Crude Oil Price: $130 के पार जाएगा क्रूड, एक्सपर्ट ने बताई उछाल की 3 बड़ी वजह; भारत में महंगा होगा पेट्रोल-डीजल?
Crude Oil Price Today: मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच क्रूड ऑयल की कीमतों में जोरदार उछाल देखने को मिल रहा है। एक्सपर्ट का कहना है कि यह उछाल मुख्य रूप से ...और पढ़ें
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Crude Oil Price: $130 के पार जाएगा क्रूड, एक्सपर्ट ने बताई उछाल की 3 बड़ी वजह; भारत में महंगा होगा पेट्रोल-डीजल?

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
नई दिल्ली| मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच क्रूड ऑयल की कीमतों में लगातार तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल 83 डॉलर और ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर के आसपास (Crude Oil Price) कारोबार कर रहा है। वहीं मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर क्रूड 2.86 फीसदी यानी 223 रुपए उछलकर 8029 रुपए प्रति बैरल पर पहुंच गया।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि क्रूड की कीमतों में इस समय उतार-चढ़ाव की सबसे बड़ी वजह है- भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई में रुकावट। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज बंद होने से ग्लोबल ऑयल सप्लाई चेन पर बड़ा असर पड़ा है। ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि क्या आने वाले दिनों में क्रूड और महंगा हो सकता है? इसका भारत पर क्या असर पड़ेगा और आने वाले दिनों में क्रूड का आउटलुक क्या हो सकता है?
जागरण बिजनेस से बातचीत के दौरान इंटेलिसिस वेंचर्स के फाउंडर और सेबी रजिस्टर्ड रिसर्च एनालिस्ट अमित सुरेश जैन तमाम सवालों के जवाब दिए और आने वाले दिनों के टारगेट प्राइस भी दिए। पेश हैं- बातचीत के मुख्य अंश:
सवाल 1: क्रूड ऑयल की कीमतों में इतनी तेज उठापटक की सबसे बड़ी वजह क्या है?
जवाब: क्रूड में मौजूदा उतार-चढ़ाव के पीछे तीन बड़े कारण हैं- भू-राजनीतिक तनाव, OPEC+ के सप्लाई फैसले और ग्लोबल डिमांड। इनमें सबसे बड़ा ट्रिगर फिलहाल भू-राजनीतिक तनाव है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज बंद होने से ऑयल की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। डिमांड में उतार-चढ़ाव जरूर होता रहता है, लेकिन सिर्फ डिमांड में बदलाव इतनी तेज अस्थिरता पैदा नहीं कर सकता। जब तक अमेरिका और ईरान के बीच कोई समझौता नहीं होता और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दोबारा नहीं खुलता, तब तक क्रूड में तेज volatility जारी रहने की संभावना है।
सवाल 2: अगले 3 से 6 महीने में क्रूड का टारगेट क्या है और कौन-से लेवल अहम हैं?
जवाब: आज यानी 11 अगस्त 2026 को दोपहर 1:21 बजे WTI क्रूड करीब $84 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।
भारतीय बाजार में 19 अगस्त 2026 का फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट करीब ₹8,000 पर है। यहां से क्रूड के ₹8,400 और ₹8,800 तक जाने की मजबूत संभावना है। अगले 3 से 6 महीनों में WTI क्रूड $130 के ऊपर भी जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो भारतीय बाजार में इसकी कीमत करीब ₹13,000 तक पहुंच सकती है।
हालांकि, इसके लिए जरूरी है कि क्रूड ₹7,300 से नीचे टिकाऊ गिरावट न दिखाए। WTI हाल में करीब $73 का निचला स्तर टेस्ट कर चुका है। अगर भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ता है और हॉर्मुज बंद रहता है, तो क्रूड नया ऑल टाइम हाई भी बना सकता है।
सवाल 3: 2026-27 में क्रूड का बड़ा आउटलुक क्या है? तेजी रहेगी या सप्लाई बढ़ने से दबाव आएगा?
जवाब: WTI क्रूड अगले छह महीनों में $130 तक पहुंच सकता है, बशर्ते यह दोबारा $73 का स्तर टेस्ट न करे। जब तक $73 नहीं टूटता, तब तक ऊपर की तरफ $130 तक जाने की संभावना बनी हुई है। वहीं गिरावट की स्थिति में $66 बड़ा सपोर्ट है। अगर $66 decisively टूटता है तो क्रूड में तेज गिरावट आ सकती है और कीमत $50 से नीचे भी जा सकती है।
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मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव, सप्लाई में रुकावट और उत्पादन प्रतिबंधों को देखते हुए क्रूड पर बहुत ज्यादा bearish नजरिया रखना ठीक नहीं होगा। 2026-27 में भी क्रूड की कीमतें अपेक्षाकृत ऊंचे स्तरों पर बनी रह सकती हैं।
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सवाल 4: क्रूड में बड़ी तेजी या गिरावट के सबसे बड़े रिस्क क्या हैं?
जवाब: अमेरिका का क्रूड ऑयल स्टॉकपाइल पिछले कई वर्षों के निचले स्तरों में है। ऐसे में डिमांड मजबूत रहने की उम्मीद है। दूसरी तरफ, भू-राजनीतिक तनाव और मिडिल ईस्ट की स्थिति क्रूड के लिए सबसे बड़ा अपसाइड रिस्क साबित हो सकता है।
गिरावट की स्थिति में क्रूड $73 से $67 तक आ सकता है। अगर $67 के नीचे मजबूत ब्रेक मिलता है तो कीमत करीब $50 तक गिर सकती है।
इसलिए अगर कोई क्रूड पर बुलिश नजरिया रखता है तो $73 के नीचे एग्जिट प्लान रखना जरूरी होगा। जब तक क्रूड $73 के नीचे नहीं जाता, तब तक $130 की तरफ बढ़ने की संभावना मजबूत बनी हुई है।
सवाल 5: अगले 12 महीनों में क्रूड की उचित कीमत क्या हो सकती है और किन हालात में आउटलुक बदल सकता है?
जवाब:
नवंबर में अमेरिका में मिडटर्म चुनाव होने हैं। ऐसे में चुनाव से पहले अमेरिका और ईरान के बीच भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।अगर अमेरिका और ईरान के बीच कोई औपचारिक समझौता नहीं होता तो स्थिति और बिगड़ सकती है। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को पूरी तरह बंद रखा है। शुरुआत में ईरान युद्ध से हुए नुकसान के लिए अमेरिका से मुआवजे की मांग कर रहा था। लेकिन हाल की रिपोर्टों के मुताबिक अब अमेरिका भी युद्ध की वजह से हुए नुकसान के लिए ईरान से मुआवजा मांग रहा है।
फिलहाल हालात सामान्य होते नहीं दिख रहे हैं। पिछला समझौता भी दो हफ्ते से ज्यादा नहीं टिक पाया था। अगर नया समझौता होता है लेकिन उसे लागू नहीं किया जाता या वह लंबे समय तक कायम नहीं रहता, तो तनाव खत्म होने में वक्त लग सकता है।
ऐसे में आने वाले महीनों में भू-राजनीतिक जोखिम क्रूड की कीमतों को और सपोर्ट दे सकते हैं और कीमतों को ऊंचे स्तरों की तरफ धकेल सकते हैं।