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Gold Silver Price: फेड के सख्त रुख से सोने-चांदी की चमक फीकी? ब्याज दर कटौती टली तो दबाव में गोल्ड-सिल्वर प्राइस!

Published: Thu, 09 Jul 2026 09:36 AM (IST)

Gold Silver Price Crash Today: ईरान-अमेरिका वार्ता टूटने और मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने के बावजूद, 9 जुलाई को भारत ...और पढ़ें

Gold-Silver Price

Gold-Silver Price

HighLights

  1. मध्य पूर्व तनाव के बावजूद सोने-चांदी के दाम गिरे।

  2. फेडरल रिजर्व ने ब्याज दर कटौती में देरी का संकेत दिया।

  3. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से महंगाई बढ़ने का डर।

नई दिल्ली: डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान-अमेरिका के बीच शांति समझौते को पूरी तरह खत्म करने के ऐलान का असर अब सीधे आम आदमी की जेब और कमोडिटी मार्केट पर दिखने लगा है। मिडिल ईस्ट में फिर से भड़के भू-राजनीतिक तनाव (Middle East Crisis) के बीच, भारत में आज 9 जुलाई सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।


कितना सस्ता हुआ सोना और चांदी?

इंटरनेशनल मार्केट Comex में सोने की (Gold Price) कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। आंकड़ों की मानें तो सोना करीब 0.37% तक गिरा और कीमत 15.00 डॉलर चढ़कर 4,067 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई हैं। वहीं चांदी (Silver Price) के दाम भी गिरे हैं। चांदी 0.85% की गिरावट आई है और यह 58.045 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड कर रही है।

वहीं भारत के घरेलू MCX में भी सोने के दाम तेजी से गिरते दिखे। MCX पर सोना करीब ₹1.43 लाख से ₹1.44 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास ट्रेड करता दिखा जो हाल के दिनों में उतार-चढ़ाव के बाद अब बड़ी गिरावट नजर आ रही है। वहीं भारत में चांदी के भाव में भी गिरावट देखी गई है। यह लगभग ₹2.23 लाख से ₹2.25 लाख प्रति किलोग्राम के आसपास ट्रेड करता दिखा। जो पिछले दिनों के मुकाबले काफी तेजी से गिरा है।


तनाव के बीच क्यों गिरे सोने-चांदी के दाम?

आमतौर पर युद्ध या तनाव की स्थिति में सोने की कीमतें बढ़ती हैं, लेकिन इस बार समीकरण अलग हैं। ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता टूटने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल (Crude Oil) 5% से ज्यादा उछलकर 78 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया है। तेल महंगा होने से दुनिया भर में महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।

फेड मीटिंग में क्या हुआ? 

Federal Reserve की ताजा FOMC (Fed Minutes) बैठक में संकेत मिला है कि ब्याज दरों को लेकर अभी जल्दबाजी में कोई कटौती नहीं की जाएगी। अधिकारियों ने साफ कहा कि महंगाई (inflation) अब भी उनके 2% के लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है, इसलिए पॉलिसी को “higher for longer” यानी ज्यादा समय तक सख्त रखने की जरूरत पड़ सकती है।