन में बेचना होगा रिलीज्ड स्टॉक।

  3. जमाखोरी रोकने और कीमतें नियंत्रित करने का लक्ष्य।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| चीनी की हालिया कीमतों में तेज बढ़ोतरी और सप्लाई में कमी की अटकलों के बीच सरकार ने बिक्री का नया नियम बनाया है। सरकार ने चीनी के कोटे को 15-15 दिनों के पखवाड़े में बांट दिया है। 1 सितंबर 2026 से लेकर 15 सितंबर 2026 के लिए 13 लाख टन चीनी कोटा तय किया गया है। इसके अलावा रिलीज ऑर्डर मिलने के भी नियम में बड़ा बदलाव आया है।

सिर्फ 7 दिनों में बेचना होगा स्टॉक

चीनी की जमाखोरी और कृत्रिम कमी की अफवाहों पर लगाम लगाने के लिए चीनी मिलों को रिलीज ऑर्डर मिलने के 7 दिन के अंदर हर हाल में अपना स्टॉक मार्केट में बेचना जरूरी होगा। पहले यह समय 1 महीने का होता था, जिसे घटाकर 1 सप्ताह कर दिया गया है। सरकार का ये कदम घरेलू बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना है, जिससे आने वाले त्योहारों में बाजार में चीनी की उपलब्धता मांग के अनुसार बनी रहे।

1 ही बार में नहीं बेच सकेंगे पूरा स्टॉक

सिर्फ 7 दिनों में पूरा स्टॉक बेचने के नियम के बाद एक और सख्त नियम है, वो ये कि चीनी के स्टॉक को एक ही झटके में नहीं बेच सकते हैं। यदि चीनी मिलों के द्वारा एक बार में ही सारा स्टॉक बाजार में बेचा जाता है तो कीमतों में अचानक बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। क्योंकि सप्लाई ज्यादा होने से कीमत गिर जाती है। वहीं यदि मिलो में अधिक समय तक स्टॉक भरा रहता है और मार्केट में सप्लाई कम होती है तो कीमत बढ़ती जाती है जैसा कि अभी हो रहा है। इसलिए सरकार की तरफ से रिलीज ऑर्डर जारी किए जाते हैं ताकि मार्केट में चीनी की उपलब्धता सामान्य बनी रहे।

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गिरेंगे चीनी के दाम?

सरकार की ओर से चीनी की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए तमाम उपाय किए जा रहे हैं। जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ सरकार की सख्ती जारी है, अधिकारियों की ओर से लगातार फिजिकल वेरिफिकेशन भी किया जा रहा है, जिससे मांग और आपूर्ति की रियल टाइम निगरानी बनी रहे। इससे चीनी की खुदरा कीमतों में भी गिरावट आने की संभावना जताई गई है।